चिटफंड मामले में सेबी की नींद फिर खुली, रोजवैली के खिलाफ जमा लेने पर रोक

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-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

लंबे अंतराल के बाद बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की नींद खुली है. आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की कब नींद खुलेगी या खुलेगी भी नहीं कहना मुश्किल है. बंगाल में चिटफंड कंपनियों की सीबीआई जांच के लिए हाई कोर्ट से मना हो गया. लेकिन सीबीआई असम में क्या गुल खिला रहीं है, अभी पता नहीं चला. इस बीच शारदा चिटफंड फर्जीवाड़े के भंडाफोड़ के बाद राजनीतिक तूफ़ान भी थम गया है. हावड़ा लोकसभा उपचुनाव में जिन दागी नेताओं को लेकर जो राजनीतिक संकट नजर आ रहा था, वह सिरे से गायब है. पंचायत चुनाव के लिए मतदान भी शुरु हो गया. शारदा के कर्णधार सुदीप्त सेन और उनकी खासमखास देवयानी मुखर्जी को जेल हिरासत में सत्तर दिन हो गये. चिटफंड पर अंकुश के राज्य और केंद्र सरकारों के कदमों का क्या असर हुआ मालूम ही नहीं पड़ा. बंगाल में सैकड़ों छोटी बड़ी चिटफंड कंपनियों का धंधा बेरोकटोक जारी है जबकि जांच में किसी प्रगति की सूचना नहीं है.RoseValley_295x200

सेबी ने पहले सभी चिटफंड कंपनियों को चेतावनी जारी की थी. फिर बाकायदा विज्ञापन के जरिये एमपीएस और रोजवैली में निवेश के खिलाफ आम निवेशकों को अलर्ट भी किया. जिसके जवाब में दोनों कंपनियों ने सफाई दी कि उनका मामला तो अदालत में विचाराधीन है. इसपर सेबी ने चुप्पी साध ली और अब जाकर कहीं बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रोज वैली होटल्स ऐंड एंटरटेनमेंट्स लिमिटेड को निवेशकों से किसी तरह का अतिरिक्त धन जमा करने पर रोक लगा दी है. यह सामूहिक निवेश योजनाओं के खिलाफ सेबी द्वारा जारी आदेश की ही एक कड़ी है. रोज वैली समूह की कंपनियों पर करीब 20 लाख निवेशकों से 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा कराने का अनुमान है.

सेबी ने आज जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा कि योजना के तहत जुटाए गए धन को कंपनी कहीं और नहीं लगाएगी और न ही कोई नई योजना लॉन्च करेगी. सेबी ने आदेश में कहा, ‘रोज वैली होटल्स’ बिना पंजीकरण के सामूहिक निवेश योजना चला रही थी. ऐसे में नियामक के पास कंपनी को आगे रकम जुटाने की गतिविधि बंद करने का आदेश देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था.’ कंपनी ने 2010 में हॉलिडे सदस्यता योजना पेश की थी जिसके तहत निवेशकों को मासिक किस्तों में हॉलिडे पैकेज देने की बात कही गई थी. किस्त पूरी होने के बाद निवेशक पैकेज का इस्तेमाल कर सकते हैं या ब्याज सहित पैसे वापस ले सकते है.

अब देखना है कि सेबी दूसरी कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है और इन कंपनियों का जवाबी कदम क्या होता है. उधर, त्रिपुरा सरकार ने रोज वैली सहित चार गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (एनबीएफसी) को आम लोगों से जमा स्वीकार नहीं करने और 31 जुलाई तक जमाकर्ताओं की जमा राशि वापस करने का आदेश दिया है. इस पर इन कंपनियों का क्या रुख होता है, यह देखना भी दिलचस्प होगा.

शारदा समूह के मुख्य निदेशक सुदीप्त सेन व उनकी सहयोगी देवयानी मुखर्जी को  पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सोमवार को सिलीगुड़ी में एसीजेएम मधुमिता बसु के अदालत में पेश किया. दोनों को सात दिनों के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया गया. अब इन दोनों से गहन पूछताछ की जाएगी.

सरकारी पक्ष के वकील सुदीप राय बासुनिया ने बताया कि सुदीप्त सेन व देवयानी के खिलाफ यहां काफी संख्या में मुकदमे दर्ज हैं. ऐसे में पूछताछ के लिए पुलिस दोनों को रिमांड पर लेना चाहती थी. पिछले सप्ताह शनिवार को उसने सिलीगुड़ी कोर्ट में अर्जी दी थी. उन्होंने बताया कि जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार में भी दोनों के खिलाफ केस दर्ज हैं. एक मामले में मंगलवार को कोलकाता के अलीपुर कोर्ट में सुनवाई के लिए इन दोनों लोगों को वहां ले जाया जाना है लेकिन जब-तक यहां पूछताछ पूरी नहीं हो जाएगी, तब-तक इन्हें नहीं छोड़ा जाएगा. गौरतलब है कि सुदीप्त व देवजानी को पांच जुलाई को भी सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश किया गया था. उस दिन भी पुलिस ने इन्हें रिमांड पर लेने की अर्जी दी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान दोनों को 19 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. हालांकि जेल में ही पूछताछ करने के लिए पुलिस को अनुमति दे दी गई थी. पांच जुलाई को कोर्ट में पेशी के दौरान इन्हें एजेंट व जमाकर्ताओं के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा था. इधर विपक्ष के वकील ने अपने मुवक्किल की बीमारी का हवाला देते अस्पताल में ले जाने की अनुमति मांगी थी. मिली जानकारी के अनुसार कोर्ट ने इस मामले में मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है.

शारदा चिट फंड घोटाले की फिलहाल सीबीआइ जांच कराने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है. हालांकि हाईकोर्ट ने सीबीआइ जांच का रास्ता अब भी खुला रखा है. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की सीआइडी जांच पर ही भरोसा जताया है. न्यायाधीश एके बनर्जी व न्यायाधीश एमके चौधरी ने सीबीआइ जांच की मांग पर की गई जनहित याचिका को फिलहाल खारिज कर दिया है. हालांकि हाईकोर्ट ने मामले को फिलहाल अपने पास सुरक्षित रखा है.

एक याचिकाकर्ता की मांग को लेकर अधिवक्ता विकास भंट्टाचार्य ने शारदा चिट फंड कांड की सीबीआइ जांच की याचिका दायर की थी. अधिवक्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि शारदा कांड से जुड़े मामले पश्चिम बंगाल के अलावा अन्य राज्यों व विदेश में भी हैं. ऐसे में इसकी सीबीआइ जांच कराई जानी चाहिए. उल्लेखनीय है कि इसी तरह नेताई कांड में नौ लोगों के मरने की घटना के बाद भी पहले हाईकोर्ट ने सीआइडी जांच पर ही संतुष्टि जताई थी. हालांकि बाद में जांच से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआइ जांच का निर्देश दिया था. वहीं शारदा मामले की सीबीआइ जांच हो या न हो इसे लेकर कोर्ट की ओर से नियुक्त अमिकस ज्युरी लक्ष्मी गुप्ता ने रिपोर्ट में कहा था कि किसी भी याचिका को व्यर्थ नहीं समझा जा सकता है. ताकि कोई भी यदि वंचित होता है तो वह कोर्ट के समक्ष याचिका कर सकता है. रिपोर्ट में गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से न्यायाधीश श्यामल सेन के नेतृत्व में गठित कमीशन की समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है. इसके माध्यम से सारधा चिट फंड के शिकार निवेशकों को पैसा वापस करने में सहूलियत हो सकेगी.

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सीआइडी जांच को लेकर कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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