शहीद की पुत्री को दो माह में नियुक्ति दे- हाईकोर्ट

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-रमेश सर्राफ||

झुंझुनू, 5 जून। राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को फटकार लगाते हुए वर्ष 1995 में ऑपरेशन रक्षक अभियान,जम्मु कश्मीर में आंतकवादियों से लोहा लेते हुए झुंझुनूं के शेखसर गांव के शहीद हुये हरनन्दराय की पुत्री को दो माह में नियुक्ति दिये जाने के आदेश दिये है। Frustrated-Victim-Attempted-Suicide-At-Rajasthan-High-Court
मामले के अनुसार प्रार्थीया अबिता कुमारी ने एक रिट याचिका दायर कर बताया कि प्रार्थीया ने 2005 में शहीद आश्रित कोटे के तहत अनुकम्पा नियुक्ति बाबत शिक्षा विभाग में आवेदन किया था। तत्पश्चात सम्पूर्ण औपचारिकतायें एवं दस्तावेजों के सत्यापन के उपरांत भी प्रार्थीयां को तृतीय श्रेणी अध्यापक पद पर नियुक्ति नही दी गई जबकि इस बाबत जिला कलेक्टर झुंझुनू, संभागीय आयुक्त जयपुर, उपनिदेशक चुरू ने समय-समय पर प्रार्थीया को नियुक्ति बाबत विभागीय अभिशंषा की हुई है। बाद में शिक्षा विभाग ने टेट अधिसूचना-2010 का हवाला देते हुए प्रार्थीया को नियुक्ति देने से मना कर दिया।
बहस के दौरान प्रार्थीया के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट से कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने घोर लापरवाही के चलते प्रार्थीया के संदर्भ में पश्चातवर्ती टेट की अनिवार्यता का सहारा लेकर जिस प्रकार उसे नियुक्ति से वंचित किया है व संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने मांग की कि प्रार्थीया की तृतीय श्रेणी अध्यापक पद पर नियुक्ति दी जावे। दूसरी और शिक्षा विभाग के अधिवक्ता ने प्रार्थीया को नियुक्ति दिये जाने में असमर्थता जाहिर की।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एम.एन. भंडारी ने 2005 से लंबित इस नियुक्ति प्रकरण में शिक्षा विभाग की घोर ढिलाई व कार्य प्रणाली को लेकर खिंचाई करते हुए याचिका को मंजूर कर कार्मिक विभाग, संभागीय आयुक्त जयपुर,जिला कलेक्टर झुंझुनू ,निदेशक व उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा एवं जिला शिक्षा अधिकारी झुंझुनूं को दो माह के अंदर प्रार्थीया को नियुक्ति दिये जाने के प्रभावी आदेश दिये है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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