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दिल्ली बस दुष्कर्म: मेल टुडे और इंडियन एक्सप्रेस के खिलाफ FIR दर्ज़..

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पिछले दिनों दिल्ली के सामूहिक दुष्कर्म मामले की ख़बरें छापने में नैतिकता को तिलांजली देने के मामले में दो अंग्रेजी अख़बारों पर गाज गिर गई है. खबर है कि दिल्ली में मेल टुडे और इंडियन एक्सप्रेस अखबार के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. ऐसा गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के कारण किया गया है. बताया जा रहा है कि अखबार ने गैंगरेप पीड़िता के साथ हुए घटनाक्रम और विरोध में हुए प्रदर्शनों को लेकर जो कवरेज किया, उसमें गैंगरेप पीड़िता की पहचान को उजागर कर दिया. उसके असली नाम व पहचान का खुलासा कर दिया.indian express-mail today

मेल टुडे अखबार के बाद इंडियन एक्‍सप्रेस के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है. इंडियन एक्‍सप्रेस ने भी दिल्‍ली सामूहिक दुष्कर्म पीडिता तथा उसके परिवार की पहचान का खुलासा कर दिया, जिसके चलते यह मामला दर्ज हुआ है. मीडिया एथिक्‍स में रेप या यौन हिंसा की शिकार महिला का पहचान उजागर करने पर अघोषित मनाही रही है. कोर्ट भी कई बार पीडिता की पहचान का खुलासा किए जाने पर नाराजगी जता चुका है, इसके बाद भी अब तक इस तरह के मामले में अखबार को हड़काकर या धमकाकर छोड़ दिया जाता था. अब एफआईआर दर्ज करने के यह शायद नये मामले है.

बताया जा रहा है कि गैंगरेप के बाद दिल्‍ली तथा पूरे देश में जिस तरह की सरकार विरोधी लहर है. युवाओं में जिस तरीके का आक्रोश उससे सरकार इस पूरे मामले में फूंक फूंक कर कदम रख रही है. यही कारण रहा कि पीडिता को न सिर्फ इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया, बल्कि उसका शव वापस आने पर आनन-फानन में अंतिम संस्‍कार कर दिया गया, जबकि परिवार चाहता था कि छात्रा का अंतिम संस्‍कार वे अपने पुश्‍तैनी जिले में विधिपूर्वक करें. सरकार तथा सरकारी मशीनरी इस मामले को लेकर पूरी तरह दबाव में है. वो किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने देना चाहती है, इसके चलते ही मेल टुडे के बाद इंडियन एक्‍सप्रेस के खिलाफ भी दिल्‍ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

मीडिया एथिक्स में यह शामिल है कि रेप या अन्य किसी यौन हिंसा की शिकार महिला का मीडिया कभी पहचान उजागर न करे क्योंकि इसके कारण उसका सामाजिक व पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है. आमतौर पर सभी मीडिया हाउस इस नियम का पालन करते हैं. कुछ एक बार अनजाने में कुछ मीडिया हाउस पहचान उजागर कर देते हैं जिसके कारण उन्हें प्रेस काउंसिल समेत कई संस्थाओं की आलोचना का शिकार होना पड़ता है. मेल टुडे द्वारा गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर किए जाने से पूरे मामले में फूंक फूंक कर कदम रख रही दिल्ली पुलिस को मौका मिल गया एफआईआर दर्ज करने का. कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों की तरफ से इशारा मिलने के बाद पुलिस ने यह रिपोर्ट दर्ज की है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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4 thoughts on “दिल्ली बस दुष्कर्म: मेल टुडे और इंडियन एक्सप्रेस के खिलाफ FIR दर्ज़..

  1. किसी भी फॅमिली में बच्चों की लाइफ के लिए माता पिता का ही एकाधिकार होता है. और, उस के गुड वर्क के लिए भी माता पिता को ही मान और सम्मान दिया जाता है.. !! भविष्य की लाइफ में किसी भी विरूपता के लिए भी माता और पिता दोष से कभी मुक्त नहीं हो सकते..? एक इंसान को दुसरे इंसान से खुद की हिफाज़त का इल्म और अमल कहाँ से हासिल होता है..? ज़मीन और आसमान की डबल स्टोरी में इंसान की अर्जी और मालिक की मर्जी का ताल्लुक क्या फर्जी होता है..? प्लीज़ ज़मीन और आसमान की हिफाज़त के लिए बुलंद हौसलों की ज़रूरत महसूस होती है. और, ख़ुदा की नजर में वही अज़ीम है जिसके अख़लाक़ बुलंद होते हैं..!! १९१४/ १९१८ और १९३९/ १९४५ के विश्व युद्ध में ज़मीन से आसमान तक इंसान की नामुराद हकीकत के लिए जिम्मेबार कौन है..? दिल में इंसान के बुराई न होती अगर तो क्या होता..? खुद उसमे ख़ुदा होता, खुद उसमे ख़ुदा होता..!!

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