जन संसद ने जताया सरकार की नकदी हस्तांतरण योजना का विरोध

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28 नवम्बर 2012, जंतर मंतर, नई दिल्ली – जन संसद के तीसरे दिन आज देश भर के जन संगठनों व आन्दोलनों ने सरकार द्वारा सब्सिडी के बजाय नकदी हस्तांतरण की योजना का पुरजोर विरोध करते हुआ कि यह गरीबों को हाशिये पर धकेलने की साजिश है।

इस मौके पर अर्थशास्त्री रितीका खेरा का कहना था कि सरकार ने कोई भी नई सब्सिडी की घोषणा नहीं की है, वह जो अब तक अनुदान देती आ रही है, उसी को नये नारे के साथ फिर से परोसा जा रहा है, उन्होंने कहा कि जिस ब्राजील के सफल उदाहरण की दुहाई केन्द्र सरकार दे रही है, उन्हें याद रखना होगा कि ब्राजील एक बुहत छोटा देश है तथा वहां की 85 फीसदी जनता शहरों में रहती है, शहरों में बैंक होते है जबकि भारत की अधिसंख्य जनता गांवों में रहती है, जिनकी बैंकों तक पंहुच ही नहीं है, जब उनके खाते ही नहीं है तो वे नकदी हस्तांतरण का लाभ कैसे ले पायेंगे? सुश्री खेरा ने कहा कि ब्राजील की सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं के प्रति लोगों की जागरूकता व भागीदारी बढ़ाने के लिये नगदी हस्तांतरण योजना प्रारम्भ की थी जबकि भारत में वर्तमान में मौजूद सार्वजनिक सेवाओं का निजीकरण करने के उद्देश्य से कैश ट्रांसफर योजना लाई जा रही है।

राज्यसभा सांसद कामरेड वृंदा कारत ने भी नकदी हस्तांतरण योजना पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि सरकार इसके जरिये सार्वजनिक संसाधनों तक गरीबों की पंहुच को खत्म करना चाहती है, उन्होने वित मंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुये पूछा कि वे खेल के नियम बदलने की बात कर रहे है मगर किसके पक्ष में ? अम्बानी के पक्ष में या देश के आम नागरिकांे के पक्ष में ? उन्होंने कहा सरकार पूरा खेल ही पूंजीपतियों के पक्ष में बदल रही है।

भाजपा प्रवक्ता और सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कैश ट्रांसफर केवल जनता को फुसलाने का तरीका है, लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि जिनका आधार कार्ड बन गया है, उन्हे पैसा मिलेगा, जबकि ऐसा होगा नहीं, उन्होंने कहा कि यह लोगों के जल, जंगल, जमीन, अन्न, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत मुद्दों को दबाने का प्रयास है।

जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वयन की नेता मेधा पाटकर ने भी केन्द्र सरकार को नकदी हस्तांतरण की महत्वाकांक्षी योजना के लिये आडे हाथों लिया, उन्होंने कहा कि अनुदान के बदले नकदी देना एक विदेशी सोच और साजिश है। संसद में बहस किये बगैर पैसा बांट करके सरकार अपनी जिम्मेदारी को खत्म करना चाहती है। उनका कहना था कि यह पूरा एजेण्डा ही विश्व बैंक जैसी भूमण्डलीकरण की ताकत का है।

जन संसद 2012 की संकल्पना से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने भी नकदी हस्तांतरण योजना को गैर जरूरी बताते हुये उसकी कड़ी आलोचना की तथा कहा कि सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिये। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के जरिये नागरिकों की स्वतंत्रता कम की जा रही है, कहा जा रहा है कि आधार कार्ड नहीं तो स्कॉलरशिप नहीं, नरेगा में काम नहीं, पैंशन नहीं ? यह कैसी मनमर्जी है सरकार की ?

अखिल भारतीय महिला फैडरेशन की राष्ट्रीय सचिव एनी राजा ने स्पष्ट रूप से कहा कि कैष ट्रांसफर की आड़ में सरकार नरेगा और पीडीएस को खत्म करना चाहती है। पैंशन परिषद के डॉ. बाबा आढव ने कहा कि सरकार यह मानने लगी है कि हमारी अर्थव्यवस्था बीमारू हो गई है, इस बीमार अर्थ व्यवस्था को ठीक करने के बजाय सरकार बायपास का रास्ता ले रही है, उन्होने कहा कि सरकार विश्व बैंक के इशारे पर पूरी सब्सिडी को खत्म कर देना चाहती है।

जन संसद में सरकार की नकदी हस्तांतरण योजना पर सवाल उठाते हुये लोगों ने नारे के जरिये पूछा कि गरीबों को कैश ट्रांसफर और अमीरों को लैण्ड ट्रांसफर ? दिल्ली शहर की पुनर्वास कॉलोनी से आई पुष्पा तथा कुसुम ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली में नगदी के बजाय अनाज ही चाहिये तथा कैरोसीन ही चाहिये। राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखण्ड व महाराष्ट्र से आये कई वक्ताओं ने सरकार की नकदी हस्तांतरण योजना की निदा की और इसे गरीबों के लिये निरर्थक बताया।

गौरतलब है कि केन्द्रीय वित्तमंत्री पी.चिदम्बरम द्वारा 15 दिन के भीतर कैश ट्रांसफर की महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने की घोषणा की गई है, ’आपका पैसा आपके हाथ’ के लुभावने नारे के साथ शुरू होने वाली इस योजना में लाभार्थियों तक नकद सब्सिडी पहुंचाई जाएगी, 1 जनवरी से यह योजना देश के 16 राज्यों के 51 शहरों में लागू की जाएगी। सरकार ने 31 दिसम्बर 2013 तक पूरे देश में इस योजना को लागू करने का लक्ष्य रखा है।

सरकार के नगदी हस्तांतरण को अव्यवहारिक और गरीब विरोधी करार देते हुए जन संसद ने इसे विश्व बैंक के दबाव में बनाई गई एक ऐसी साजिष करार दिया है जो अन्ततः भारत के गरीब वर्ग को सब्सिडी के रूप में मिलने वाली सहायता को खत्म कर देगी। जन संसद में आज आधार कार्ड बांटने की परियोजना को भी पुरजोर विरोध किया गया। इस मौके पर षिक्षा, स्वास्थ्य, मजदूरी, नरेगा जैसे बुनियादी मसलों पर भी अहम चर्चा की गई तथा इनसे सम्बन्धित कई प्रस्ताव लिये गये तथा केन्द्र सरकार की गरीब विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुये संघर्ष की जरूरत पर जोर दिया गया।

(जन संसद की ओर से भंवर मेघवंशी)

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