नरेन्द्र तोमर ने क्यों कहा “कार्यकर्ता भाव बना रहें” ?

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-प्रवीण गुगनानी||

किसी भी समर को जीतनें या अभियान को सफल बनानें के लिए उसके नायक के साथ एक विश्वस्त साथी या मार्गदर्शक होनें का एक अलग ही महत्त्व होता है. पौराणिक काल से लेकर आजतक और श्रीराम हनुमान से लेकर महाभारत के कृष्ण अर्जुन तक न जानें कितनें ही युद्धों, अभियानों और मुहिमों तक की कहानियां ऐसी ही जोड़ियों की गाथाओं से भरी पड़ी हैं. हाल ही में मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर नरेन्द्र सिंह तोमर की नियुक्ति भी ऐसी ही किसी जोड़ी के अद्भुत शिल्प का एक नया उदाहरण भर है. यद्दपि नरेन्द्र सिंह तोमर पहलें भी भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश की कमान संभालकर भोपाल के भूपाल रह चुकें हैं किन्तु इस दौर में जबकि म.प्र. में विधानसभा चुनावों को मात्र ग्यारह माह ही शेष बचें हैं तब अचानक और चुप्पी भरा यह कदम मध्यप्रदेश भाजपा में एक नई जागृति और जिजीविषा का संचार कर गया है.narendrasinghtomar

सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में और उत्तरप्रदेश के प्रभारी में अपनी क्षमताओं से पार्टी को चमत्कृत कर चुके नरेन्द्र सिंह तोमर नें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पर अपनी नियुक्ति के समय ही नरेन्द्र सिंह तोमर ने कार्यकर्ता भाव सदैव बना रहें कहकर जहां उन्होंने स्वयं की एक समर्पित और विनम्र कार्यकर्ता की पहचान स्पष्ट कर दी थी वहीँ उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष हो या मंत्री या कोई और पद पर आसीन भाजपाई हो सभी का कार्यकर्ता भाव सदा बना रहना चाहिए. पदभार ग्रहण करतें समय उन्होंने विनम्र भाव से अटलबिहारी वाजपेयी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि ‘सत्ता में पद आयेगा, पद जायेगा, पार्टी में पद आयेगा और पद जायेगा, लेकिन कार्यकर्ता का पद कोई छीन नहीं सकता है‘। हमें हर स्थिति में कार्यकर्ता भाव को जीवंत बनाये रखना है। जिस विनम्र और सहज सुलभ सुलझे अंदाज में उन्होंने यह सख्त ताकीद की है इससे उनकी प्रत्युत्पन्नमति और निर्णय लेनें और उस पर हावी होकर अमल करा लेनें की क्षमता और दृढ़ इक्छा भी प्रकट हो गई है.

जहां तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीयुत शिवराज सिंह और नरेन्द्र सिंह तोमर की आपसी समझ का सवाल है तो उस सन्दर्भ में प्रदेश की राजनीति का बच्चा भी जानता है कि नरेन्द्र सिंह तोमर और शिवराज सिंह चौहान की मानसिकता में आपसी समझ का विराट सागर सदा हिलोरें मारता रहा है. सामंजस्य, तादात्म्य, जुगलबंदी और ऐसे ही न जानें कितनें ही समानार्थी शब्द ऐसा लगता है कि राजनीति की इस जुगलजोड़ी के लिए ही बनें हैं और ये सभी शब्द सार्थक होते तब ही दिख गए थे और भविष्य की योजना भी तब ही आकार लेनें लग गई थी जब प्रदेश भाजपा की  खंडवा बैठक के तुरंत बाद दुसरें दिन ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह मंत्रिमंडल विस्तार के प्रस्ताव को लेकर अचानक महामहिम राज्यपाल के पास पहुँच गए थे. इस जुगलजोड़ी की योजना का प्रताप था की समूचे ग्वालियर अंचल की राजनीति को संभालनें के लिए दोनों ने ही गुपचुप अनूप मिश्रा को पुनः मंत्री बनाने का निर्णय लिया और उसे बेहद कसी और सधी हुई योजना के अंतर्गत क्रियान्वित भी कर दिया. ऐसा करके नरेन्द्र सिंह और शिवराज सिंह चौहान ने राजनैतिक चौसर पर अपना पहला किन्तु महत्वाकांक्षी पांसा फ़ेंक दिया था जिसे प्रदेश के राजनैतिक ही कूटनीतिक विश्लेषक विश्लेषक समझ ही नहीं पाए थे.

