नागरिक अभिनन्दन समारोह या राजनीतिक ताकत दिखाने का आयोजन!

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दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक एवं घुमन्तु जातियों के लोगों ने सत्ता परिवर्तन करने का संकेत दे दिया है…

गत दिनों ‘‘मेवाड़ में बदल रहे है राजनीति के समीकरण’’ नामक शीर्षक से एक लेख लिखा था.  उस लेख के माध्यम से यह बताने की चेष्टा की गई कि मेवाड़ में राजनीति के समीकरण बदल रहे है.  कांग्रेस के वोट बैंक माने जाने वाले दलित, आदिवासी, घुमन्तु एवं अल्पसंख्यक अब कांग्रेस के हाथ से निकलने की तैयारी में है.  इस लेख पर कई लोगों की प्रतिक्रियाएं आई, बहुतों ने टोका भी.  उसी लेख के क्रम में यह लेख है जिसमें मेवाड़ के भीलवाड़ा जिले में हो रही राजनीतिक हलचलों को बताने की चेष्टा की है  . . .

 

-भीलवाड़ा से लखन सालवी||

पिछले कुछ महीनों से राज्य के मेवाड़ अंचल में दलितों, घुमन्तुओं और आदिवासी समाज के बड़े बड़े आयोजन हुए है.  जिनमें इन वर्गों के लोगों ने एकता दिखाई और हजारों की तादाद में इक्कट्ठे होकर राजनीतिक बदलाव की चेतावनी दी है.  यूं तो 3 अक्टूबर को चित्तौड़गढ़ जिले के मंगलवाड़ क्षेत्र में रोड़जी का खेड़ा में आयोजित हुए बंजारा जाति के बड़े सम्मेलन को आध्यात्मिक सम्मेलन का नाम दिया गया, लेकिन वो सम्मेलन आध्यात्मिकता की बजाए राजनीतिक सम्मेलन जैसा था.  वहां कांग्रेस के राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष दिनेश तरवाड़ी भी आए और बंजारा समुदाय के आध्यात्मिक पुरूष रूपसिंह महाराज की शोभायात्रा को सम्बोधित किया.  लेकिन आध्यात्मिक सम्मेलन में पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की उपस्थिति ने समाज के राजनीतिक रूख को स्पष्ट कर दिया.

9 अक्टूबर को भीलवाड़ा के आजाद चौक में हुए विशाल कालबेलिया स्वाभिमान सम्मेलन में तो कांग्रेसी खेमे के सिपाहियों ने कांग्रेस के खिलाफ रणभेरी बजा ही दी थी.  उसके बाद 12 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी के बीकानेर के सांसद अर्जुनराम मेघवाल का भीलवाड़ा में नागरिक अभिनन्दन किया गया.  सांसद मेघवाल जयपुर से सड़क मार्ग से आए.  भीलवाड़ा जिले की सीमा में प्रवेश करने के साथ ही जगह-जगह उनका भव्य स्वागत किया गया.  हर चौराहें पर लोगों ने सांसद मेघवाल को फूलमालाएं पहनाकर तथा मेवाड़ी साफा पहनाकर स्वागत किया.  मेवाड़ के मेहमान के रूप में मारवाड़ के सांसद मेघवाल का इस प्रकार से जगह-जगह स्वागत होने पर भीलवाड़ा की राजनीतिक लोगों में चर्चा का विषय बन गया.

दरअसल सांसद मेघवाल शाहपुरा कॉलेज के छात्रसंघ के पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने आए थे.  इस मौके पर भीलवाड़ा के अखिल भारतीय मेघवंशी महासभा के पदाधिकारियों के अनुरोध पर वे भीलवाड़ा भी आए.

भीलवाड़ा आगमन पर सांसद अर्जुनराम मेघवाल का जगह-जगह दलित व आदिवासी संगठनों व मेघवंशी समाज की ओर से फूलमालाएं पहनाकर व साफे बंधवाकर स्वागत किया गया.  गुलाबपुरा के पास 29 मील चौराहें, सरेरी, नानकपुरा, होटल मिड वे तथा दांता पायरा चौराहें पर लोगों ने गाजे बाजे के साथ बड़े उत्साह के साथ सांसद मेघवाल का स्वागत किया.

