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गडकरी विवाद के साये में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महज़ भाजपा पर अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए नितिन गडकरी को भाजपा अध्यक्ष बनाये रखना चाहता है. जिसके चलते “पार्टी विथ अ डिफ़रेंस” पर कांग्रेस की बहन होने का ठप्पा लग रहा है..  नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले ही अगर नैतिकता को तिलांजली दे देगें तो लोग उन्हें “रंगा सियार” ही तो कहेंगे..

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच संघ प्रमुख मोहन भगवत द्वारा उनको दी गयी क्लीन चिट और उसके बाद भैय्या जी द्वारा दिए गए बयान के बाद दो नवंबर से आरएसएस के कार्यकारी मंडल की चेन्नई में बैठक होने जा रही है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के मामले में आरएसएस की भूमिका को लेकर यह बैठक अहम मानी जा रही है. सभी भाजपा नेताओं की निगाहें इस बैठक पर लगी हुई हैं. 
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, गडकरी को लेकर जिस तरह से बवाल मचा है, उससे संघ नाखुश तो है लेकिन उसने अब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का साथ नहीं छोड़ा है. कार्यकारी मंडल की बैठक साल में दो बार होती है. मार्च में प्रतिनिधि सभा की बैठक होती है, दूसरी बैठक दीवाली से पहले होती है. इसमें संघ से जुड़े संगठनों के प्रमुखों के अलावा राज्य प्रमुख हिस्सा लेते हैं. दो नवंबर से होने वाली बैठक गडकरी विवाद के साये तले होने जा रही है इसलिए पार्टी नेताओं की इस पर निगाहें हैं.
पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि संघ पहले ही स्थिति साफ कर चुका है इसलिए कार्यकारी मंडल की बैठक में कहने के लिए कुछ ज्यादा नहीं बचा है. दूसरी तरफ पार्टी में एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे लगता है कि संघ बैठक में गडकरी को लेकर कुछ संकेत जरूर दे सकता है.
संघ ने तीन दिन पहले जो बयान दिया है, उससे यह मान लिया गया है कि वह फिलहाल गडकरी के खिलाफ नहीं है. इसकी वजह यह भी मानी जा रही है कि संघ को लगता है कि गडकरी के खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं, वह सुनियोजित अभियान के तहत ही हैं. उसे लगता है कि मीडिया ट्रायल के आधार पर ही गडकरी को न हटाया जाए, बल्कि इस मामले में वेट एंड वॉच की स्थिति बरकरार रखी जाए. अगर यह मामला और तूल पकड़ता है या फिर और गंभीर आरोप सामने आते हैं तो उस स्थिति में यह हो सकता है कि गडकरी को दूसरा कार्यकाल न दिया जाए.
कुछ बरसों से संघ और पार्टी के एक वर्ग में द्वंद्व चल रहा है. ज्यादातर नेता मानते हैं कि गडकरी के जरिये ही संघ, पार्टी में पकड़ बनाए रखना चाहता है. यही वजह है कि वह नहीं चाहता कि जल्दबाजी में गडकरी को हटाया जाए.

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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