महिला-हिंसा आरोपियों को सबक सिखाना होगा

-डॉ. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर||

 ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीरियल को बहुत से लोग देखते होंगे और देखकर उसके सही-गलत होने का आकलन करके उसके एपीसोड को भूल भी जाते होंगे। 24 नवम्बर 2012 का सीरियल सम्भवतः देखकर भूलाने वाला नहीं था और एक जागरूक व्यक्ति के लिए भुलाने लायक होना भी नहीं चाहिए। इस ऐपीसोड में अभिनेत्री लारा दत्ता के साथ सोनाली मुखर्जी नाम की एक लड़की भी थी। यह वही लड़की है जिसने अभी कुछ माह पूर्व इच्छामुत्यु की मांग करके पूरे देश में हलचल पैदा कर दी थी। यह वही लड़की है जिसके चेहरे पर वर्ष 2003 में तीन मनचले लड़कों ने तेजाब डाल दिया था। इस दुर्दान्त घटना से उसका देखना, सुनना, बोलना बिलकुल समाप्त हो गया था। सोचा जा सकता है कि सोनाली ने किस तरह के कष्ट को सहा होगा और आज भी सह रही है। विगत नौ वर्षों से लगातार घनघोर यातना, मानसिक यंत्रणा को सहने के बाद भी सोनाली की मानसिक शक्ति में, संबल में किसी भी तरह की कमी नहीं आई।
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सोनाली मुखर्जी एकमात्र लड़की नहीं है जो किसी भी मनचले लड़के के इस तरह के कुकृत्य का शिकार हुई हो, उसके पहले भी बहुत सी लड़कियों को इस तरह के हमलों को सहना पड़ा है तथा उसके बाद भी बहुत सी लड़कियां तेजाब हमले का शिकार हुई हैं। सोनाली के केस में अदालत के द्वारा तीनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया और आज जहां सोनाली अपने आपसे लड़ रही है वहीं वे तीनों आरोपी खुलेआम बिना किसी अपराधबोध के अपनी जिन्दगी को जीने में लगे हैं। कौन बनेगा करोड़पति सीरियल से पहले भी सोनाली को लेकर एक कार्यक्रम टी0वी0 पर दिखाया गया था। उसमें दर्शायी गई जानकारी के अनुसार सोनाली की मां अवसाद की स्थिति में जाकर मानसिक रूप से बीमार हो चुकी हैं, भाई उसकी देखरेख में लगा होने के कारण आज भी बेरोजगार है, पिता भी पिछले नौ वर्षों से उसके साथ उसकी देखरेख में लगे हैं, एक छोटी बहिन आरोपियों से घबराती हुई अपने जीवन को गुजार रही है।
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सोनाली को आधार बनाकर पूर्व के कार्यक्रम में और कौन बनेगा करोड़पति में इस बात की वकालत की गई कि किसी भी रूप में ऐसे आरोपियों को जमानत पर रिहा न किया जाये। स्वयं सोनाली ने कहा कि या तो कानून अपना काम सही ढंग से नहीं कर रहा है अथवा ऐसे लोगों में कानून का भय नहीं रह गया है। देखा जाये तो उक्त दोनों बातें आंशिक अथवा पूर्णतः सत्य हैं। कानून भी अपना काम सुचारू रूप से नहीं कर रहा है, ऐसे भयानक कांडों के बाद भी अदालत सबूतों के आधार पर, कागजों पर बने नियमों-कानूनों के आधार पर अपने फैसले सुना देती है। इसी तरह से लोगों में, अपराधियों में कानून का, अदालतों का बिलकुल भी भय नहीं रह गया है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गये तमाम सारे कानूनों-अधिनियमों के बाद भी महिलाओं के प्रति हिंसात्मक माहौल में किसी भी तरह की कमी देखने को नहीं मिली है। आये दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनायें, अपहरण की घटनायें, उनके साथ बलात्कार की घटनायें देखने को मिल रही हैं और कुत्सित मानसिकता के लोगों द्वारा इसमें असफल होने पर महिलाओं पर विभिन्न प्रकार के हथियारों से हमले, जिनमें हाल के वर्षों में तेजाब प्रमुखता से प्रयोग किया जाने लगा है, कर दिये जाते हैं।
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ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपायों में संस्कारों, संस्कृति, अनुशासन, व्यवहार आदि की बात की जाती है। ये बातें अपनी जगह सही हैं किन्तु अब इस तरह के जघन्य अपराधों को रोकने के लिए कड़े से कड़े कदम उठाये जाने की जरूरत है। होना यह चाहिए कि ऐसे अपराधों के आरोपियों को किसी भी रूप में जमानत पर रिहा न किया जाये। अदालतों द्वारा शीघ्र से शीघ्र ऐसे मुकदमों पर फैसला सुनाना चाहिए और अपराधियों को सजा इतनी कठोर दी जाये कि उसे देखकर भविष्य में कोई भी इस तरह के कदमों को उठाने की हिम्मत न कर सके। समाज को भी जागरूक रहने की आवश्यकता है, ऐसी कुत्सित मानसिकता के लोग आये दिन हमारे आसपास टहलते दिख जाते हैं, आये दिन महिलाओं-लड़कियों-बच्चियों आदि से गलत हरकतें करते हमें दिख जाते हैं और हम देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। हम सभी को ऐसे लोगों के विरुद्ध एकजुट होना पड़ेगा, हो सकता है कि हम सभी की शक्ति के आगे इनकी ये दुर्दान्त हरकतें बौनी होकर समाप्त हो जायें।
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