यद्दपि नरेन्द्र सिंह तोमर पूर्व में भी मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुकें हैं और राजनैतिक दृष्टि से बेहद सफल प्रदेश अध्यक्ष की धारदार पारी खेल चुकें हैं तथापि इस बार उनपर व्यक्त केन्द्रीय भाजपा का विश्वास निश्चित ही उनकी राजनैतिक साख और संचित प्रतिष्ठा की पूंजी का परिणाम ही माना जा सकता है. उहापोह भरे राजनैतिक घटनाओं वाले इस वर्ष में खासतौर से जिस वर्ष में प्रदेश में समूची विधानसभा के चुनाव होनें हो उस वर्ष में यदि इस प्रकार के दूरगामी और महत्वाकांक्षी निर्णय लेनें की अपेक्षा भी थी और आवश्यकता भी. विधानसभा चुनाव के इस वर्ष में निश्चित ही दो परस्पर बेहद विश्वस्त साथियों के हाथ में संगठन, शासन और चुनावी कमान आ जानें से प्रदेश में जहां समूची भाजपा में हर्ष, उत्साह और आशा भरी प्रसन्नता व्याप्त है वहीँ प्रतिद्वंदी खेमों में चिंता की गहन लकीरें व्याप्त हो गयी है. प्रदेश में तीसरी बार सुशासन देनें की ओर सधें क़दमों से बढती भाजपा जहां नरेन्द्र सिंह तोमर की ओर एक कुशल नेतृत्व की आस और विश्वास की ज्योति जलाएं बैठी हैं वहीँ भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व भी नरेन्द्र सिंह तोमर की इस भाजपा अध्यक्ष की दूसरी पारी के प्रति अतिशय आशान्वित और विश्वस्त भाव से उन्हें यह कमान सौंप रहा है. यह विश्वास गलत भी नहीं हैं क्योंकि स्वयं नरेन्द्र सिंह तोमर जहाँ मिलनसार, विनम्र, मृदुभाषी और जमीनी नेता हैं वहीँ वे अपनी दबंगता और तेज, त्वरित किन्तु सटीक निर्णयों के लिए भी अपनी अलग पहचान रखतें हैं.

प्रदेश के नेता और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की नव नियुक्त भाजपा अध्यक्ष के प्रति भावनाओं और विश्वास को उनकें इस बेहद सहज कथन से ही समझा जा सकता जो उन्होंने नरेन्द्र सिंह तोमर के निर्वाचन के तुरंत बाद कहा था कि –“ नरेन्द्र सिंह ने पहलें भी त्याग किया है जब उन्होंने प्रदेश में मंत्री पद त्याग कर संगठन की बागडोर संभालनें का निर्णय लिया था. ”

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praveen gugnani

म.प्र. के आदिवासी बहुल जिले बैतुल में निवास. "दैनिक मत" समाचार पत्र के प्रधान संपादक. समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन. प्रयोगधर्मी कविता लेखन में सक्रिय .
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3 thoughts on “नरेन्द्र तोमर ने क्यों कहा “कार्यकर्ता भाव बना रहें” ?

  1. प्रवीण गुगनानी के लेखन से प्रभावित हुआ. तथ्य जिस तरह से भाव के साथ प्रवाहित होते है वह कम लोगो को अत है. उन्हें मुल्यानुगत मीडिया में भी लिखने का आमंत्रण है. यह मीडिया में सक्रत्मकता का पक्षधर और मूल्यों को समर्पित एक पत्रकारीय पहल है. इसके बारे में mediainitiative.org पर विस्तार से देखा जा सकता है.

  2. तोमर क्या अब ग्वालियर स्थित दंदरुआ धाम मंदिर पर कथा कथित क्षत्रिय [जयचंद पुत्रो ] के बिल्दोजर को फेरने की कोशिश मे है

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