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विज्ञापनों की लूटपाट का नायाब अंदाज़..

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-नालंदा से संजय कुमार के रिपोर्ट||

केंद  व राज्य सरकार की गलत विज्ञापन नीति के कारण अपने संसाधन के बलबूते निकल रहे मासिक, पाक्षिक, साप्ताहिक तथा वेब समाचार पोर्टल  किसी प्रकार निकल व चल रहे हैं, वहीँ, दूसरी ओर कुछ दैनिक अखबारों को इतना  विज्ञापन  मिल रहा है कि उक्त  विज्ञापन  कि उपयोगिता समाप्त हो जाने का बाद भी छापा जा रहा है.

मिसाल  के तौर पर है, ८ दिसम्बर, २०१२ को प्रभात खबर, पटना के मगध संस्करण के पेज स. -५ पर छपे “केन्द्रीय खादी महोत्सव -२०१२ का विज्ञापन खादी और  ग्रामोध्योग  आयोग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम  उद्योग  मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित  खादी महोत्सव -२०१२ का उद्घाटन समारोह दिनाक ७ दिसम्बर २०१२ को अपरान्ह ३.३० बजे संपन होगा. जिसका के.एच. मुनियापा, माननीय राज्य मंत्री सूक्ष्म, लघु और मध्यम  उद्योग  मंत्रालय  भारत सरकार करेगें. इस विज्ञापन में कहा गया है कि इस अवसर पर आप सादर आमंत्रित हैं. जबकि विज्ञापन  कार्यक्रम  समाप्ति के एक दिन  बाद छपा है. निवेदन करता है- ई. पी. लेपचा, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी खादी और ग्रामोद्योग   आयोग, राज्य कार्यालय पटना. यह विज्ञापन एक चौथाई रंगीन पेज में छपा है.

इसी प्रकार दैनिक हिंदुस्तान पटना के मगध संस्करण के पेज सं. -७ पर ,दिनांक २४ नवम्बर, २०१२ को रंगीन विज्ञापन छपा है. एक चौथाई पेज में छपे एक विज्ञापन में कहा गया है कि केन्द्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान के स्थापना दिवस के कार्यक्रम का शुभारम्भ पूर्व राष्ट्रपति, भारत  डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (मुख्य अतिथि) 23 नवम्बर २०१२, शाम ४ बजे माब्लंकर ऑडिटोरियम विट्ठलभाई पटेल हाउस, रफ़ी मार्ग ,नई दिल्ली में करेगें.

इसी प्रकार सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को किस प्रकार लुटा रही है , इसकी बानगी ८ नवम्बर २०१२ को दैनिक – हिंदुस्तान के पटना संस्करण के पेज सं-१४ पर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग  के छपे विज्ञापन  से देखा जा  सकता है .

सूचना  एवं जनसंपर्क विभाग, पटना के द्वारा जारी आई  पी आर  डी -९९१५-एस [एजुकेशन] १२-१३ बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिब अमरजीत सिन्हा के द्वारा जारी विभागाय लैटर नंबर -१२४७ दिनांक १० नवम्बर, २०१२ के द्वारा राज्य सरकार के सभी स्कूलों [निजी स्कूलों सहित] में साल में एक दिन ७ नवम्बर [कैंसर जागरूकता दिवस]को शपथ दिवस मनाने के सम्बन्ध में छपा था. जिसमे सभी छात्रों से तम्बाकू का सेवन नहीं करने की शपथ लेनी थी.

उपरोक्त सभी उदाहरण साबित करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी किये जाने वाले विज्ञापन  लोगो को सूचना के लिये नहीं बल्कि सिर्फ अख़बार को फायदा पहुचाने के लिए ही जारी होते है. तभी तो प्रोगाम की समय समाप्ति  होने के बाद   विज्ञापन प्रकाशित होता है और राज्य सरकार ऐसे विज्ञापन का भुगतान अखबारों को देती है .

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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