/* */

कांग्रेसी मीडिया ने राहुल को दिया ‘ रिहाई का क्रेडिट’, HT ने कहा, “अण्णाज़ ड्रामा कंटीन्यूड..”

Page Visited: 156
0 0
Read Time:3 Minute, 33 Second

 

Headline Today: अण्णा का ड्रामा..?

एक तरफ जहां देश-विदेश की मीडिया अण्णा के आंदोलन की सराहना में जुटी थी वहीं कुछ ऐसे चैनल भी थे जो अपना ‘ खेल’ खेलने में जुटे थे। जब शाम को कांग्रेसियों ने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की चर्चा शुरु की तो कई चैनल पूरी तरह इसे प्रचारित करने में जुट गए। यहां तक कि कई चैनलों ने इसे हेडलाईन तक बना दिया। दरअसल अण्णा के आंदोलन से बैकफुट पर आई कांग्रेस के मीडिया प्लैनरों ने जब एक दिन पहले लगाए मनीष तिवारी के आरोपों की भद पिटते देखा तो उन्होंने नया पैंतरा खेल दिया। तय किया गया कि अगर हालात बेकाबू हुए तो राहुल गांधी शाम को प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करेंगे और उसी के बाद अण्णा की रिहाई के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। फिर कांग्रेसी इस ‘ रिहाई’ का क्रेडिट ‘ भ्रष्टाचार से नफरत करने वाले’ राहुल को दे देंगे।

हालांकि कांग्रेस की इस योजना के बारे में सोमवार से ही फेसबुक और गूगल प्लस पर चर्चा जारी थी, लेकिन कांग्रेस के वफादार चैनलों ने इसे ब्रेकिंग न्यूज़ कह कर प्रचारित किया। यहां तक तो ठीक भी था, लेकिन कुछ अंग्रेजी चैनल तो इससे भी आगे निकल कर अण्णा के आंदोलन को ड्रामा ठहराने में जुट गए। हेडलाइन टुडे के ऐंकर शिव अरूर ने जब कहा, “अण्णाज़ ड्रामा कंटीन्यूड.. (अण्णा का नाटक जारी रहा..)” तो दर्शक भी हैरान रह गए।

खास बात यह रही कि शिव अरूर ने ड्रामे वाली यह पंक्ति प्रसंगवश नहीं कही थी.. एंकर ने इस पंक्ति को बार-बार दोहराया और रात भर चले बुलेटिनों में ताज़ा अपडेट के साथ भी कहा। बताया जाता है कि चैनल का यह रुख टीवी टुडे ग्रुप की बदलती नीतियों के कारण है। गौरतलब है कि टीवी टुडे ने कई वर्षों तक ‘ भाजपाई दलाल’ कहे जाने वाले प्रभु चावला के बदले कांग्रेसी सांसद रह चुके एमजे अकबर को अपने संपादकीय प्रमुख के तौर पर तैनात किया है।

बताया जाता है कि कांग्रेस और टुडे ग्रुप दोनों को एक-दूसरे की जरूरत थी जिसमें अकबर एक मजबूत पुल के तौर पर उभरे हैं। हालांकि इस ग्रुप के अन्य चैनल आजतक और शायद यह अकबर का ही असर था कि अब तक कांग्रेस के प्रमुख पैरोकार माने जाने वाले पत्रकारों प्रणॉय रॉय और राजदीप सरदेसाई के चैनलों (एनडीटीवी और आईबीएन) जिस जनाक्रोश के आगे घुटने टेकते नज़र आए वह भी हेडलाइन टुडे को अपनी ‘ नाटकीय’ टिपण्णी से डिगा नहीं पाया।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram