क्या रिपोर्ट इसरानी के यहां से लीक हुई?

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गुर्जर आरक्षण को लेकर गठित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से सरकार को दी गई रिपोर्ट लीक होने पर एक ओर जहां सरकार परेशानी में आ गई है, वहीं यह यक्ष सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर यह रिपोर्ट लीक कैसे हुई? खुद सरकार तो अचंभे में है ही, विरोधी दल भाजपा ने भी यह सवाल उठा दिया है कि जो रिपोर्ट मंत्रीमंडल के सामने चर्चा के लिए आनी थी, वह पेश होने के साथ ही मीडिया को लीक कैसे हो गई? बताया जाता है कि इसका पता करने के लिए अफसरों ने कुछ मीडियाकर्मियों को भी फोन किए कि उन्हें रिपोर्ट के बारे में कहां से पता लगा?
असल में विवाद इस कारण उत्पन्न हुआ क्योंकि रिपोर्ट के बारे में बताया गया कि इसमें विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) को अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे में आरक्षण देने तथा इस कोटे के वर्गीकरण के संबंध में सिफारिश की गई है। इस पर जाहिर तौर पर ओबीसी के जातियों में खलबली मचनी ही थी, क्योंकि इससे उनका हक बांटा जा रहा था। सरकार को लगा कि ये तो बैठे ठाले मुसीबत खड़ी हो गई, लिहाजा मुख्य सचिव के साथ बैठकों का दौर चला व दो बैठकों के बाद आयोग के सदस्य डॉ.सी.बी. शर्मा से बयान जारी कराया गया कि इस प्रकार की अनुशंसा नहीं की गई है। शर्मा ने 50 प्रतिशत की सीमा लांघने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं, जिनके तहत सरकार विशेष परिस्थितियों में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण दे सकती है। उनका यह बयान हालांकि रिपोर्ट लीक होने से उत्पन्न होने से हो रही फजीहत से बचने के लिए दिया गया, मगर एक अर्थ में यह बयान भी तो अपने आप में रिपोर्ट की चर्चा करना और उसके बारे में कुछ खुलासा करने के समान ही तो है। हालांकि चर्चा यह भी है कि विशेष पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर सरकार प्रतिक्रिया जानना चाहती थी, इस कारण रिपोर्ट को जानबूझ कर लीक करवाया गया।
जाहिर सी बात है कि जब आयोग के सचिव शर्मा ने ही रिपोर्ट के बारे में बयान दिया तो उस पर भी सवाल उठ गया। भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ ने बाकायदा आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि ओबीसी आयोग के सचिव सी बी शर्मा ने लिखित वक्तव्य जारी करके गोपनीयता के नियमों को भंग कर दिया है। इस रिपोर्ट के तथ्यों को सबसे पहले देखना कैबिनेट का विशेषाधिकार था। रिपोर्ट की वैधानिकता पर ही सवालिया निशान लग गया है।
खुद आयोग अध्यक्ष जस्टिस इंद्रसेन इसरानी भी मीडिया के सामने आए और बोले कि रिपोर्ट गोपनीय है, इस पर कुछ नहीं बता सकते। आप हमारी मजबूरी समझें। मगर साथ ही कहा कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर कर सकते थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि विशेष परिस्थितियों में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण दिया जा सकता है। विशेष परिस्थितियों को अंकित करना पड़ता। हम इससे सहमत नहीं हैं। हमने 50 प्रतिशत ऊपर की सिफारिश नहीं की है। स्पष्ट है कि यह भी एक प्रकार से रिपोर्ट को लीक करना ही है।
कुल मिला कर सब कुछ प्रायोजित सा लगा। अगर सरकार ने खुद की आयोग दफ्तर से रिपोर्ट को लीक करवाया, इस कारण भला उससे आयोग अध्यक्ष व सचिव से जवाब-तलब करने की क्या उम्मीद की जा सकती है।
-तेजवानी गिरधर

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