जनसरोकारी पत्रकारिता बचाए रखने पर जोर..

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उमेश डोभाल स्मृति युवा पत्रकारिता पुरस्कार भास्कर उप्रेती, कोमल मेहता को कवि चारु चंदोला, समाजसेविका शोभा बहन और इतिहासकार ताराचंद्र त्रिपाठी सम्मानित..

-अयोध्या प्रसाद ‘भारती’||
बागेश्वर (उत्तराखण्ड)। शराब माफिया के खिलाफ लिखने पर 25 मार्च 1988 को मारे गये पत्रकार उमेश डोभाल की याद में बनाए गये उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित 23वें उमेश डोभाल स्मृति एवं सम्मान समारोह में वर्ष 2012 का युवा पत्रकारिता पुरस्कार (प्रिंट मीडिया) हिंदुस्तान देहरादून में कार्यरत पत्रकार भास्कर उप्रेती को तथा इलैक्ट्रानिक मीडिया के लिए दिया जाने वाला युवा पत्रकारिता पुरंस्कार जी न्यूज पिथौरागढ़ में कार्यरत कोमल मेहता को प्रदान किया गया।bhasker upreti-2 इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों में समाज सेवा के लिए स्व0 सरला बहन की शिष्या शोभा बहन को राजेंद्र रावत ‘राजू’ जनसरोकार सम्मान, वरिष्ठ लेखक, अन्वेषक और इतिहासकार ताराचंद्र त्रिपाठी को उमेश डोभाल स्मृति सम्मान तथा वरिष्ठ कवि चारुचंद्र चंदोला को गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ सम्मान प्रदान किया। बागेश्वर के होटल गोमती में प्रेस क्लब जनपद बागेश्वर के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में राज्य भर से जुटे पत्रकारों, जनआंदोलनकारियों, कला-संस्कृति, साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा आदि से जुड़े सैकड़ों लोगों ने जनसरोकारी पत्रकारिता को बचाए रखने, अपनी भाषा एवं संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध होने की प्रतिबद्धता जताई।
सन 1991 से प्रति वर्ष अलग-अलग नगरों में आयोजित हो रहे इस समारोह को इस बार बागेश्वर में करने की जिम्मेदारी उठाई उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन जनपद बागेश्वर इकाई ने। समारोह 24-25 मार्च को आयोजित होता था, इस बार इसे होली के कारण आगे कर दिया गया। 6 अप्रैल काी सायं समारोह का शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सदस्य भगत सिंह कोश्यारी ने किया। इसके बाद नगर में जुलूस निकाला गया जिसमें खनन, भू और शराब माफिया के खिलाफ नारेबाजी की गई और उत्तराखंड के जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा के गीत गाये गये। भारी संख्या में उमंग और उत्साह से गाते-बजाते जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरा। वक्ताओं ने नेता, नौकरशाहों और धन्नासेठों के द्वारा राज्य के जल, जमीन, जंगल और मानव संसाधन के शोषण-दोहन के खिलाफ लोगों से आगे आने का आह्वान किया। इसके बाद रात्रि में पद्मश्री शेखर पाठक ने हिमालय पर स्लाइड शो प्रस्तुत किया जिसमें हिमालय के विभिन्न पहाड़ों, नदियों, हिमशिखरों, जानवरों, पक्षियों, जातियों आदि के बारे में फोटो और जानकारी देकर दर्शकों को अभिभूत कर दिया। रात्रि में कवि गोष्ठी का आयोजित हुई जिसमें विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां और वाहवाही लूटी। कवि गोष्ठी का संचालन चंद्रशेखर बड़शीला ने किया।samarika vimochan U. Dobhal

7 अप्रैल की प्रातः  23वें उमेश डोभाल स्मृति एवं सम्मान समारोह का शुभारंभ ट्रस्ट के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार गोविंद पंत राजू, शेखर पाठक, शमशेर सिंह बिष्ट, पीयूसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रविकिरण जैन आदि ने राजेंद्र रावत ‘राजू’, उमेश डोभाल और गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस अवसर पर गायत्री विद्या मंदिर की बच्चियों ने मनोहारी स्वागत गीत व मां शारदे की वंदना प्रस्तुत की। गोविंद पंत राजू ने कहा कि पत्रकारिता में आ रही जबरस्त गिरावट के बीच भी हमें उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि अनेक लोग कारपोरेट मीडिया के माध्यम से भी जनसरोकारी पत्रकारिता कर रहे हैं, यह भास्कर उप्रेती और कोमल मेहता के कार्यों से भी साबित होता है। देश में हजारों-हजार पत्रकार समाज की पीड़ा को विभिन्न मीडिया माध्यमों से सामने ला रहे हैं।

