फेसबुक पर ठाकरे विरोधी कमेंट मामले में पुलिस अधीक्षक निलम्बित और मजिस्ट्रेट का तबादला..

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फेसबुक पर ठाकरे विरोधी कमेंट करने पर 2 लड़कियों को अरेस्ट करने के मामले में सरकार ने लापरवाही बरतने पर सीनियर पुलिस ऑफिसर्स के खिलाफ सख्त ऐक्शन लिया है। सरकार ने ठाणे रूरल के एसपी रविन्द्र सेनगांवकर को सस्पेंड करने का फैसला लिया है। उधर बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन दोनों लड़कियों को 15-15 हजार रुपये की जमानत पर रिहा करने वाले फर्स्ट क्लास जुडिशियल मजिस्ट्रेट रामचंद्र बागडे का ट्रांसफर कर दिया है।

21 साल की शाहीन डाढा ने 18 नवंबर को शिवसेना चीफ बाल ठाकरे के अंतिम संस्कार वाले दिन फेसबुक पर एक स्टेटस अपडेट किया था। इस अपडेट को उनकी दोस्त रेणू ने लाइक करके शेयर किया था। हालांकि शाहीन ने अपनी पोस्ट में ठाकरे का जिक्र नहीं किया था, लेकिन स्थानीय शिवसेना चीफ ने उसके खिलाफ लोगों की भावनाएं भड़काने की शिकायत दर्ज करा दी। यही नहीं, शाहीन के चाचा के क्लिनिक में कुछ गुंडों ने तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने भी इस मामले में दोनों लड़कियों को अरेस्ट कर लिया था, जिसके बाद देश भर में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ के मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई थी।
चारों तरफ हो रहे विरोध के बाद महाराष्ट्र के सीएम पृथ्वीराज चव्हान और गृह मंत्री आर.आर. पाटिल ने ऐक्शन लेने का वादा किया था। इसके लिए आईजी रैंक के एक ऑफिसर को मामले की जांच सौंपी गई थी। जांच में पाया गया कि सीनियर पुलिस ऑफिसर्स ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अगर उन्होंने वक्त पर सही फैसला लिया होता, तो हालात इतने खराब नहीं होते। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि दोनों लड़कियों के खिलाफ इतनी गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने के पीछे कोई वजह समझ नहीं आती। दोनों पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने और गलत इंटेशन से मैसेज भेजने और गलत ऐक्टिविटीज़ करने का आरोप लगा था। 19 नवंबर को जांच के आदेश देते हुए महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने कहा था कि दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
जांच रिपोर्ट के आधार पर ठाणे के एसपी (रूरल) रविन्द्र सेनगांवकर और सीनियर इंस्पेक्टर श्रीकांत पिंगले को सस्पेंड किया जाएगा, जबकि ठाणे रूरल के एएसपी संग्राम निशानदार को कड़ी चेतावनी दी जाएगी। हमारे सहयोगी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की तरफ से शाहीन ढाडा और रीनू श्रीनिवासन को अरेस्ट किए जाने के खिलाफ चलाए गए कैंपेन के बाद ही यह ऐक्शन लिया गया है। महाराष्ट्र में हाल-फिलहाल सीनियर पुलिस ऑफिसर्स के खिलाफ की गई यह बड़ी कार्रवाई है।
इस मामले में मजिस्ट्रेट पर भी सवाल उठे थे। पूर्व चीफ इन्फर्मेशन कमिश्नर शैलेश गांधी ने सवाल उठाया था कि मजिस्ट्रेट ने मामले को ध्यान से देखा ही नहीं। उन्होंने यह नहीं देखा कि लड़कियों के खिलाफ क्या आरोप लगाए गए हैं और क्यों। मैजिस्ट्रेट ने शाहीन और रीनू को 15-15 हजार रुपये की जमानत के आदेश जारी कर दिए जबकि शाहीन के चाचा के क्लिनिक में तोड़फोड़ करने वालों को 7500 रुपये में जमानत दी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बागडे को तुरंत प्रभाव से जलगांव ट्रांसफर कर दिया गया है। सीनियर वकील अमित देसाई ने कहा, ‘सरकार के इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए। अच्छी बात है कि इस मामले के ठंडा पड़ने से पहले ही ऐक्शन ले लिया गया। इससे अच्छा मैसेज गया है। आइंदा कोई भी इस तरह से परेशान करने के लिए गलत रिपोर्ट नहीं लिखेगा।’ (एनबीटी)
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