राजस्थान सरकार दोहरी नीति अपनाती है भूअवाप्ति मामलों में…

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-बाड़मेर से चन्दन भाटी||

बाड़मेर में आयोजित अनियमित भूमि अवाप्ति के विरोध में कलेक्टर कार्यालय के सामने चल रहा धरना दूसरे दिन भी जारी रहा. धरने में पूरे बाड़मेर जिले से भूमि अवाप्ति से प्रभावित किसान और आमजन भी शामिल रहे और धरने पर लोगो ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सरकार को चेत जाने की चेतावनी भी दी हैं. धरने का प्रतिनिधित्व करते हुए विक्रम सिंह राठौड़ तारातरा ने कहा कि बाड़मेर की जनता देशहित के लिए सभी प्रकार का त्याग करने को तैयार हैं लेकिन पहले सर्कार अपनी नीतियों को स्पष्ट करें कि किसानो की जीवनरेखा के आधार यानी उनकी जमीन को क्यों छीना जा रहा हैं और इस जमीन को सरकार किस उपयोग में लेना चाहती हैं ? उन्होंने कहा कि हमारी मौजूदा राज्य सरकार को दूरगामी परिणामो को ध्यान में रखकर पारदर्शी नीति बनानी चाहिए जिसका समाज के सभी वर्गो को फायदा मिले ना कि किसी पूंजीपति वर्ग को इसका फायदा पहूंचे और गरीब जनता परेशानियाँ उठाएं.
बाड़मेर कलेक्ट्रेट के आगे लीगल मित्र संस्था के बैनर तले चल रहे धरने के दूसरे दिन वहां मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुए संस्था के सचिव रितेश शर्मा ने कहा कि लोगो को जब अवाप्ति सम्बन्धी अधिनियम की बारीकियां समझाई तो लोगो को अपने हक का पता चला उन्होंने कहा कि इस अधिनियम की धारा 4 की अधिसूचना जारी होने के तीस दिन के अन्दर लोगो की आपत्तियाँ मांगी जाती हैं और उसके बाद धारा 5 के तहत जनसुनवाई की जाती हैं.
शर्मा ने कहा कि सरकार दोहरी नीति को अपना कर कार्य कर रही हैं जो किसी भी तरीके से उचित नहीं हैं और इसके प्रभाव गरीब ग्रामीण जनता पर बेहद भयावह पड़ेंगे. उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि राज्य सरकार की जल परियोजना विस्थापित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति की जानकारी भी इस मौके पर आमजनता को दी गई. उन्होंने बताया कि जल परियोजना के लिए भी भूमि इसी कानून के तहत अवाप्त की जाती हैं लेकिन वहां पर धारा चार की अधिसूचना जारी होने के पन्द्रह दिन के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत,  स्थानीय निकाय,  पंचायत समिति, जिला परिषद आदि संस्थाओं को परियोजना के सम्बन्ध में समूर्ण जानकारी एवं दस्तावेज उपलब्ध करवाए जाते हैं ताकि आमजन / प्रभावित जन उन दस्तावेजो के आधार पर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कर सके.
भूमि अवाप्ति के बारे में जानकारी देते हुए शर्मा ने कहा कि राज्य में जल परियोजनाओं के लिए होने वाली अवाप्ति में भूमि मालिकों के अलावा अन्य प्रभावित व्यक्ति को भी पुनर्वास का लाभ दिया जाता हैं,  यहाँ तक कि सरकार विस्थापितों के लिए अपने स्तर पर उनके आवास,  मतदान पहचान पत्र और अन्य आवश्यक सुविधाए भी उपलब्ध करवाती हैं और अट्ठारह वर्ष से ऊपर के युवाओं अथवा अविवाहित कन्या को मुआवजे के लिए योग्य माना जाता हैं और सरकार ने दोहरी और दोगली नीति अपनाते हुए बिना किसी ठोस कारण के बाड़मेर में होने वाली पूर्व में हुई केयर्न,  राजवेस्ट,  गिरल लिग्नाईट प्रोजेक्ट,  जिंदल ग्रुप के भूमि अवाप्ति मामले में ऐसे समानांतर नीति जारी करने से बचती रही हैं जो आमजन के अधिकारों के साथ कुठाराघात हैं. धरने पर दुर्जनसिंह शिवकर,  उदय सिंह बाड़मेर आगौर,  रेवंत सिंह बाड़मेर आगौर, अग्रेंद्र कुमार मेघवाल,  मूलाराम भाम्भू,  वीर सिंह शिवकर,  नारायण सिंह बाड़मेर आगौर,  हाथीसिंह बाड़मेर आगौर,  हठे सिंह रामदेरियाँ,  रतन सिंह चूली,  हनवंत सिंह कवास,   देवेन्द्र सिंह कपूरड़ी,  स्वरूप सिंह कपूरड़ी,  शैतान सिंह कपूरड़ी,  दिलीप सिंह कपूरड़ी,  मोती सिंह कपूरड़ी,  सवाई सिंह,  लक्ष्मण गोदारा  समेत बड़ी संख्या में जिले भर से बड़ी संख्या लोग मौजूद थे.
जनसुनवाई के लिए निशुल्क तैयार होंगे दस्तावेज
बाड़मेर के शिवकर,  कुडला समेत सात गाँवों की भूमि अवाप्ति के लिए होने वाली जनसुनवाई के लिए धरना स्थल पर आपत्तियों के लिए निशुल्क दस्तावेज तैयार करवाए जाने की घोषणा भी की गई हैं,  धरना स्थल पर स्वरूप सिंह आगौर ने बताया कि आगामी 25 अक्तूबर से 29 अक्तूबर तक होने वाली जनसुनवाई के लिए सात गाँवों के लोगो को उनकी भूमि अवाप्ति सम्बन्धित आपत्तियों हेतु दस्तावजो को धरना स्थल पर लीगल मित्र संस्था के द्वारा तैयार करवाया जाएगा ताकि नियम और प्रक्रिया से अनजान ग्रामीण अपनी भूमि के सम्बन्ध में निश्चित प्रक्रिया के तहत आपत्तियां दर्ज करवा सके.
मिला भरपूर समर्थन
बाड़मेर कलक्ट्रेट के आगे चल रहे धरने के समर्थन में एक और जहां काफी जनसमर्थन मिल रहा हैं दूसरी तरफ लोग सरकार की नीतियों को धरना स्थल पर आकर कोसने से भी नहीं चूक रहे हैं,  चूली गाँव से आये ग्रामीणों के एक प्रतिनिधि मंडल ने धरने पर बैठे लोगों और लीगल मित्र संस्था को ज्ञापन सौंपा कर उनके इलाके की जमीन की अवाप्ति बिना ही कब्जा किये जाने का विरोध किया और हाईटेंशन लाईट पोल गाड़ने के मामले को सरकार तक पहुँचने की मांग की और लीगल मित्र संस्था से कानूनी लड़ाई में साथ देने की मांग की वहीँ, कपूरड़ी गाँव के ग्रामीणों ने भी धरना स्थल पर आकर धरने का समर्थन दिया और आगामी रणनीति पर चर्चा में भाग लिया इसके अलावा नागाणा के ग्रामीणों ने भी धरना स्थल पर पहुंच कर धरने में भाग लिया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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