Samman TC Tripathi भास्कर उप्रेती ने कहा कि पत्रकार समाज से आते हैं और समाज की हलचल को अपनी लेखनी में उतारते हैं। इसका उदाहरण है 90 के दशक का उत्तरखण्ड आंदोलन। पत्रकारों से अपेक्षा करने से पहले समाज को स्वयं एकजुट होकर किसी मसले पर आंदोलन खड़ा करना चाहिए। कोमल मेहता ने कहा कि किसी भी परेशान आदमी की एक पत्रकार से बड़ी उम्मीद होती है। एक मां जिसे राशन न मिल रहा हो या कोई अन्य कार्य न हो रहा हो वह इस उम्मीद से पत्रकार के समक्ष दुखड़ा सुनाती है कि पत्रकार मेरे बेटे की तरह उसकी समस्या का हल करा देगा। ऐसे में संवेदनशील पत्रकार की जिम्मेदारी होती है कि जनता की बात को अपने मीडिया माध्यम और व्यक्तिगत रूप से भी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाए। मुख्य वक्ता श्री जैन ने कहा कि संविधान में सत्ता के विकेंद्रीकरण के व्यापक प्रयासों की गुंजाइश है। विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली धरातल पर नहीं उतरने के कारण ही उत्तराखंड के लोग जल, जंगल और जमीनों से बेदखल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता और विभिन्न योजनाओं में जनता की सीधी भागीदारी से ही विकास का सही लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा इसके लिए राज्य की जनता को व्यापक जनगोलबंदी कर राज्य व्यापी आंदोलन चलाना चाहिए। अन्य वक्ताओं ने नेता-नौकरशाह और कारपोट्स की तिकड़ी द्वारा राज्य के संसाधनों के दोहन और यहां के आम नागरिकों की उपेक्षा पर चिंता प्रकट की और लूट के खिलाफ जनएकता बनाए जाने पर बल दिया।
इतिहासकार तारा चंद्र त्रिपाठी ने पहाड़वासियों के पहचान का सवाल उठाते हुए कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा को बचाने तथा इसके लिए बच्चों में संस्कार विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी बोली बानी छोड़ने से बच्चे अपनी संस्कृति, मर्यादा और परिवार से कट रहे हैं जो भविष्य के लिए खतरनाक है। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के उपसचिव त्रिभुवन उनियाल ने किया। समारोह में डा. शेखर पाठक, ललित मोहन कोठियाल, उमाशंकर थपलियाल, राजीव लोचन शाह, महेश जोशी, पीसी तिवारी, हरीश पंत, सदन मिश्र, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, प्रेम अरोरा, चंदन डांगी, बीसी सिंघल, प्रो. प्रभात उप्रेती, प्रेमसिंह गुसाइईं, उमा भट्ट, गजेंद्र रौतेला, अनिल बहुगुणा, जगमोहन नेगी, पंकज उप्रेती, सीताराम बहुगुणा, गिरीश कांडपाल, त्रेपन सिंह चौहान, उमेश तिवारी, दिनेश चंद्र लोहनी, खुशबू लूथरा, बागेश्वर प्रेस क्लब अध्यक्ष चंदन परिहार, घनश्याम जोशी, केश्व भट्ट, दीपक पाठक, सुरेश पांडे, अशोक लोहनी, संजय शाह, आनंद नेगी, पूरन तिवारी, भास्कर तिवारी, आनंद बिष्ट, अमित उप्रेती, उमेश मेहता, हिमांशु संगटा, पंकज पांडे, आलोक साह गंगोला, संजय साह, बसंत चंदोला, अशोक जोशी, देवेंद्र पांडे, रमेश पांडे बृजवासी, बबलू कांडपाल, हिमांशु गड़िया, शंकर पांडे, अल्मोड़ा सांसद प्रदीप टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष विक्रम शाही, ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र टंगड़िया, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी, विधायक चंदन रामदास, नगर पालिकाध्यक्ष सुबोध साह, जिला सूचना अधिकारी गीता जोशी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षक और अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे। आयोजन स्थल पर लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अतिथियों ने अवलोकन किया और साहित्य खरीदा। समारोह में ट्रस्ट की ‘स्मारिका 2013’ का विमोचन भी किया गया। विगत दिनों स्वर्गवासी हुए वरिष्ठ पत्रकारों एस राजेन टोडरिया और आनंद बल्लभ उप्रेती को भी समारोह में याद किया गया

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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