शक की सुई पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. गर्ग पर भी?

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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के वित्तीय सलाहकार नरेंद्र कुमार तंवर के एसीबी के शिकंजे में फंसने के साथ ही बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुभाष गर्ग पर भी शक की सुई घूमती नजर आ रही है। subhash-garg1कयास ये लगाया जा रहा है कि तंवर के पास मिली करोड़ों की संपत्ति का कहीं न कहीं डॉ. गर्ग से भी कनैक्शन है। इस प्रकरण को शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा के उस बयान की रोशनी में भी देखा जा रहा है कि जब डॉ. गर्ग का कार्यकाल समाप्त हो रहा था तो उन्होंने बाकायदा सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे तो ये चाहते हैं कि डॉ. गर्ग को ही अध्यक्ष बनाया जाए, यह दीगर बात है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनकी सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया।
हालांकि यह जांच में ही सामने आ पाएगा कि तंवर के पासा मिली संपत्ति का डॉ. गर्ग से कोई संबंध है या नहीं, मगर राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्णन) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने तो बाकायदा बयान जारी कर डॉ. गर्ग के कार्यकाल की जांच कराने की मांग कर डाली है। सोनी का आरोप है कि वित्तीय सलाहकार नरेंद्र तंवर ने डॉ. गर्ग की मिलीभगत से ही भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रायोगिक परीक्षाओं की राशि, उडनदस्तों की राशि व अन्य भुगतान अटके हैं, दूसरी ओर वित्तीय सलाहकार के कृपा पात्रों को करोड़ों रुपए के भुगतान इनके कार्यकाल में किए गए। ज्ञातव्य है कि सोनी उस वक्त भी आरोप लगाते रहते थे, जब कि डॉ. गर्ग पद पर थे, मगर उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की तरह दब जाती थी।
ज्ञातव्य है कि भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी भी पूर्व में बोर्ड अध्यक्ष डॉ. गर्ग पर आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों व ठेकों में गड़बड़ी सहित आरटेट परीक्षा 2011 के दौरान बोर्ड को मिली बेरोजगार युवकों की फीस का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था और राज्य सरकार से डॉ. गर्ग के कार्यकाल की निष्पक्ष आयोग से जांच करवाने सहित उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी।
इस प्रकरण में अहम सवाल ये उठ रहा है कि डॉ. गर्ग के कार्यकाल में ही एफए नरेंद्र तंवर का तबादला अन्यत्र हो गया था, लेकिन इस तबादले को रद्द करवा कर उन्हें यहीं पदस्थापित किया गया। जानकारी ये भी मिली है कि एसीबी को तंवर के कक्ष में तलाशी के दैरान बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष का एक सिफारिशी पत्र भी मिला है, जिसमें तंवर को काम का आदमी बताते हुए तबादला निरस्त करने की बात लिखी है। इसी सिलसिले में अहम बात ये भी है कि बोर्ड के इतिहास में पहली बार एक ही अध्यक्ष और एफए के कार्यकाल में रिकार्ड निर्माण कार्य हुए। बोर्ड में बीते तीन साल में 40 करोड़ रुपए से अधिक के निर्माण कार्य हुए हैं। सवाल ये भी कि जिस आरएसआरडीसी के काम को पूर्व वित्तीय सलाहकार ने घटिया करार दे दिया था, उसी से बोर्ड ने सभी निर्माण कार्य कराए। बताया जाता है कि डॉ. सुभाष गर्ग की गुड बुक में शामिल तंवर की देखरेख में ही में निर्माण कार्य से लेकर रद्दी के ठेके, परीक्षा सामग्री के परिवहन संबंधी ठेके, पुस्तक प्रकाशन के लिए विभिन्न फर्मों से संबंधित टेंडर और इन छपी पुस्तकों के प्रदेश भर में पहुंचाने के टेंडर आदि हुए। बोर्ड ने 1970 से 2000 तक के विद्यार्थिर्यों के परीक्षा दस्तावेज के डिजिटलाइजेशन के लिए भी बड़ा ठेका किया। बोर्ड प्रबंधन ने गोपनीयता के नाम पर आज तक इस ठेके की राशि सार्वजनिक नहीं की है। बोर्ड ने दो बार आरटेट का आयोजन किया है। इसका अधिकतर कार्य भी एफए के हाथ में रहा है।
ज्ञातव्य है कि तंवर के अजमेर के पंचशील स्थित बंगले से बोर्ड की 54 करोड़ 70 लाख रुपए की एफडीआर मिली है। बोर्ड के निकट स्थित आईसीआईसीआई बैंक के लॉकर से करीब 3.50 लाख रुपए के सोने के सिक्के और नकदी बरामद हुई। जांच में आरोपी की संपति का आंकड़ा करीब 11 करोड़ पहुंच चुका है।
-तेजवानी गिरधर

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2 thoughts on “शक की सुई पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. गर्ग पर भी?

  1. घोटाले ही घोटाले , एक का हल्ला शांत होता नहीं कि दूसरा सामने आ जाता है.लगता है देश की धरती घोटालों के लिए बड़ी मुफीद हो गयी है.

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