ममता के राज में 55 लाख युवाओं का भविष्य दांव पर..

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पूरी युवा पीढ़ी प्राथमिक शिक्षक की नौकरी से ही वंचित हो गयी है और उनकी हालत बंद कल कारखानों के मजूरों और सिंगूर के किसानों जैसी हो गयी!

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

​​​रोजगार सृजन के वायदे को पूरा करने की हड़बड़ी में बंगाल सरकार ने प्राथमिक शिक्षकों के ३४ हजार पदों पर नियुक्तियों का फैसला करके ​​भर्ती प्रक्रिया शुरु की थी। राज्य के पचपन लाख बेरोजगार शिक्षित युवक युवतियों ने इसके लिए आवेदन किया था। अब कोलकात हाई कोर्ट के अंतरिम स्थगनादेश की वजह से इन पचपन करोड़ युवक युवतियों का भविष्य दांव पर है क्योंकि अदालती आदेश से भर्ती प्रक्रिया ही विवादित हो ​​गयी है। सिंगुर के अनिछ्छुक किसानों को जमीन वापस दिलाने के लिए मां माटी मानुष की सरकार ने तुरत फुरत कानून पास कर दिया ​​था। यह मामला भा हाईकोर्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में फंसा है।इसके अलावा पश्चिम बंगाल में पुलिस संगठनों की मान्यता खत्म करने के राज्य सरकार के फैसले को हाई कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया। mamta_banerjee_12011 में तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने तीन पुलिस संगठनों की मान्यता यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि वह पुलिस बल को राजनीतिक भेदभाव से दूर रखना चाहती है।इस बीच केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को हरी झंडी दे दी है ​​और इस विधेयक के मुताबिक भूमि अधिग्रहण के लिए अस्सी फीसद किसानों की सहमति ही पर्याप्त है। इस विधेयक के कानून बनने में देरी का कोई कारण नहीं है। इसके नतीजतन अनिच्छुक किसानों की जमीन के अधिग्रहण में कोई कानूनी बाधा नहीं रह जायेगी। जबकि दीदी ने अनिच्छुक किसानों की जमीन के अधिग्रहण पर रोक लगा दिया है। अब राज्य में निवेश की तलाश व देश की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की निर्मायक भूमिका सुनिश्चत करने दिल्ली रवाना हो गयी है। लोकिन हालत यह है कि राज्य मे निवेश का कोई माहौल न होने से पहले से अंधेरे में भटक रही पूरी युवा ​ पीढ़ी प्राथमिक शिक्षक की नौकरी से ही वंचित हो गयी है और उनकी हालत बंद कल कारखानों के मजूरों और सिंगूर के किसानों जैसी हो गयी​​ है।सवाल है कि युवा पीढी की इस दुर्गति के लिे कौन जिम्मेवार है?हाईकोर्ट ने कह दिया कि रिकितियों पर भर्ती का विज्ञापन असंवैधानिक है और उसकेतहत कोई परीक्षा नहीं ली जा सकती। अब क्या होगा?मालूम हो कि मुख्यमंत्री ने एक करोड़ नये रोजगार सृजन करने का सब्जबाग दिखाया हुआ है।पर विपक्षियों का आरोप है कि पार्टी कैडरों को रोजगार दिलाने के लिए कायदे कानून को ताक पर रखकर ही प्रथमिक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरु की गयी।युवा पीढी़ के इस गहन संकट से लापरवाह पश्चिम बंगाल में उद्योगों को आकर्षित करने के मकसद से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली रवाना होने से एक दिन पहले ही राज्य मंत्रिमंडल ने पारदर्शिता लाने के लिए भूमि आवंटन नीति को मंजूरी दे दी है।

हाल में कई मुद्दों पर अदालती झटका खा चुकी राज्य सरकार को फिर कोर्ट का ताजा झटका लगा है। इस बार कलकत्ता हाईकोर्ट ने आगामी 23 दिसम्बर को शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित होने वाली प्राइमरी शिक्षक नियुक्ति परीक्षा पर रोक लगा दी है। नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए दायर की गई कई चुनौती याचिकाओं पर गुरुवार सुनवाई करते हुए कोर्ट ने परीक्षा रोकने का आदेश सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में प्राथमिक शिक्षा परिषद से कहा कि पहले पीटीटीआई डिग्रीधारक व प्रशिक्षण प्राप्त 15000-16000 छात्रों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाय, उसके उपरांत बाकी बची रिक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित की जाय।

परीक्षा और इसके तौर तरीके पर आपत्ति जताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में पिछले कुछ दिनों में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। लगभग सभी याचिकाओं में राज्य प्राइमरी शिक्षा परिषद पर आरोप लगाया गया कि उसने केंद्रीय नियमन संस्था एनसीटीई के प्रशिक्षित छात्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश का अपने विज्ञापन में कोई जिक्र नहीं किया है। विज्ञापन तकनीकी दृष्टि से गलत है।राज्य सरकार की ओर से पिछले १९ अक्तूबर को प्राथमिक शिक्षकों की ३४ हजार रिक्तियों पर भर्ती के लिए विक्षप्ति जारी की गया थी। बर्ती के विज्ञापन में पीटीटीआई डिग्रीधारक व प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को प्नियमानुसार प्राथमिकता देने का कोई उल्लेख नहीं हुआ, दिसके खिलाफ हाईकोर्ट में​​ कई मामले दायर किये गये। हालांकि राज्य सरकार की दलील है कि भर्ती परीक्षा में प्रशिक्षितों के लिए बीस अतिरिक्त नंबर का प्रवधान रखा​ ​ गया है। पर हाईकोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

इस सिलसिले में राज्य सरकार क्रिसमस की छुट्टियों के बाद अदलत खुलने पर हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कर सकती है। लेकिन कानूनी पेचदगी खत्म नहीं हो रही है।सरकार को हाईकोर्ट को बताना होगा कि नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटी) के नियमानुसार प्रशिक्षितों और अप्रशिक्षितों की अलग अलग परीक्षा लेने की व्यवस्ता क्यों नहीं की गयी और क्यों एक साथ परीक्षा ली जा रही है।रिक्त पदों की संख्या पर बी विवाद है। राज्य सरकार के मुताबिक कुल रिक्तियां ३४ हजार ही है जबकि हाईकोर्ट को मिली जानकारी के मुताबिक रिक्तियों की संख्या ४४ हजार है।जबकि मुकदमा करने वाले ५४ हजार रिक्तियां बता रहे हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने परीक्षा के विरोध में दी गई दलीलों को स्वीकारा और माना कि परीक्षा विज्ञापन नियम और निर्देशों का उल्लंघन करते हुए जारी किया गया है। कोर्ट ने इस मामले में प्राइमरी शिक्षा परिषद से दो हफ्ते में हलफनामा दायर करने को भी कहा है।

उल्लेखनीय है कि 34 हजार प्राइमरी शिक्षक पदों के लिए पचपन लाख आवेदनकारियों ने फार्म भरा था लेकिन कोर्ट के आदेश से इनकी तैयारियों पर पानी फिर गया है।

महानगर के साल्टलेक स्थित एक पांचतारा होटल में शुक्रवार को कंपनियों के शीर्ष पदाधिकारियों व उद्योगपतियों की बैठक [यंग प्रेसिडेंट्स आर्गनाइजेशन के दक्षिण एशियाई वार्षिक क्षेत्रीय सम्मेलन] को संबोधित करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में बंगाल देश चलाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में तृणमूल के समर्थन के बिना केंद्र में किसी की भी सरकार नहीं बनेगी। वर्ष 2014 के आम चुनावों के बाद सरकार बनाने में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी भूमिका की संभावना जताते हुए पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी एक प्रमुख खिलाड़ी होगी। बनर्जी ने शुक्रवार को उद्योगपतियों के साथ मुलाकात की। इस मौके पर उपस्थित रहने वाले एक सांसद ने बनर्जी को उदधृत करते हुए कहा, ‘बंगाल दिल्ली से भारत का नेतृत्व करेगा।’

