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सत्ता की दोनों धुरियां मुखौटा बदलने की कवायद में लगा दी गयीं….

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आर्थिक सुधार के खिलाफ बना माहौल फुस्स हो गया है. एफडीआई की मार झेलकर जनता सत्ता की गंदगी से त्योहारों की रोशनी सजाने में लग गयी है. मीडिया ने आम आदमी की तकलीफों को सनसनी की चाशनी में ऐसा डुबो दिया है कि पहले से सूचनाओं से वंचित बहिष्कृत बहुसंख्यक जनता अपनी बलि चढ़ाने के लिए खुद ब खुद तैयार है.

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

मनमोहन कैबिनेट में फेरबदल से पहले अचानक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. सूत्रों की मानें तो कैबिनेट के कुछ बड़े चेहरों को पार्टी के काम के लिए वापस कांग्रेस संगठन में भेजा जा सकता है. दूसरी ओर भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी फिलहाल इस्तीफा नहीं देंगे लेकिन अब उन्हें  भाजपा अध्यक्ष का दूसरा कार्यकाल नहीं मिलेगा. बीजेपी के आला नेताओं की बैठक में यह फैसला लिया गया. नितिन गडकरी को अब दिसंबर के बाद दूसरा कार्यकाल मिलने की संभावना नहीं है. पार्टी सूत्रों से ख़बर आ रही है कि गडकरी को सम्मानजनक विदाई दी जाएगी.

व्यंग्य चित्र: मनोज कुरील

सत्ता की दोनों धुरियां मुखौटा बदलने की कवायद में लगा दी गयी. भाजपा को अपने दामन में लगे दाग को छुपाने के लिए संघ परिवार की सारी नैतिकता और पवित्रता के साथ हिंदू राष्ट्रवाद का उन्माद कम पड़ रहा है. वहीं कांग्रेस मंत्रियों के चेहरे बदलकर भ्रष्टाचार के आरोपों को रफा दफा करने में लगा है. इससे आर्थिक सुधार के खिलाफ बना माहौल फु्स्स हो गया है. एफडीआई की मार झेलकर जनता सत्ता की गंदगी से त्योहारों की रोशनी सजाने में लग गयी है.मीडिया  ने आम आदमी की तकलीफों को सनसनी की चाशनी में ऐसा डुबो दिया है कि पहले से सूचनाओं से वंचित बहिष्कृत बहुसंख्यक जनता अपनी बलि चढ़ाने के लिए खुद ब खुद तैयार है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आज शाम सात केंद्रीय मंत्रियों का इस्तीफा स्वीकार करने के साथ ही रविवार को कैबिनेट विस्तार का मार्ग प्रशस्त हो गया है जिसमें कम से कम 10 नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं और कुछ राज्य मंत्रियों को तरक्की मिल सकती है. आनंद शर्मा को विदेश मंत्रालय दिया जा सकता है. मनीष तिवारी को भी मंत्री पद देने की तैयारी है.

व्यंग्य चित्र: सतीश आचार्य

भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश में सबसे भ्रष्ट और असंवेदनशील सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं. पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)  चुनावी रैली को सम्बोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख होने के नाते जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते. स्वराज, हालांकि मीडियाकर्मियों द्वारा भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में पूछे गए प्रश्नों को टाल गईं. उन्होंने कहा, गडकरी ने खुद कहा है कि वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.` हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 4 नवम्बर को होना है. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों का पालन करने की जरूरत बताते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि देश के सभी लोग समान हैं और सभी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए.

उग्र हिंदुत्व के रास्ते पर लौट रही भाजपा में कल्याण सिंह की वापसी के जरिये हिंदुत्व बिग्रेड को मजबूत करने की रणनीति है. देश के सबसे ज़्यादा आबादी वाले सूबे उत्तर प्रदेश की फिजाओं में फिर से सांप्रदायिकता घोली जा रही है. सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचे के ढहाए जाने के आरोपी कल्याण सिंह ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि अयोध्या का विवादित ढांचा उन्हीं के इशारे पर गिराया गया था. उत्तर प्रदेश के एटा में उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की पूरी जिम्मेदारी उनकी है. कल्याण ने कहा कि उन्होंने ही आदेश दिया था कि कारसेवकों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. करीब 20 साल बाद कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की जिम्मेदारी ली है.

