राष्ट्रगान गाने का विश्वरिकार्ड बनाने से सुब्रतो राय के अपराध कम नहीं हो जाते..

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राष्ट्र गान गाने का विश्वरिकार्ड बना  कर  देश भक्ति को भी कारोबारी हथियार बना दिया!

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​||

सहारा समूह की ओर राष्ट्रीय गान जन गण मन का आयोजन पूरे देश भर मे जोरशोर से किया गया. सुप्रीम कोर्ट और सेबी के दबाव में सहारा समूह अब राष्ट्र गान गाने का विश्वरिकार्ड बनाकर देश भक्ति को कारोबारी हथियार बना दिया है. राष्ट्रीय गान गाने का रिकॉर्ड अबतक पाकिस्तान के नाम रहा है, जहां एकसाथ एक वक्त 42 817 लोगों द्वारा सामुहिक रूप से राष्ट्रीय गान गाने का रिकॉर्ड कायम हुआ था. अब वह इतिहास बन गया.सोमवार को लखनऊ में माबाई अंबेडकर मैदान में सोमवार को एक निजी समूह सहारा समूह  की ओर से आयोजित कार्यक्रम में एक लाख 15 हजार लोगों ने एक साथ देश का राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन अधिनायक जय हे…’  गाया, जो एक विश्व रिकॉर्ड होगा. sahara1_050613072802बंगाल में भी कोलकाता महानगर और दूसरे बड़े शहरों, जिला मुख्यालयों और अन्य शहरो में सहारा समूह के कर्मचारियों और एजंटों ने जोशखरोश के साथ राष्य्रगान गाते हुए कंपनी की गिरती हुई साख में नया प्राण फूंकने की कोशिश की. ऐसा देशभर में हुआ. पाकिस्तान ठगा सा देखता रह गया और उसका विश्वरिकार्ड ध्वस्त हो गया. अब यह देखना बाकी है कि सहारा देशप्रेम के इस अनूठे कीर्तिमान का सुप्रीम कोर्ट और सेबी पर क्या असर होता है. बिना मौसम ‘भारत भावना दिवस’ मनाकर आम लोगों में दशभक्ति बरने की  कोशिश तो कर ही ली सहारा श्री ने!

सहारा समूह के मुखिया सु्ब्रत राय  लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में सोमवार को राष्ट्रगान गाने के लिए सहारा इंडिया परिवार के सदस्यों का हुजूम उमड़ा तो खुद भी वहां सुबह करीब साढ़े 9 बजे वहां पहुंचे. आयोजकों ने उनका दिल खोल कर स्वागत किया.

गौरतलब है कि कविगुरु रवीन्द्र नाथ ने 1911 में ‘जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता’ शीर्षक राष्ट्रीय गान लिखा. जो कांगे्रस के 26वें वार्षिक अधिवेशन में गाया गया एवं जिसे आज देश में राष्ट्रीय गान का गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है.

इससे पहले भारत के  112172 लोगों ने 9 दिसंबर, 2012 को कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में एक साथ राष्ट्रीय गान गाकर पाकिस्तान के रिकॉर्ड को तोड़ा था. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधियों ने भी इसकी पुष्टि की थी.

गौरतलब है कि  सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दो कंपनियों से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई करने का भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की याचिका गुरुवार को स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए आठ मई की तारीख मुर्करर की. कोर्ट ने निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट और प्रतिभूमि अपीलीय न्यायाधिकरण में दायर सहारा समूह की सभी याचिकाओं की सुनवाई पर रोक भी लगा दी.सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में बीतं शनिवार को नए सिरे से याचिका दायर की थी और सहारा समूह की दोनो कंपनियों से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई करने का शीर्ष अदालत से आग्रह किया था. कोर्ट ने बीते 22 अप्रैल को सहारा समूह को कड़ी फटकार लगाई थी. खंडपीठ ने कहा था कि सहारा समूह कोर्ट के आदेश की परवाह नहीं कर रहा है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों का 24 हजार करोड़ रपया नहीं लौटाये जाने के मामले में सहारा समूह और इसके मुखिया सुब्रत राय को लताड़ा और कहा कि वे अपने बचाव के लिए ‘अदालतों से चालबाजी’ कर रहे हैं. न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने सेबी की अवमानना याचिका पर जवाब दाखिल नहीं करने के लिए सहारा समूह और इसके मुखिया की खिंचाई की .

सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय अपने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सेबी के मुख्यालय में पेश हुए. सेबी के अधिकारियों से मुलाकात के बाद बाहर निकले सुब्रत रॉय ने मीडिया से कहा कि उनसे सेबी ने जो भी पूछा, उसके जवाब उन्होंने दिए हैं.सेबी ने सुब्रत रॉय की निजी संपत्तियों के आकलन के लिए बुलाया था ताकि उन संपत्तियों को बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाए जाएं.सुब्रत रॉय ने मीडिया से कहा, “मैं अपनी संपत्ति के बारे में लिख कर लाया था, उन्हें दे दिया है. मेरे पास लगभग तीन करोड़ रुपये सोने और रत्न के आभूषण हैं. नकद 34 लाख रुपये हैं. ज्यादा से ज्यादा मेरी निजी संपत्ति पांच-छह करोड़ रुपये की होगी.”सेबी ने इन लोगों से सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) के सभी निवेश और संपत्ति के बार में जानकारी मांगी .

गौरतलब है कि अक्टूबर, 2012 के पहले सामुहिक रूप से सबसे अधिक लोगों द्वारा अपने देश का राष्ट्रीय गान गाने का रिकॉर्ड भारत के पास था. लेकिन 20 अक्टूबर, 2012 को पाकिस्तान में 42 हजार 8 सौ 13 लोगों ने राष्ट्रगान गाकर भारत का रिकॉर्ड तोड़ दिया था.

दिलचस्प बात तो यह है कि राष्ट्रगान का रिकार्ड बनाने से पहले सहारा इंडिया परिवार की उपभोक्ता उत्पाद बेचने वाली रिटेल कंपनी सहारा क्यू शॉप का नाम देश भर में एक साथ सबसे अधिक स्टोर खोलने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है. इस साल एक अप्रैल को कंपनी ने देश के 10 राज्यों में एक साथ 315 स्टोर खोले. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर इनके आंकड़ें दर्ज किए और सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत राय को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में सहारा क्यू शॉप का नाम औपचारिक रूप से दर्ज करने का प्रमाणपत्र सौंपा.सहारा क्यू ने अपने स्तर पर और साथ ही फ्रैंचाइजी स्तर पर रिटेल स्टोर खोले हैं. कंपनी का दावा है कि ऐसे स्टोर पर बिकने वाले उसके सारे उत्पाद बिल्कुल शुद्ध हैं, और इनमें किसी तरह की कोई मिलावट नहीं है. इन स्टोर्स पर रोजमर्रा के प्रयोग में लाई जाने वाली लगभग हर चीज उपल्ब्ध है. और दाम भी किफायती है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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