बंगाल की मुख्यमंत्री बनर्जी ने बैठक में कहा, ‘अगर बंगाल आज बंगाल को चला रहा है तो बंगाल कल भारत को भी चला सकता है।’ हालांकि इस बैठक में मीडिया को प्रवेश नहीं दिया गया था। राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की महता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘क्षेत्रीय पार्टियां क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महत्त्वाकांक्षाओं को ज्यादा बेहतर तरीके से समझती हैं। वे लोगों की जरूरतों को समझती हैं।’ बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस की तरह ज्यादातर राष्ट्रीय दल आत्मकेंद्रित हैं। खुदरा में एफडीआई के मुद्दे पर तृणमूल ने पिछले सितंबर में संप्रग से समर्थन वापस ले लिया था। कांग्रेस का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, ‘वे बाध्य कर अपना रास्ता बनाने की कोशिश करते हैं।’ हालांकि बनर्जी ने भाजपा का नाम नहीं लिया। उद्योगपतियों द्वारा उठाए गए जमीन के मुद्दे पर बनर्जी ने कहा कि नई जमीन आवंटन नीति को देखिए। इसमें उद्योग के लिए सरकारी जमीन की नीलामी का प्रस्ताव रखा गया है और यह इस प्रक्रिया में राज्य को ज्यादा अग्रगामी भूमिका देती है। हालांकि उन्होंने इस बात को दोहराया कि जबरन जमीन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। पार्टी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, परिवहन और बुनियादी ढांचे जैसे नए क्षेत्रों में निवेश का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि जनहित से जुड़े मसले पर मतभेद होने के कारण ममता ने पिछले सितंबर माह में यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। ममता ने कहा कि सरकार जमीन अधिग्रहण के लिए जल्द ही नई नीति को लागू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों की जमीन का बलपूर्वक अधिग्रहण के खिलाफ है। पार्टी के एक सासंद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, यातायात के क्षेत्र में निवेश पर जोर दिया है। इस मौके पर उद्योग जगत के जानी-मानी हस्तियों में विजय माल्या, कुमार मंगलम बिरला, कर्ण पॉल, संजीव गोयनका के अलावा अनिल कपूर, सोनम कपूर जैसी फिल्मी हस्तियां भी मौजूद थीं।

इस बीच पश्चिम बंगाल के मंत्रिमंडल ने औद्योगिक परियोजनाओं के वास्ते सरकारी जमीन आवंटित करने के लिए नीलामी की राह चलने का फैसला किया है।राज्य के मंत्रिमंडल ने ‘भूमि आवंटन एवं निपटान दिशानिर्देश नीति’ को मंजूरी दे दी, जिसके मुताबिक शॉपिंग मॉल और मनोरंजन पार्क जैसी वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वालों को सरकारी जमीन आवंटित की जाएगी।अन्य निजी औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भी नीलामी के जरिये जमीन आवंटित की जाएगी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। ऐसे मामलो में, बोलीदाताओं का चयन निवेश का पैमाना, रोजगार की गुंजाइश, पर्यावरणीय स्थिति और संबंधित कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड जैसे निश्चित मानदंडों पर किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह बनाया जाएगा, जो ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय लेगा।

इस नीति के मुताबिक सरकार नीलामी के लिए जमीन की न्यूनतम कीमत निर्धारित करेगी। हालांकि सरकारी जमीन की एकमुश्त बिक्री नहीं होगी क्योंकि आवंटन की अवधि 99 वर्ष रहेगी। राज्य के उद्योग मंत्री पार्था चटर्जी ने कहा, ‘यह कहना गलत होगा कि हम राजस्व में अधिक-से-अधिक वृद्घि करने की कोशिश कर रहे हैं। औद्योगिक परियोजनाओं के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। इसके अलावा यदि कोई स्कूल या अस्पताल खोलना चाहता है, तो ऐसे प्रस्तावों पर हम खास ध्यान देंगे।’ तृणमूल कांग्रेस की सरकार अपने उस घोषित रुख पर भी कायम है, जिसके मुताबिक औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सरकार की तरफ से जमीन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।

उद्योगों के लिए सरकारी जमीन का आवंटन नीलामी के जरिये किया जाएगा, लेकिन निवेश संबंधी अन्य बाधाएं दूर करना फिलहाल बाकी है। उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष आर वी कनोडिय़ा ने कहा, ‘हमने अब तक नई जमीन नीति नहीं देखी है। नीलामी पारदर्शी प्रक्रिया है, लेकिन जमीन की लागत और परियोजना लागत के बीच संतुलन होना चाहिए। जमीन आवंटन का यह तरीका अपनाने से परियोजना लागत बढ़ जाएगी।’

कोलकाता के एक अन्य उद्यमी का कहना है कि सरकार इस मसले को अनावश्यक रूप से जटिल बना रही है। उन्होंने कहा, ‘हम लंबे समय से लैंड बैंक के बारे में सुन रहे हैं। सरकार हमें अब तक नहीं बता पाई है कि उसके पास कितनी जमीन है। मुझे नहीं लगता कि सरकार के पास किसी बड़ी औद्योगिक इकाई के लिए किसी भी इलाके में बहुत अधिक जमीन है। थोड़ा-बहुत जमीन है भी तो वहां छोटे-मोटे उद्योग (एमएसएमई) लगाए जा सकते हैं और यदि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन की कीमत बहुत ज्यादा रहती है तो ऐसे उपक्रमों को भी मुश्किल होगी।’

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