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सैफई में दारोगा की गुंडई…

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सैफई मे मुख्यमंत्री से मिलने आये विकलॉग को दरोगा ने पीटा..2 माह से गुमशुदा पुत्र के लिये न्याय मॉगने आयी विधवा पर टूटा दरोगा का कहर…शराब पीकर कर मुख्य गेट पर कर रहा दरोगा डयूटी…. सीएम की सुरक्षा पर लगा प्रश्न चिह्न…..

-सुघर सिंह||
सैफई (इटावा) सैफई हवाई पट्टी पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात करने आये फरियादियो को एक दरोगा द्वारा जमकर अभद्रता करके भगाया गया. दरोगा ने दोनो पैरो से विकलांग नेत्रपाल को भी नही बख्सा. उसे घसीटते हुये काफी दुर जाकर छोड़ा. और लात घूसे भी चला दिये. इस दरोगा की हरकत को जब एक मीडिया कर्मी ने अपने कैमरे मे कैद किया तो दरोगा द्वारा उस मीडिया कर्मी का कैमरा छीन लिया गया. और कहा गया कि मेरी नेम प्लेट पढ ले मे बसपा सरकार मे फरूखावाद मे 5 साल एस ओ रहा हूँ और इस सरकार मे भी 5 साल एस ओ रहूँगा.
पूरा मामला सैफई हवार्ह पट्टी का है. हवाई पट्टी पर मुख्यमंत्री के आने का कार्यक्रम था. इसकी सूचना मिलने पर कुछ फरियादी अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री से मिलने की उम्मीद लेकर पहॅचे थे. जिनमे एक मैनपुरी जिले का विकलॉग नेत्रपाल पुत्र शिवराम सिहॅ निवासी बैरागपुर अपने इलाज के लिये मदद मॉगने आया था जिसे हवाई पट्टी गेट पर ड्यूटी पर तैनात दरोगा योगेन्द्र पाल शर्मा ने घसीटते हुये काफी दूर ले जाकर पटक दिया.

गुमशुदा पुत्र की तलाश मे पुलिस की हील हवाली की शिकायत करने आयी विधवा सरोजा देवी को मिले लात घूंसे..

दूसरा फरियादी विधवा सरोज देवी निवासी आकलावाद हसनपुर थाना मटसैना जिला फिरोजावाद थी जिनका युवा पुत्र पुष्पेन्द्र 2 माह से गायब है और फिरोजावाद की पुलिस कोई सुनवाई नही कर रही है.इसकी गुहार लगाने मुख्यमंत्री से अपने पुत्र प्रवेन्द्र कुमार के साथ आयी थी लेकिन दरोगा द्वारा उक्त महिला को भी अभद्रता करके गाली देकर भगा दिया. उसके पुत्र ने अपनी मॉ से दरोगा को अपशब्द कहने से रोका तो दरोगा योगेन्द्र पाल शर्मा द्वारा उसके भी दो चार थप्पड जड़ दिये. भगा दिया गया. महिला का आरोप था कि उक्त दरोगा नशे मे है. यही नही इस दरोगा द्वारा इटावा मैनपुरी कन्नौज से आये दर्जनो फरियादियो को धक्के देकर भगाया गया. सभी फरियादियो ने आरोप लगाया कि दरोगा के मुंह से शराब जैसी महक आ रही थी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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