मैं तो उड़ चली..... : सुषमा स्वराज

दुनिया भर के नेताओं और मशहूर लोगों की आवाज के तौर पर जाने जाने वाली माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट “ट्विटर” पर भारतीय नेताओं की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ती जा रही है। “ट्विटर मिनिस्टिर” के नाम से मशहूर शशि थरूर के बाद अब भाजपा नेता सुषमा स्वराज के फॉलोअर्स की संख्या एक लाख के जादुई आंकड़े को पार कर गई है, हालांकि अभी वह उनसे काफी पीछे हैं।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, खेल मंत्री अजय माकन और जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी के ट्विटर से जुड़ने के बाद भी कांग्रेस के चर्चित नेता शशि थरूर फालोअर्स के मामले में सबसे आगे बने हुए हैं। देश में ट्विटर को लोकप्रियता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के 11 लाख एक हजार 166 फालोअर हैं। अपने प्रशंसको से सीधे जुडने के लिए ट्विटर से जुड़ने वाली भाजपा नेता सुषमा स्वराज फालोअरों के लिहाज से दूसरी सबसे लोकप्रिय भारतीय राजनेता हैं जिनके एक लाख तेरह हजार 688 फालोअर हैं।

सुषमा ट्विटर पर बेहद सक्रिय हैं और उन्होंने अब तक 1151 ट्वीट किए हैं। वह अक्सर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर त्वरित टिप्पणी के लिये ट्विटर का सहारा लेती हैं। सुषमा स्वराज को “फॉलो” करने वालों में पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर, स्टार निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और उमर अब्दुल्ला भी शामिल हैं। हालांकि खुद सुषमा किसी को फॉलो नहीं करतीं। इस क्रम में जम्मू कश्मीर के विदेश मंत्री उमर अब्दुल्ला तीसरे नंबर पर आते हैं जिनके 41,540 फालोअर हैं। उमर अब्दुल्ला अक्सर आम जनता से सीधे जुड़ने के लिये ट्विटर का सहारा लेते हैं। उन्होंने अब तक 3,791 ट्वीट किए हैं।

अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिये पहचाने जाने वाले जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी के 18,794 फालोअर हैं और उन्होंने अब तक 6,072 ट्वीट किये हैं। इसी तरह खेल मंत्री अजय माकन के 2916 और कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री के मात्र 577 फालोअर हैं। ट्विटर पर विश्व के कई बड़े राजनेता सक्रिय हैं जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और यूनान के प्रधानमंत्री जार्ज ए पापेन्द्रू आदि शामिल हैं।

(पोस्ट भाषा की खबर पर आधारित)

By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

One thought on “सुषमा भी उड़ीं ट्विटर चिड़िया की ट्वीट के साथ, लेकिन करीब भी नहीं पहुंची थरूर के”

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