आपकी परेशानियों पर भी हंसा सकने वाले जसपाल भट्टी नहीं रहे..

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लोगों को उनकी परेशानियों पर भी हंसा देने वाले कामेडी किंग जसपाल भट्टी इस दुनिया से रुखसत हो गए.  बुधवार एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया.  उन्होंने टीवी सीरियल उल्टा पुल्टा और फ्लॉप शो के जरिए लोगों के दिलोदिमाग पर अमिट छाप छोड़ी थी.  समाज की परेशानियों और प्रशासन में फैली बुराइयों पर उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली से करारा प्रहार किया था.  वर्ष 2009 के चुनावों के दौरान उन्होंने रिसेशन पार्टी भी बनाई थी.  इस दौरान उन्होंने अपना चुनाव घोषणा पत्र भी जारी किया था.

जानकारी के मुताबिक अभिनेता जसपाल भट्टी अपनी पंजाबी फिल्म पावर कट के लिए बठिंडा गए थे.  बुधवार देर रात वह मोगा से जालंधर के लिए अपनी कार से निकले थे.  उनके एक करीबी के विनोद शर्मा के मुताबिक 57 वर्षीय भट्टी की कार शाहकोट के निकट नाकोदार इलाके में एक पेड़ से टकरा गई.  इस कार को उनके बेटे जसराज भट्टी चला रहे थे.  कार में जसराज भट्टी. जसपाल भट्टी. पावर कट फिल्म की अभिनेत्री सुरिल गौतम समेत चार लोग लोग मौजूद थे.  यह हादसा करीब एक बजे हुआ.  उनकी फिल्म पावर कट शुक्रवार 26 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी.

जसपाल भट्टी अपनी इस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित थे और पिछले कई दिनों से इसकी प्रमोशन में जुटे थे.

उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि देश में लगातार बढ़ती पावर सप्लाई की समस्या को वह बड़े पर्दे पर दिखाना चाहते थे.  इस फिल्म में उनके बेटे बतौर हीरो शामिल थे.  यह फिल्म एक रोमांटिक कॉमेडी है लेकिन इसमें पावर कट की समस्या को बेहतरीन तरीके से कहानी के साथ जोड़ा गया है.

फिलहाल जसपाल भट्टी का पार्थिव शरीर जालंधर के सरकारी अस्पताल में रखा गया है.  यहां उनके शरीर का पोस्टमार्टम करने के बाद उनके परिवार को सौंप दिया जाएगा.  उनके परिवार में उनकी पत्नी सविता. एक बेटा और एक बेटी हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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