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सचिन तेंदुलकर पर बढ़ता दबाव…

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देवेन्द्र शर्मा||

मास्टर ब्लास्टर, क्रिकेट का भगवान आदि उपनामों से प्रसिद्घ सचिन तेंदुलकर आज आलोचनाओं का शिकार हो रहे है. सचिन पर संन्यास का दबाव बढ़ता ही जा रहा है, पोटिंग के संन्यास ले लेने के बाद तो यह दबाव और बढ़ गया है. जिस बल्ले में कभी रनों की भूख रहती थी. आज वह भूख नदारद दिखती है. सचिन की बढ़ती उम्र उन्हें आलोचनाओं के कटघरे में खड़ी करती है. सचिन बार-2 बोल्ड हो रहे है. सचिन का इस तरह से बार-2 बोल्ड होना उन्हें कटघरे में खड़ा करता है. सचिन का फुटवर्क ठीक तरीके से कार्य नहीं कर रहा है. उनके बैट और पैड के बीच में बहुत जगह छूट रही है और उनके पैरों का मूवमेंट भी ठीक नहीं है. यही कारण है कि वह गेंद को सही दिशा में नहीं खेल पा रहे है.

हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सचिन खराब दौर से गुजर रहे हैं. पूर्व में ऐसा वाकया उनकी जिंदगी में कई दफा आया और हर बार वे मजबूत व दमदार प्रदर्शन के बलबूते सामने आए और अपने बल्ले का जौहर दिखाकर सभी आलोचकों के मुंह पर ताला जड़ दिया. उन्होंने जब भी वापसी की, हमेशा सहज और दमदार तरीके से की. पूर्व उनके इस हौसले और जज्बे का दीदार क्रिकेट प्रेमियों ने कई बार किया. लेकिन इस बार अपने फार्म को वापस पाने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है और इसमें वे बार-बार विफल हो रहे हैं. पिछले माह ही सचिन ने भी नवंबर में अपने कैरियर को लेकर फैसला करने की बात कही थी पर नवंबर माह बीतने के बाद भी उन्होंने इस दिशा में कोई फैसला नहीं किया. हालांकि इस बात में कोई संदेह नहीं कि सचिन के अन्दर खेलने का जज्बा अब भी मौजूद है पर टीम में बने रहने का सिर्फ एकमात्र यही कारण पर्याप्त नहीं है. सचिन को चाहिए कि अब आने वाले युवा पीढ़ी के लिए संन्यास लें ले जिस तरह द्रविड और लक्ष्मण ने किया.

 

देखा जाये तो सचिन काफी लम्बे समय से टीम के लिए कोई योगदान नहीं कर रहे है तब भी वे टीम में बने हुए है. इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज के पिछले दो मैचों में भी सचिन का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है. सचिन के इसी आउट ऑफ  फॉर्म होने के चलते सुनील गावस्कर और कपिल देव तक ने इस दिग्गज बल्लेबाज को सलाह दे डाली. सलाह यह कि सचिन अब अपने भविष्य के बारे में चयनकर्ताओं से बात करें और संन्यास को लेकर कोई सम्मानजनक रास्ता अख्तियार करें. मुश्किल की बात यह है कि चयनकर्ता सचिन पर संन्यास के लिए दबाव नहीं डाल सकते और सचिन भी खुलकर चयनकर्ताओं से कोई बात नहीं करते. हालांकि सुनने में यह आया है कि सचिन ने चयनकर्ताओं से बात की है लेकिन चयनकर्ताओं ने इस विषय पर सचिन को कोई माकूल जवाब नहीं दिया.

सचिन के प्रदर्शन पर यदि गौर करें तो वह रन के लिए बीते दो साल से तरस रहे हैं. सचिन का टेस्ट क्रिकेट में औसत भले ही 54.60 रन प्रति पारी हो, लेकिन यह स्टार बल्लेबाज पिछले दो साल में किसी भी समय 40 के औसत तक नहीं पहुंच पाया. सचिन अपनी पिछली 28 पारियों में शतक तक नहीं जमा पाए हैं. सचिन ने नवंबर 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट से लेकर इंग्लैंड के खिलाफ  मुंबई टेस्ट तक कुल 21 टेस्ट खेले और इनमें 27 पारियों में 37.71 की औसत से 1322 रन ही बनाए. उन्होंने अपना आखिरी शतक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ  जनवरी 2011 में लगाया था. इसके बाद उन्होंने 15 टेस्ट मैच खेले और उसकी 27 पारियों में वह 32.22 की औसत से 870 रन ही बना पाए. वैसे मास्टर ब्लास्टर ने अपने पूरे कैरियर में 192 मैच में 54.60 की औसत से 15562 रन बनाए हैं. अगर सचिन की पिछली 10 पारियों को देखे तो सचिन ने पिछली 10 पारियों में 15.3 के औसत से 153 रन ही बनाये है. सचिन के लिए यह कहा जाता है कि वह दबाव में अच्छा खेलते है और पूर्व में उन्होंने कई पारियों में दबाव में अच्छा प्रदर्शन किया है.

सचिन के संन्यास के विषय पर कुछ क्रिकेटर जहां उनके पक्ष में बोल रहे है वहीं कुछ विपक्ष में खड़े है. कपिल ने उन्हें चयनकर्ताओं से बात कर संन्यास की सलाह दी वहीं नवजोत सिद्घू का कहना है कि सचिन के हाथ में बल्ला है कोई सुदर्शन चक्र नहीं जिससे हर बार वह कामयाब हो. लेकिन देखा जाये तो सचिन को भी पोटिंग की राह पर चलते हुए सम्मानजनक विदाई ले लेनी चाहिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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