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गूगल का ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल भी मुनाफाखोरी और धोखेबाजों का शिकार

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-सुग्रोवर||

कथित भारतीय साहूकार जो साहूकारी के नाम पर आम जन को लूटने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे, की तर्ज़ पर भारत में आयोजित पहला ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल भी कुछ मुनाफाखोरों का शिकार बन गया है. जिसके चलते इस मेले में कुछ ऑनलाइन शोपिंग साईट उपभोक्ताओं को लूटने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती.

इस मेले में ग्राहकों को लूट का शिकार बनाने में लगी फ्लिप कार्ट पकड़ में आयी तो उसने अपनी गलती flipkart-cacheस्वीकार कर इस उत्पाद की कीमत को दुरुस्त कर लिया. हुआ यह कि फ्लिपकार्ट एक दिसम्बर को जो सॉलिड एरो सूट महज़ पांच हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपये में बेच रही थी उसने इस ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल में उसकी कीमत बढ़ा कर डिस्काउंट के बाद छह हज़ार तीन सो निन्यानवे कीमत रखी जो कि उसकी एक दिसम्बर की कीमत से चार सौ रुपये ज्यादा हो गयी.

फ्लिपकार्ट का ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल पर लिया गया स्क्रीन शॉट
फ्लिपकार्ट का ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल पर लिया गया स्क्रीन शॉट

जब एक उपभोक्ता जो पहले से खरीदना चाहता था मगर उसे इंतजार था ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल का ताकि वह उसे कम कीमत पर खरीद सके. ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल के दौरान जब यह उपभोक्ता फ्लिपकार्ट साईट पर वह सूट खरीदने के लिए लॉग इन हुआ तो उसे यह जानकर धक्का लगा कि फ्लिपकार्ट जैसी मशहूर साईट ग्रेट ऑनलाइन शोपिंग फेस्टिवल में डिस्काउंट के नाम पर उपभोक्ताओं को मूर्ख बना रही है. इसके बाद उस उपभोक्ता ने गूगल कैच से फ्लिपकार्ट का एक दिसम्बर कैच देखा तो उसे कैच में फ्लिपकार्ट का पुराना डेटा मिल गया जिसमें इस सॉलिड एरो सूट की पुरानी कीमत पांच हज़ार नौ सौ निन्यानवे लिखी थी. उसने गूगल कैच से स्क्रीन शॉट लिया और फ्लिपकार्ट से आज आज का भी स्क्रीनशॉट लेकर अपने ब्लॉग पर लगा दिया और अपनी ब्लॉग पोस्ट को ट्वीटर पर ट्वीट कर दिया.flipkart tweet

इस सबका जैसे ही फ्लिपकार्ट को पता चला तो फ्लिपकार्ट ने हड़बड़ी में तुरंत अपनी साईट पर कीमत को दुरुस्त करते हुए उस ब्लॉगर की ट्वीट का जवाब देते हुए क्षमा मांग ली. यह बात दीगर है कि जो उत्पाद पकड़ में आया फ्लिपकार्ट ने सिर्फ उसकी कीमत को दुरुस्त किया. इस बात की क्या गारंटी है कि अन्य उत्पादों की कीमतें पुरानी कीमतों से अधिक नहीं है? यही नहीं जब फ्लिपकार्ट जैसी इ कॉमर्स साईट ऐसा घपला कर सकती है तो असल कीमत से कहीं ज्यादा कीमत वसूलने के लिए मशहूर नाप तौल जैसी बदनाम साईट क्या धमाल मचा रही होगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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