चलो वह पत्रकार है ना, तो उसे मार डालो – अफसर और दबंग नेताओं के शिकंजे में फंसा पत्रकार

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निकाय चुनाव में मतदान के दौरान भदोही के जिलाधिकारी ने एक मतदाता को सरेआम थप्पड़ मार दिया. मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने इस घटना को अपने कैमरे में कैच किया, तो डीएम साहब भड़क गये. मौजूद थानाध्यक्ष को ललकार कर उन्हों ने पत्रकार को दबोचा और जमकर पीटने के बाद थाने के हवालात में बंद कर दिया. इसके बाद इस पत्रकार को पहले तो शहर-बदर किया गया और फिर उसे जान से मारने की साजिशें की जा रही हैं.journalist

यह मामला है भदोही के सुरेश गांधी का. सुरेश पिछले करीब 15 बरसों से दैनिक हिन्दुस्तान, जन संदेश टाइम्स, आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत रहे हैं. सुरेश का आरोप है कि भदोही कोतवाल संजयनाथ तिवारी सहित पुलिस कर्मी मेरे व मेरे परिवार की हत्या करवा देना चाहते है. इन्हें सपा के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा व मेरे विरोधी गुलाम रसुल सहित कई अन्य का संरक्षण प्राप्त है. इनकी शिकायत मुख्य मंत्री से लेकर कई सम्बन्धित सचिवो, अफसरो, व मंत्रियों से की लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है.

सुरेश गांधी का कहना है कि वे भदोही के समाजिक सरोकारो जुडी खबरों के साथ-साथ गरीब-दलितो व पीडितो को आवाज को प्रमुखता से उठाने व समय-समय पर न सिर्फ सडी-गली प्रशासनिक व्यवस्था व उनकी जादतियों व खामियों को उजागर करनें के साथ ही सत्ता के जनप्रतिनिधियों के काले कारनामों को भी जनता के बीच खबरों के जरिये अवगत कराते हैं. बकौल सुरेश गांधी:- इन्हीं मेरी गलतियों से कुपित होकर भदोही के प्रशासनिक अफसर व बाहुबली विधायक मेरे विरोधियों के साजिंश में आकर कोतवाल थाना-भदोही संजयनाथ तिवारी ने पहले गुण्डा एक्ट की कार्यवाही की बाद में तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ला की रिपोर्ट पर जिला बदर कर दिया. जबकि जिन 15 साल पुराने मुकदमों को आधार बनाकर कार्यवाही की गयी है उसमें मुझे न्यायालय से दोषमुक्त किया गया है या पुलिस ने खुद फाइनल रिपोर्ट लगा दी हैं.

मामला यह है कि जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी गत 2012 जून में नगर निकाय चुनाव के दौरान भदोही के एम.ए.समद इण्टर कालेज बूथ पर धाधॅली व फर्जी मतदान को रोकने पहुंचे थे. उसी दौरान जिलाधिकारी ने लाइन में खडे एक युवक को थप्पड मार दिया जिसकी मैंने फोटो खीच ली. फोटो खिचते ही उनकी नजर पड गयी और बुलाकर पहले परिचय पूछा परिचय बताने के बाद भी बगल में खडे पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ला को निर्देश दिया कि इसे गिरफतार कर लों. उनके द्वारा कई बार निर्देश दिये जाने के वावजूद पुलिस ने गिरफतार नहीं किया और कहा कि गांधीजी जनपद के अच्छे पत्रकारों में से है फोटो अभी डिलिट करवा देता हॅूं. एस. पी. के कहने पर मेरा मोबाइल कैमरा लेकर पुलिस ने फोटो डिलिट कर दी. इसके बावजूद भी जिलाधिकारी मेरी गिरफतारी के लिये अडे रहे लेकिन मौका देखकर में वहां से हट लिया और दूसरे दिन अपने समाचार पत्र जनसंदेश टाइम्स में खबर छपी कि ‘‘लोकतंत्र के पर्व पर दिनभर हाफता रहा तंत्र, एम.ए. समद बूथ पर अपनी नाकामीयों पर बौखलाये डी.एम.‘‘ खबर पढ कर डी.एम खिसिया उठे और मेरे मोबाइल पर फोन पर सूचना अधिकारी से कहलवाया की डीएम से पंगा महॅगा पडेगा और तभी से डी. एम. नाराज रहने लगें.

