/* */

ज़ी न्यूज़ और नवीन जिंदल विवाद पर संगोष्ठी : एक रिपोर्ट

admin
Page Visited: 115
0 0
Read Time:6 Minute, 57 Second

दिल्ली. मीडिया इंडस्ट्री में चारों तरफ ब्लैकमेलिंग ही हो रहा है. ऐसा बिलकुल नहीं है. सीईओ इज ए डर्टी एनिमल. ऐसा समझना भी ठीक नहीं. खराब माहौल के बावजूद  बहुत सारे लोग बेहतर तरीके से अपना काम कर रहे हैं. यह बात अलग है कि जो बिजनेस ला सकता है उसे कमियों के बावजूद भी चुन लिया जाता है. दरअसल आज सबसे बड़ी समस्या और मुद्दा सेल्फ रेगुलेशन की है, जब तक विभाजन रेखा नहीं खींच लेते तब तक हम बेहतर की उम्मीद नहीं कर सकते. सेल्फ रेगुलेशन कोड ऑफ साइलेंस बन गया है. ये टूटेगा तभी सेल्फ रेगुलेशन के प्रति भरोसा लौटेगा. गवर्नेंस नाऊ के संपादक बी.वी.राव ने ज़ी न्यूज़ और उद्योगपति नवीन जिंदल के बीच हुए ताजा विवाद के संदर्भ में आयोजित एक संगोष्ठी में ये बाते कहीं. यह संगोष्ठी मीडिया खबर डॉट कॉम और सीएमएस मीडिया लैब ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था.

गौरतलब है कि ज़ी न्यूज़ पर उद्योगपति नवीन जिंदल ने ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है और इस संबंध में स्टिंग की सीडी भी जारी कर मीडिया जगत में खलबली मचा दी. न्यूज़ चैनलों के संपादकों की संस्था ब्रॉडकास्टर एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने कार्रवाई करते हुए ज़ी न्यूज़ के संपादक की बीईए की प्राथमिक सदस्यता खत्म कर दी.

ज़ी न्यूज़ – नवीन जिंदल प्रकरण में बीईए की भूमिका के बारे में बताते हुए बीईए के महासचिव एन.के.सिंह ने कहा कि पेशेगत नैतिकता के तहत सुधीर चौधरी पर कार्रवाई की. तीन सदस्यों की एक कमेटी बनी, टेप देखा और लगा कि गड़बड़ी है. सो प्रोफेशन कन्डक्ट के आधार पर आरोपी संपादक को संस्था से बाहर निकाला गया. लेकिन उसके पहले सुधीर चौधरी को भी अपना पक्ष रखने के लिए मौका दिया गया. दरअसल यह सारी गड़बड़ियां बैलेंसशीट देखकर पत्रकारिता करने का परिणाम है.

वहीं आजतक के पूर्व न्यूज़ डायरेक्टर और वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी ने कहा कि ज़ी न्यूज़ और नवीन जिंदल प्रकरण को एक एक मामले के तौर पर देखकर अगर हम बात करें तो कहीं कुछ निकलकर नहीं आएगा. दरअसल ये लार्जर जर्नलिस्टिक सिनारियो का एक मैनिफेस्टो है. देखा जाए तो एडिटर और बिजनेस हेड का पद ही अपने आप में कॉन्फलिक्ट ऑफ इन्टरेस्ट है. ज़ी न्यूज़ में ऐसा ही हुआ तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं. पहले पेड न्यूज पर्दे के पीछे करते थे और अब एकदम सामने से होने लगा. हमें कार्पोरेट मीडिया की जो समस्या बात करनी होगी. उसके तह में ही पत्रकारिता की समस्याएं छुपी हुई है.

दूसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि हम पत्रकारिता के स्वर्णयुग में नहीं रह रहे हैं. मीडिया संस्थान को चलाने के लिए एक बड़ी पूंजी की जरुरत है और जो पूँजी लगाएगा उसे लाभ चाहिए. इसलिए पत्रकारीय अपराध नहीं रुक रहे. सेल्फ रेगुलेशन भी ऐसा करने में असफल रहा है. बीईए और एनबीए जैसे संस्थानों को अपनी सदस्यता के मापदंड़ों पर विचार करना चाहिए. इसके अलावा विज्ञापन की दरों को तय करना होगा और उसे रेगुलेट करने की जरुरत है.

सीएमएस मीडिया लैब के चेयरमेन डॉ.भास्कर राव ने कहा कि 24X7 एक तरह से फैल्यूअर हो गया है..हम इसे बहुत करीब से देख रहे हैं. पत्रकार की भूमिका बहुत ही तेजी से ध्वस्त हो रही है और जब तक इसे दोबारा से हासिल नहीं कर लिया जाता, कुछ बेहतर होने की उम्मीद हम नहीं कर सकते. ये विवाद एक तरह से दो मालिकों के बीच का विवाद है लेकिन इसे न्यूजरुम में घुसेड़ दिया गया है. अगर आप इसकी प्रवृत्ति पर विचार करें तो ये पूरी तरह से घाटे का धंधा हो गया है और जब तक उल्टे-सीधे तरीके से कुछ किया न जाए, तब तक वो मार्केट में टिका नहीं रह सकता.

मीडिया मामलों की विशेषज्ञ पी वासंती ने ब्रॉडकास्टर एडिटर एसोसिएशन की ज़ी – जिंदल प्रकरण में तारीफ़ करते हुए कहा कि ज़ी न्यूज़ – नवीन जिंदल प्रकरण में पहली बार ब्रॉडकास्टर एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने सख्ती दिखाते हुए आरोपी संपादक पर कार्रवाई की.  यह सही कदम था और इसके लिए बीईए की सराहना होनी चाहिए.

बतौर फायनेंसियल एक्सपर्ट संगोष्ठी में शामिल ग्लोबल कैपिटल के कंट्री हेड कवी कुमार ने कहा कि आज जब घोटाले होते हैं तो कैलकुलेटर की नहीं, कम्प्यूटर की जरुरत हो जाती है. आज मीडिया की साख नहीं रही है.

संगोष्ठी में आम सहमति बनी कि ज़ी न्यूज़ – नवीन जिंदल प्रकरण मीडिया के लिए खतरे की घंटी की तरह है और इसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है. मीडिया के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मीडिया संस्थानों पर एक सामाजिक दवाब की जरूरत है. बहस में अभिषेक श्रीवास्तव, धीरज श्रीवास्तव, प्रसून शुक्ला, राम एन कुमार, विनीत कुमार, भूपेंद्र, यशवंत सिंह, विशाल तिवारी, निखिल, चंदन कुमार सिंह, मृगांक विभु समेत कई पत्रकार , मीडियाकर्मी, शोधार्थी और पत्रकारिता के छात्र शामिल हुए.

 

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

सैंडी ने बताया कि सरकार को लोककल्याणकारी क्यों होना चाहिए!!

-पलाश विश्वास|| अमेरिका में आये भयानक तूफान से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समीकरण बदलते हुए नजर आ रहे हैं।अमेरिका में […]
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram