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  • थानेदार की पत्नी को आया हार्ट अटैक
  • वसूली के चक्कर में पहले भी छाप चुका है फर्ज़ी खबर

मेरठ में दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर रविवार को एक ऐसी खबर छपी जिसने पूरी मीडिया के मुंह पर कालिख पोत दी है। खबर में एक पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी की बात कही गई है, लेकिन वे पड़ोसी जिले बागपत में अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं।

मेरठ के जागरण में छपी ख़बर

जागरण में छपी खबर का मजमून इस प्रकार है ”… गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मियों में बागपत जिले के चांदीनगर थाने का एसओ पवन शर्मा, कांस्टेबिल मनोज दीक्षित और कांस्टेबिल कपिल हैं। पवन शर्मा मेरठ एसओजी का प्रभारी रह चुका है, जबकि मनोज दीक्षित एसओजी सर्विलांस सेल का माहिर खिलाड़ी है और मेरठ में अटैच है।”

दिलचस्प बात यह है कि पवन शर्मा और मनोज दीक्षित अपनी-अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं और कहीं बाहर गए ही नहीं थे। मेरठ के आईजी राजीव कृष्ण ने मीडिया दरबार को बताया कि यह खबर मनगढ़ंत है। हालांकि उन्होंने यह तो स्वीकार किया कि पुलिस का एक जवान गिरफ्तार हुआ है, लेकिन अन्य दो के बारे में खबर पूरी तरह गलत होने की बात कही। राजीव कृष्ण ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।

बागपत के एसओ पवन शर्मा (जिनका खबर में जिक्र है) ने मीडिया दरबार से बातचीत में बताया कि उन्हें इस खबर की सूचना मेरठ में रह रहे अपने परिवार से मिली जब खबर पढ़ कर उनकी पत्नी को हार्ट अटैक आ गया। शर्मा ने बताया कि जब उनकी दसवीं में पढने वाली बेटी ने उनसे पूछा कि उसकी सहेलियां उससे उसके पिता के अपराधी होने की खबर दे रही हैं तो वे फफक कर रो पड़े। उन्होंने बता कि शनिवार दोपहर के जिस वक्त की बात अखबार में की गई है उस वक्त थाने में निरीक्षण करने उनके उच्च अधिकारी कप्तान डॉक्टर प्रतिन्द्र सिंह भी आए हुए थे। इसके कुछ देर बाद थाने में अधिकारियों से मुलाकात करने कई पत्रकार भी आए थे जो उनके साथ देर शाम तक मौजूद थे।

दरअसल हुआ यूं कि तीन सिपाहियों के शाहजहांपुर में गिरफ्तार करने की सूचना आई थी। ये तीनों सिपाही पवन, कपिल और निशांत चौधरी कभी मेरठ में एंटी आटो थेफ्ट सेल में हुआ करते थे। इनका काम गाड़ियों की चोरी और लूटपाट रोकना था लेकिन ये खुद गाड़ियों की चोरी करने वाला गैंग चलाने लगे। इन लोगों का तबादला गैर जिलों में कुछ महीने पहले कर दिया गया था पर इन्होंने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की थी। बताया जाता है कि इन्होंने लखनऊ में लूट की और वहां लूट की सूचना फ्लैश हुई तो ये लोग शाहजहांपुर में पकड़ लिए गए।

खास बात यह है कि शाहजहांपुर के डेटलाइन से छपी यह खबर बिना किसी अधिकारी या प्रवक्ता के कंफर्मेशन के ही छाप दी गई है। खबर शाहजहांपुर के सबसे करीब स्थित लखनऊ के एडिशनमें बिना किसी अधिकारी के नाम के 12वें पन्ने पर छपी है जबकि बरेली और मेरठ एडिशन में पहले पन्ने पर है।  बताया जा रहा है कि मेरठ जागरण के सिटी प्रभारी दिनेश दिनकर और उनकी टीम ने पवन नाम के गिरफ्तार सिपाही को पवन शर्मा थानेदार ठहरा दिया और दूसरे एडिशनों में भी फोन कर खबर “सुधरवा” दी।

पवन शर्मा ने मीडिया दरबार को यह भी बताया कि उनकी मेरठ में तैनाती के दौरान दिनेश दिनकर उनसे अक्सर अपनी कई तरह की फरमाइशें रखता था जिनके न पूरा होने पर तीन बार उनके खिलाफ फर्ज़ी खबरें छाप चुका है। तीनों ही बार पवन शर्मा अदालत पहुंचे तो दिनेश उनसे माफी भी मांग चुका है।

दैनिक जागरण में फ्रंट पेज पर खबर छप जाने से निर्दोष थानेदार और एक सिपाही की जो किरकिरी हुई है, उससे पुलिस प्रशासन स्तब्ध है। बताया जाता है कि थानेदार की पत्नी को  हार्ट अटैक आने और महकमे की बदनामी होने के बाद पुलिस के कई अधिकारी और जवान गोलबंद होने लगे हैं और दैनिक जागरण को सबक सिखाने की तैयारी कर रहे हैं।

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

One thought on “जागरण के दिनेश दिनकर ने फ्रंट पेज पर छापी फर्ज़ी ख़बर: थाने में बैठे दरोगा को गिरफ्तार बताया”
  1. Jaagran waale ko joote maarne chahiye aisi badmaashi per.. Inke patrakar insaan hain ya haiwaan? Unhen kisi ke baal bachchon ka bhi khayal nahin aata?

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