भारतीय लोकतंत्र पर बाजार का वर्चस्व किस कदर हावी है, मसलन, गुजरात में 13 से 17 दिसंबर के बीच चुनाव है. इस दौरान पर्यटकों को चुनावी प्रक्रिया से रूबरू कराया जाएगा. टूर ऑपरेटर सैलानियों को गुजरात आने के लिए 2 दिन से 10 दिन तक के पैकेज ऑफर कर रहे है. इसमें पर्यटकों के साथ एक गाइड भी रहेगा जो उन्हें दर्शनीय स्थान की जानकारी के अलावा चुनावी प्रक्रिया की भी जानकारी देगा. सैलानियों को इस इलेक्ट्रोरल टूर पैकेज के लिए 200 से 600 डॉलर तक चुकाने होंगे.इलेक्शन टूरिज्म पैकैज में अगर सैलानियों को नेताओं से नहीं मिलाया गया तो मजा अधूरा रह जाएगा. इसे ध्यान में रखते हुए ऑपरेटरों ने पर्यटकों को नेता और चुनाव आयोग के अधिकारियों से भी मुलाकात करवाने का आयोजन किया है. गुजरात के द्वारिका, सोमनाथ, अम्बाजी, पावागढ़, कच्छ और डाग जैसे इलाकों के लिए टूर ऑपरेटर्स ने ये पैकेज ऑफर किये हैं. इस नए इलेक्शन टूरिज्म कन्सेप्ट को काफी अच्छा रिस्पान्स भी मिल रहा है. अब तक ऑपरेटर्स को युक्रेन, चीन, जर्मनी, इटली जैसे देशो से करीब 32 लोगों की बुकिंग मिल चुकी है.

इसी बीच ‘तीसरे मोर्चे’ के गठन में अब तक हाथ आई नाकामी के बावजूद समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने आज एक गैर-कांग्रेस, गैर-भाजपा मोर्चे के गठन के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया और केंद्र की संप्रग सरकार में शामिल होने से इंकार किया. भाकपा और तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं ने भी इस विचार का समर्थन किया और ‘वैकल्पिक राजनीति’ को आकार देने में मुलायम से अगुवाई करने को कहा.यादव, भाकपा के ए बी वर्धन और तेदेपा के एन. नागेश्वर राव के अलावा कई अन्य नेताओं ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें एक राजनीतिक संरचना के रूप में एक ‘वैकल्पिक राजनीति’ के गठन की जरूरत बताई गयी है. जब दोनों बड़े राजनीतिक दल सरकार बनाने में नाकाम होंगे तो यह संगठन विकल्प मुहैया करा सकता है.दिवंगत समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया के लोकसभा में दिए गए भाषणों पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर ये नेता इकट्ठा हुए थे. अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता देवब्रत विश्वास, पूर्व न्यायाधीश राजिंदर सच्चर और जाने माने पत्रकार एवं लेखक कुलदीप नैयर भी इस अवसर पर मौजूद थे.

भाकपा नेता डी. राजा ने बाद में कहा कि वह प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है. बहरहाल, उन्होंने यह कहते हुए इस विचार का समर्थन किया कि एक शुरुआत हुई है लिहाजा देश के सामने एक विकल्प देने के लिए ताजा पहल किए जाने की जरूरत है. राजा ने भी कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जनता की अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हैं. नेताओं ने प्रस्ताव की एक पंक्ति पर आपत्ति जताई जिसमें यह कहा गया था कि समूह के सदस्य साल 2014 के लोकसभा चुनावों में एक ही चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ें. बाद में इस पंक्ति को हटा दिया गया था.

बाद में संवाददाताओं से बातचीत में मुलायम सिंह यादव ने केंद्र की संप्रग सरकार में शामिल होने से इंकार किया. यह सवाल किए जाने पर कि क्या उन्हें मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्योता दिया गया है, इस पर यादव ने कहा, ‘न तो प्रधानमंत्री ने इस बाबत मुझसे बात की है और न ही सपा ने कभी सरकार में शामिल होने पर विचार किया.’

कांग्रेस को नैतिकता की परवाह नहीं है. भाजपा को कितनी है? अपनी कंपनियों के संदिग्ध वित्तपोषण को लेकर आरोपों का सामना कर रहे भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने किसी भी विवाद के जिक्र से परहेज किया और भ्रष्टाचार, खराब प्रशासन और बेरोजगारी के मुद्दों पर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. पार्टी का समर्थन हासिल होने के बाद गडकरी ने किन्नौर जिले के आदिवासी बहुल रेकोंग पोए और शिमला के अंदरूनी में चोपाल में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए अपने पूर्ती समूह में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की चर्चा से परहेज किया. उन्होंने मीडिया से भी बातचीत नहीं की.शुक्रवार शाम दिल्ली पहुंचने के बाद गडकरी भाजपा नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज से मिले. इससे पहले खबरें आई थीं कि कारोबार में फर्जीवाड़े के आरोपों में घिरे गडकरी ने इस्तीफे की पेशकश की है, जिसे भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने बेबुनियाद बताया. गडकरी पिछले कुछ दिनों से बिजनस में गड़बड़ियां करने के गंभीर आरोपों से जूझ रहे हैं.शुक्रवार को उन चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा कि गडकरी को दूसरी बार भाजपा अध्यक्ष बनाने के मुद्दे पर पार्टी नेताओं में मतभेद हैं. चर्चा थी कि पार्टी के ज्यादातर सीनियर नेताओं को लग रहा है कि अब गडकरी को दूसरा कार्यकाल नहीं दिया जाना चाहिए, ताकि चुनाव वाले राज्यों में कोई नुकसान न हो. लेकिन जावडेकर ने इन चर्चाओं पर यह कहकर विराम लगा दिया कि भाजपा न सिर्फ अपने अध्यक्ष के साथ है, बल्कि हिमाचल चुनाव प्रचार में भी उन्हें शामिल करेगी.

गौरतलब है कि भाजपा भले ही मल्टि ब्रैंड रीटेल में एफडीआई का विरोध कर रही है लेकिन पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को लगता है कि देश को कई सेक्टरों में विदेशी निवेश यानी एफडीआई की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि परफॉर्मेंस का हर क्षेत्र में ऑडिट होना चाहिए और पार्टी में भी इस तरह का ऑडिट हो.नई दिल्ली में तीन अक्तूबर को गडकरी ने कहा कि इस वक्त बाहर से निवेश तो नहीं ही आ रहा, साथ ही भारतीय उद्योगपति भी अपनी पूंजी बाहर लेकर जा रहे हैं. हमें कई क्षेत्रों में एफडीआई लाना होगा. उन्होंने कहा कि इस देश में मिसमैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्या है. यहां स्मारक बन जाते हैं लेकिन कोल्ड स्टोरेज नहीं बन पाते. उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां स्मारक बनाए गए, अच्छा किया गया, लेकिन कोल्ड स्टोरेज भी बन जाते तो किसानों को अपनी फसल नहीं फेंकनी पड़ती.गडकरी ने दावा किया कि इस साल 85 हजार करोड़ रुपये का अनाज सड़ जाएगा. उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में परफॉर्मेंस का ऑडिट होना चाहिए. यहां तक की पार्टी में भी ऐसा होना चाहिए. ई-गवर्नेंस पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अगर इसका उपयोग किया जाए तो 70 फीसदी तक करप्शन खत्म हो सकता है.

मंत्रिमंडलीय फेरबदल से पहले कैबिनेट मंत्रियों एस.एम. कृष्णा (विदेश), अंबिका सोनी (सूचना प्रसारण), मुकुल वासनिक (सामाजिक न्याय), सुबोध कांत सहाय (पर्यटन), राज्य मंत्री महादेव खंडेला (आदिवासी मामले), राज्य मंत्री अगाथा संगमा (ग्रामीण विकास), राज्य मंत्री विंसेंट पाला (जल संसाधन एवं अल्पसंख्यक मामले) ने इस्तीफे दे दिये है. उनका कहना है कि वे अब पार्टी के लिए काम करेंगे. कृष्णा को छोड़ बाकी सभी ने आज अपने इस्तीफे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपे.

शुरूआत में अटकलें लगाई जा रही थीं कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है लेकिन अब ऐसा होने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं. उन्हें पार्टी में ही बड़ी भूमिका दी जा सकती है और संभव है कि वह कार्यकारी अध्यक्ष बना दिए जाएं. आनंद शर्मा को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से हटाए जाने के आसार हैं और कृष्णा की जगह विदेश मंत्रालय दिए जाने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है. संप्रग-1 सरकार में वह विदेश मंत्रालय में ही बतौर राज्य मंत्री थे.

आनंद शर्मा का वाणिज्य मंत्रालय डी. पुरंदेश्वरी को मिलने की संभावना है जो दिवंगत एन.टी. रामाराव की पुत्री हैं. वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में आठ साल बतौर राज्य मंत्री रही हैं. जिन नए लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के प्रबल आसार हैं, उनमें चिरंजीवी (आंध्र प्रदेश), ए एच खान चौधरी, प्रदीप भटटाचार्य और दीपा दासमुंशी (पश्चिम बंगाल), तारिक अनवर (महाराष्ट्र), प्रदीप बालमुचू (झारखंड) और प्रदीप माझी (ओडिशा) शामिल हैं. पुरंदेश्वरी के अलावा अजय माकन को भी कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है.जिन राज्य मंत्रियों को प्रोन्नति मिल सकती है, उनमें सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया और मिलिन्द देवड़ा शामिल हैं. माकन को सूचना प्रसारण मंत्रालय मिल सकता है. शहरी विकास मंत्री कमलनाथ को संसदीय कार्य मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है. इस समय यह मंत्रालय पवन कुमार बंसल के पास है. एक अन्य राकांपा सांसद को कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया जा सकता है. कृषि मंत्री इस समय शरद पवार हैं, जो राकांपा प्रमुख हैं.

मंत्रिमंडलीय फेरबदल के अलावा कांग्रेस में संगठन के स्तर पर भी कई परिवर्तन होने की उम्मीद है. इस्तीफा देने के बाद अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक और सुबोधकांत सहाय ने कहा कि वे पार्टी के लिए काम करेंगे. सोनी कई साल तक कांग्रेस महासचिव रह चुकी हैं. वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की राजनीतिक सचिव भी रही हैं. वासनिक केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस महासचिव दोनों ही जिम्मेदारियां निभा रहे थे. कोल ब्लॉक आवंटन में सहाय विवादों के घेरे में आए थे. उन पर आरोप लगा कि उन्होंने झारखंड की एक कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की है. इस कंपनी में उनके भाई निदेशक हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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