गत नवम्बर 2012 में मोहर्रम पर्व के दौरान 20 नवम्बर को दरोपुर व घमहापुर में ताजिया रास्ते विवाद को लेकर उपजे विवाद के मामले में लोगों से पूछॅताछ कर खबर छापी थी ताजिया मार्ग को लेकर घमहापुर में तनाव. इस खबर पढने के बाद पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ला ने मेरे मोबाइल पर फोन किया कि जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी आप से काफी नाराज हैं. तनाव की खबर क्यों छपी है मैंने बताया कि स्थानिय लोगो के आक्रोश व बातचीत पर खबर छपी फिर भी आप का भी पक्ष छपेगा घन्टे भर बाद फिर से फोन कर एस. पी शुक्ला ने बताया कि कोतवाली ने दोनो पक्षो को बुलाकर सुलह समझौता करा लिया गया है अब विवाद नहीं है. एस.पी. के हवाले से दूसरे दिन खबर छपी की मोहल्ले में तनाव नही है विवाद सुलझा. 25 नवम्बर को मोहर्रम के दिन ग्यारह बजे दरोपुर में रास्ता विवाद को लेकर ही डी.एम., एस.पी. की मौजूदगी में जमकर ईट-पत्थर व फायरिंग जिसमें विधायक जाहिद बेग सहित कई घायल हो गये. लोगो ने बताया कि अगर डी.एम. यह न कहते कि सडक तुम्हारे बाप की है क्या सडक मेरी है और मै जिधर से चाहूंगा ताजिया उसी रास्ते ले जाने दूंगा, तो उपद्रव न होता. दूसरे दिन फिर खबर छपी की आखिर चौकन्ना क्यों नहीं रहा प्रशासन, सुलझा था तो उलझा कैसे, साजिश के तहत भडकाई गयी हिंसा, हिंसा के लिए डीएम, एसपी जिम्मेदार-महमूद आदि खबरों से डी.एम. कुपित हो गये.

तीन महिने बाद कोतवाल संजयनाथ तिवारी को संजिश में लेकर पहले गुंडा एक्ट की रिपोर्ट एस.पी. को प्रेषित की और एस. पी. की रिपोर्ट पर डी.एम. ने 25 मार्च को डी. एम. ने नोटिस जारी करायी और चार अप्रैल को अपना पक्ष रखने का मौका दिया. मेरे विद्वान अधिवक्ता द्वारा पे्रषित की गयी आवेदन व दलीलो को सुने वगैर 9 अपे्रैल को जिलाबदर की कार्यवाही करने के बाद पूरे शहर में डुगडुगी बजवाकर मुझे चोर उच्चका, डकैत, माफिया आदि शब्दो से अपमानित कराया गया उसके बाद मेरे मकान मालिक विनोद गुप्ता व सुमित गुप्ता आदि निवासी काजीपुर रोड, भदोही पर दबाव बनाकर कोतवाल संजयनाथ तिवारी 23 मार्च 2013 को रात 8.30 बजे मु0 अ0 सं0-337/2013, धारा-452, 386, 323, 504, 506 आई.पी.सी. के तहत फर्जी तरीके से पुलिसिया भाषा में रपट दर्ज करा दी. मेरे खिलाफ यह रपट तब दर्ज की गयी जब मैंने 23 मोर्च 2013 को दोपहर में उप-जिलामजिस्ट्रेट न्यायालय में कोतवाल संजयनाथ तिवारी द्वारा प्रेषित धारा-110 जाब्ता फौजदारी की मनगंढत आरोपों जिसमें मैं न्यायालय से दोषमुक्त हॅू या पुलिस ने खुद फाइनल रिपोर्ट लगायी है पर अपनी आपत्ति दाखिल कर दी. दोषमुक्त मामले में मेरे द्वारा जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गयी रिपोर्ट में खुद एएसपी. ने तीनो आरोपो में दोषमुक्त की बात कही है. कोतवाल संजयनाथ तिवारी ने अपनी झूठी आरोपों को साबित करने के लिये मकान मालिक की रिपोर्ट दर्ज की.

