रॉबर्ट वाड्रा मामले में नत मस्तक हो गयी हरियाणा की सरकारी मशीनरी…!

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हरियाणा की सरकारी मशीनरी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के मामले में कामकाज की मर्यादा ही भूल गई. अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी जांच करती रही और वाड्रा-डीएलएफ के बीच हुए साढ़े तीन एकड़ जमीन के सौदे को क्लीन चिट दे दी गई. गुड़गांव के जिला उपायुक्त ने भी देर न करते हुए तहसीलदार के फैसले को वाजिब ठहराया. विदित हो कि पूर्व चकबंदी महानिदेशक अशोक खेमका ने इसी भूखंड का दाखिल खारिज निरस्त करके हरियाणा की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को हिला दिया था.

यह सौदा रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड तथा डीएलएफ यूनिवर्सल के बीच मानेसर के शिकोहपुर की साढ़े तीन एकड़ जमीन के बीच हुआ था. मानेसर के तहसीलदार कम उप रजिस्ट्रार ने चार साल पहले 11 जनवरी, 2008 को जारी अधिसूचना को आधार बनाते हुए वाड्रा-डीएलएफ के बीच हुई डील का दाखिल खारिज स्वीकृत किया था.

इस अधिसूचना के मुताबिक राज्य में तहसीलदार कम उप रजिस्ट्रार को चकबंदी अधिकारी की शक्तियां प्राप्त हैं. तहसीलदार चूंकि पंजीयन प्राधिकारी के साथ-साथ चकबंदी अधिकारी भी होता है. इसलिए उसने जमीन का दाखिल खारिज करने के लिए सरकार से अलग से अनुमति लेना उचित नहीं समझा.

गुड़गांव के उपायुक्त पीसी मीणा ने मुख्यालय भेजी अपनी रिपोर्ट में वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ यूनिवर्सल के बीच हुए साढ़े तीन एकड़ जमीन के दाखिल खारिज को पूरी तरह से वाजिब ठहराया है. ध्यान रहे कि पूर्व चकबंदी महानिदेशक डॉ. अशोक खेमका ने यह दाखिल खारिज रद कर दिया था. इसी की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव कृष्ण मोहन के नेतृत्व में राज्य स्तरीय कमेटी बनाई गई है.

गुड़गांव के उपायुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक तहसीलदार कम उप रजिस्ट्रार ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 11 जनवरी, 2008 से सिर्फ वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ यूनिवर्सल के बीच हुई डील का ही निपटारा नहीं किया है बल्कि कुल 150 दाखिल खारिज किए हैं. मानेसर के शिकोहपुर गांव के खसरा नंबर 730 में 3.53 एकड़ भूमि की खरीद 12 फरवरी, 2008 को हुई थी. इस जमीन की कीमत उस समय 7.5 करोड़ रुपये आंकी गई थी. इसी प्रकार से हरियाणा के चार जिलों- गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल और मेवात में वाड्रा के जमीन सौदों को भी आनन-फानन में क्लीन चिट दी गई थी.

गुड़गांव के उपायुक्त के अनुसार इस जमीन की स्टांप ड्यूटी के रूप में 34 लाख 49 हजार 700 रुपये अधिक का भुगतान किया गया है, लेकिन वाड्रा-डीएलएफ ने इतना अधिक भुगतान क्यों किया, इस बारे में रिपोर्ट में कहीं जिक्र नहीं है. अलबत्ता दलील दी जा रही है कि अधिक भुगतान खरीददार या विक्रेता की इच्छा पर निर्भर करता है. जिला उपायुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक वाड्रा की कंपनी ने 18 सितंबर, 2012 को 58 करोड़ रुपये की डीड के लिए 2 करोड़ 64 लाख 3 हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया. मानेसर के तहसीलदार-कम-उप रजिस्ट्रार ने पूर्व चकबंदी महानिदेशक अशोक खेमका के आरोपों के मद्देनजर कहा है कि तहसीलदारों को 11 जनवरी, 2008 को जारी अधिसूचना के अनुसार पूरे राज्य में चकबंदी अधिकारी की शक्तियां प्राप्त हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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  1. हरियाणा के चार जिलों- गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल और मेवात में वाड्रा के जमीन सौदों को भी आनन-फानन में क्लीन चिट दी गई.

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