इंदिरा टीवी पर केंद्रीय जांच ब्यूरो का छापा, जगन की बढ़ी मुश्किलें

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी की  इंदिरा टीवी और एमार टाउनशिप परियोजना में कथित अनियमितताओं के मामले में कई स्थानों पर तलाशी शुरू कर दी। जगन की पार्टी ने इस सीबीआई कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की करीब 20 टीमों ने हैदराबाद, बेंगलुरू और मुम्बई में विभिन्न स्थानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। सीबीआई को आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज करने के लिए सबूतों की तलाश है।
एक विशेष अदालत से तलाशी वारंट हासिल करने के बाद सीबीआई अधिकारियों ने जगनमोहन रेड्डी, उनकी बहन शर्मिला, आईएएस अधिकारी बी.पी. आचार्य, व्यवसायी निम्मागड्डा प्रसाद और कई अन्य लोगों के आवासों व कम्पनियों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
कडप्पा से सांसद जगन की कम्पनियों के कार्यालयों, उनकी कम्पनियों में पैसा लगाने वाले लोगों के घरों में भी तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश में सीबीआई द्वारा दोनों ही मामलों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने के एक ही दिन बाद हैदराबाद में 22 स्थानों पर तलाशी की जा रही है।
एपीआईआईसी ने एम्मार को जमीन आवंटित की थी। बाद में एम्मार ने कथिततौर पर एपीआईआईसी की अनुमति के बिना ही उसके शेयर संयुक्त उद्यम में लगा दिए थे। इससे सरकारी खजाने को 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
सीबीआई अधिकारियों ने जगन की भारती सीमेंट कम्पनी, उनके द्वारा संचालित तेलुगू दैनिक व समाचार चैनल साक्षी में भी तलाशी शुरू कर दी है। जगन के बेंगलुरू स्थित आवास व मुम्बई स्थित कार्यालयों में भी तलाशी शुरू कर दी गई है।
जगन के आवास के बाहर विधायक शोभा नेगी रेड्डी ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्हें कांग्रेस पार्टी छोड़ने की वजह से निशाना बनाया गया है।
दिवंगत मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन पिछले साल नवंबर में कांग्रेस से अलग हो गए थे। दरअसल साल 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्हें कांग्रेस में अलग-थलग कर दिया गया था।
बाद में जगन ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी बनाई। इस साल मई में हुए लोकसभा उप-चनावों में कडप्पा में उनकी पार्टी को भारी बहुमत मिला।
शोभा ने कहा, “राज्य के लोग देख रहे हैं कि कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए जिस नेता ने कड़ी मेहनत की उसके परिवार के साथ यह पार्टी कैसा बर्ताव कर रही है।”
एक अन्य नेता गट्टू रामचंद्र राव ने कहा कि जगन को कांग्रेस से अलग होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “रोसैया को क्लीनचिट मिल जाती है क्योंकि वह कांग्रेस में हैं और जगन को निशाना बनाया जाता है क्योंकि वह पार्टी से अलग हो गए।”
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने हाल ही में एक भूमि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के. रोसैया को क्लीनचिट दी थी।
जगन की गिरफ्तारी की आशंका पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “जब सरकार अन्ना हजारे को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में डाल सकती है तो जगन की गिरफ्तारी भी अप्रत्याशित नहीं हो सकती।”
जगन के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर
सीबीआई ने वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष तथा सांसद जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में बुधवार को एफआईआर दर्ज कर ली।
सीबीआई ने एमार प्रॉपर्टी मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज की है। कोर्ट ने जगन के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद इस संबंध में गहराई से जांच के निर्देश दिए थे।
निवेशक भी फंसे : सीबीआई उन लोगों और कंपनियों की भी जांच करेगी जिन्होंने जगन मोहन रेड्डी की कंपनियों में निवेश किया है या जमीन के सौदों में दलाली दी या ली है। जगन के खिलाफ हवाला लेन-देन के आरोपों की भी जांच होगी।
43 हजार करोड़ कहां से आए : आंध्र प्रदेश के हथकरघा व वस्त्र मंत्री पी शंकर राव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जगनमोहन के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि 2009 में पिता की मौत के समय जगनमोहन की संपत्ति 11 लाख रुपए थी। अब वह 43 हजार करोड़ रुपए कैसे हो गई।
गिरफ्तारी के भी आसार
जगन मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीमें बेंगलुरू और विशाखापट्टनम से हैदराबाद पहुंच रही हैं। सीबीआई सूत्रों के अनुसार इस मामले में सबूत नष्ट होने की आशंका में जगन की गिरफ्तारी से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस बारे में फिलवक्त कुछ नहीं कहा जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार जगत की जगति पब्लिकेशंस, इंदिरा टेलीविजन, जननि इन्फ्रास्ट्रक्चर, कार्मल एशिया एवं  संदूर पावर की जाँच होगी.

 

(पोस्ट दैनिक भास्कर की खबर पर आधारित)

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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