फिलहाल डी.एम., एस. पी. व कोतवाल सहित मकान मालिक की झूठी रपट में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खण्ड पीठ ने न सिर्फ 20 मई 2013 के आदेश में डी.एम. द्वारा की गयी जिला बदर की कार्यवाही पर रोक लगा दी बल्कि मकान मालिक की एफ.आई.आर. में भी उच्च न्यायालय के आदेश पर 13 जून 2013 को जिला न्यायालय ने 25 जून तक के लिए अन्तरिम जमानत दे दी लेकिन मुझे बरबाद कर देने पर तुले कोतवाल संजयनाथ तिवारी पहले जिला बदर की कार्यवाही के दौरान बाहर था तो मकान मालिक को उकसाकर ओैर षडयंत्र में शामिल कर 07 मई 2013 को आलमारी में रखें नगदी समेत जेवरात आदि लूटवा दी. 20 मई 2013 को डी. एम. के जिलाबदर के आदेश पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाने की खबर सुनने के बाद 01 जून 2013 को दुबारा मकान मालिक को उकसा कर कमरे का ताला तोडवाकर घर में पन्द्रह सालों से तिनका तिनका जुटा कर रखें लाखों के गृहस्थी के सामान व कम्प्यूटर, कैमरा, मूबी कैमरा, जेवर आदि लूटवा दी. इन सारे धटना क्रमों की मेरे व मेरी पत्नी रश्मि गांधी द्वारा कोतवाली सहित डीएम व एसपी सहित मुख्यमंत्री, प्रमुख गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, आईजी, डीआईजी आदि को रजिस्टर्ड पत्र भेजवायी लेकिन सुनवाई नहीं हुई. इसके पहले मेरी पत्नी 10 मई को खुद पुलिस अधीक्षक से मिलकर घटनी की तहरीर दी लेकिन जांच कराने का आश्वासन देकर लौटा दिया गया लेकिन अभी तक सुनवाई नही हुयी.

इसके अलावा तथ्यों पर आधारित खबरें न प्रकाशन हो, बाहुबली विधायक विजय मिश्रा की शह पर जिले में चल रहे अवैध खनन सडक निर्माध में धांधली व जगह जगह रंगदारी वसूलने जैसी घटनाओं का पर्दाफाश न हो और ब्लाक प्रमुख सहित कई चुनाव ने बरती गयी धांधली व पूर्वान्चल के इनामी माफियाओ की खबरें न छपे इसके लिए बाहुबली विधायक व ब्लाक प्रमुख के इशारों पर पुलिसिया उत्पीडन करायी जा रही है. इसी के तहत कोतवाल संजयनाथ तिवारी हर सीमा लांघ कर 14 जून 2013 को कोतवाल व उसके दर्जनभर दरोगा व सिपाहियों ने न सिर्फ मारापिटा बल्कि घसीटते हुऐ कोतवाली ले जाते समय जमकर मारापीटा भद्दी-भद्दी गालियां दीं और कहा पुलिस पर फायर किया है गोली मिस हो गयी, साले को पुलिस पर हमला करने के आरोप में जेल भेज दो, गांजा, अफीम व चरस में रपट दर्ज करो जिससे जेल में ही सड जाय.

इतना ही नही कोतवाली के अन्दर न सिर्फ मेरा बाल उखाडा गया बल्कि पैर में कील ठोककर जख्मों पर नमक छिडका गया. मै कराहता रहा लेकिन बेरहम कोतवाल व सिपाहियों ने लगातार लाठियां बरसायी. उसके अलावा कोतवाल संजयनाथ तिवारी ने धमकी दी की अगर मेरा टान्सफर भी हो जायेगा तो किसी भी जनपद में रहकर वहा के घटना क्रमो में मुल्जिम बनाकर जेल भेज दूंगा या तो वहां के अपराधियों को भेजकर तुम्हारे व तुम्हारे परिवार की हत्या करवा दूंगा. शुक्र है कि मेरे गिरफतारी की सूचना मेरी पत्नि को समय पर मिल गयी और उनके द्वारा समाचार पत्र कार्यालय सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों व मंत्रियों से गुहार लगाने के बाद डीजीपी. के हस्तक्षेप पर रात नौ बजे यह कह कर छोड दिया कि सुरेश गांधी को पूछॅताछ के लिए लाया गया था कोई रिपोर्ट दर्ज नही है इन्हें छोडा जा रहा है. इस दौरान पुलिस ने मेरा मेडिकल भी सही तरीके से नही होने दिया सिर्फ मामूली जख्म दिखकर रिपोर्ट लगवा दी. कोतवाल ने कहा कि अगर ज्यादा जख्म दिखा दूंगा तो फिर मैं नहीं छोड पाउॅगा.

लेकिन 16 जून को न्यायालय द्वारा पता चला कि मेरे खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या-144/13, धारा-332, 353, 504, आई.पी.सी. के तहत रपट दर्ज की गई. भदोही में आंतक के पर्याय बने कोतवाल संजयनाथ तिवारी को बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का संरक्षण प्राप्त है उन्ही के इसारे पर जब जिसे चाहा कोतवाल मारपिट कर बेईज्जत कर रपट लिख देते है . मै अकेला ही नही उनके आंतक से भदोही के कई पत्रकार व सम्भ्रांत नागरिक उत्पीडन के शिकार है वर्तमान में भदोही में इमर्जेन्सी जैसा माहौल है खास बात यह है कि कोतवाल के सात माह के कार्यकाल में कई अपराधिक घटनाये हुई लेकिन एक भी घटना का पर्दाफाश नही हुआ और न ही कोई एक अपराधी पकडा गया लेकिन सम्भ्रान्त नागरिकों पर गुण्डा एक्ट व उत्पीडन की कार्यवाही होती रही. मेरे व मेरे परिवार की हत्या करा देने पर आमदा कोतवाल न सिर्फ मुझे बेघर कर दर दर की ठोकरे खाने को मजवूर कर दिया है बल्कि सेंट मैरिज स्कूल नई बाजार में पढ रहे दो बच्चे साहिल गांधी कक्षा-6 व सेजल गांधी कक्षा-10 की भी पढाई लिखाई चौपट हो रही है बच्चे स्कूल नही जा पा रहे है मेरे साथ साथ मेरे बच्चों का भविष्य चैपट हो रहा है. इसकी गुहार मैने सभी आयोग काउंसिल व प्रशासनिक अफसरों से की है लेकिन सुनवाई नही हो सकी.

निवेदन है कि कोतवाल संजयनाथ तिवारी व उनके हमराही दरोगा के खिलाफ कार्यवाही कर बर्खास्त करने के साथ ही बाहुबली विधायक विजय मिश्रा व विरोधी गुलाम रसूल आदि के आंतक से निजात ले सकें. और मेरे व मेरी पत्नी सहित बच्चों के जानमाल की रक्षा व परिवार का गुजर बसर हो सकें. और मै स्वतंत्र रूप से रहकर अपनी पत्रकारिता करने के साथ ही मासूम बच्चों की पढाई लिखाई कराकर उनका भविष्य बना सकूं.

(वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की फेसबुक वाल से)

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One thought on “चलो वह पत्रकार है ना, तो उसे मार डालो – अफसर और दबंग नेताओं के शिकंजे में फंसा पत्रकार

  1. aap ki khawar pad kar lgata hai ki police hi gunndo/ douketo./ ka kaam kar rahi hai ourr kanoon ke hath hi hattiya karne par aamada hai to pididt pakchh jab haat mai hattaiyar utha lenga D M hi gunnda girdi karega to janat to apna raasta bhi sawayam bana lengi yes jo nakkaswadi kuchh iesitarah ki baate baata kar saadharan aad mi ko bannduk hatth mai de rahae hai yese hi nakkasbadi ban jaate hai samaj ka yes apradhi karan karne wale yese hi adhikari police ke long kanoon ki bardi pahan kat hattiyaye douketiya kar rahe hai to bagabat to hogi hi.

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