29 मील पहुंचने पर सांसद अर्जुन मेघवाल का डगर के संस्थापक भंवर मेघवंशी, संग्रामगढ़ धूणी के अध्यक्ष राजमल त्यागी, अघौरी बाबा धाम के महंत गणेश महाराज, रूपाहेली आश्रम के महामंडलेश्वर सत्यप्रकाश त्यागी, अखिल मेघवंशी (सालवी) महासभा सेवा संस्थान आसीन्द के अध्यक्ष बहादुर मेघवंशी, समाजसेवी कालूराम डांगी, पार्षद दुर्गेश मेघवंशी व आसीन्द बार एसोसियशन के अध्यक्ष एडवोकेट दौलतराज नागौड़ा, अमित त्यागी, प्रहलाद राय मेघवंशी एवं रोशन मेघवंशी इत्यादि ने माला पहनाकर व साफा बंधवाकर भव्य स्वागत किया.

वहीं सरेरी चौराहें पर शुद्र सेवा संस्थान के अध्यक्ष गोपाल लालावत, सुखदेव मेघवंशी, जिला महासचिव देवी लाल मेघवंशी सहित आम चौखला मेघवंशी समाज के लोगों ने साफा बंधवाकर स्वागत किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपें.  इसी प्रकार नानकपुरा चौराहें पर पुष्कर मेघवंश महासभा के जिलाध्यक्ष नाथुलाल मेघवंशी, जिला उपाध्यक्ष राजकुमार बादल तथा प्रभुलाल मेघवंशी के नेतृत्व में स्वागत किया गया.  दांता पायरा पहुंचने पर पूर्व प्रधान गजराज सिंह राणावत, रघुनाथ गुर्जर, महिपाल वैष्णव, सुखलाल तथा नन्दराम धिरोतिया आदि ने साफा बंधवाकर स्वागत किया.

उसके बाद सांसद मेघवाल शाहपुरा गए और श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्रसंघ के निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ-ग्रहण कार्यक्रम में शिरकत की.  उसके बाद वो भीलवाड़ा पहूंचे जहां अम्बेडकर सर्किल पर भव्य स्वागत किया गया.  यहां सांसद मेघवाल ने डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति को फूलमाला पहनाई.  उसके बाद भीलवाड़ा की गजाधर मानसिंहका धर्मशाला में आयोजित नागरिक अभिनन्दन समारोह में शिरकत की.  गजाधर मानसिंहका धर्मशाला में अखिल भारतीय मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष भवानीराम मेघवंशी व दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) सहित कई दलित संगठनों द्वारा सांसद मेघवाल का स्वागत किया गया और अखिल भारतीय मेघवंशी महासभा व डगर द्वारा सांसद मेघवाल को ‘‘नागरिक अभिनन्दन पत्र’’ व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया.

नागरिक अभिनन्दन समारोह को सम्बोधित करते हुए सांसद मेघवाल ने कहा कि आजादी के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों से जुड़े विभिन्न जातियों के लोग नेता बनते आ रहे है.  बाबा साहेब अम्बेडकर ने व्यवस्था ही ऐसी कर दी कि सभी वर्गों के लोगों को नेता बनने का मौका मिल रहा है.  लेकिन मुझे दुःख होता है यह जानकर कि लोग नेता बनने के बाद अपने ही समाज के लोगों को भूल जाते हैै तथा समाज से कट जाते है.  लेकिन मैंनें नेता बनने के बाद तय कर लिया था कि मैं कभी भी समाज से नहीं कटूंगा, समाज से जुड़ा रहूंगा.  आज में समाज के लोगों से मिलता हूं, भजनों में जाता हूं और समाज के लोगों से चर्चा करके चिन्तन करता हूं और चिन्तन करके बनाए गए सिद्धान्तों पर चलता हूं.

सांसद मेघवाल ने कहा कि हर नेता को समाज हित की कसौटी पर परखना चाहिए और खरा उतरने पर ही उसे सम्मान देना चाहिए.  उन्होंने कहा कि सांसद चुनाव को 3 वर्ष बीत चुके है भीलवाड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने इतने साल तक मुझे कसौटी पर परखा और मैं खरा पाया गया तो आज मेरा सम्मान किया जा रहा है.

सांसद मेघवाल ने बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए समारोह में आए लोगों से आव्हान् किया कि वे संगठित होकर बाबा साहब अम्बेडकर के सिद्धान्तों पर चले.  बीकानेर के सांसद अर्जुनराम मेघवाल का नागरिक अभिनन्दन गजाधर मानसिंहका धर्मशाला में किया गया.  ये अभिनन्दन दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) एवं अखिल भारतीय मेघवंशी महासभा तथा अजा/जजा के विभिन्न संगठनों की ओर से किया गया. उल्लेखनीय है कि पूर्व आईएएस बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल को सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से नवाजा गया था.  उन्हें सांसद रत्न अवार्ड भी दिया गया.

इस अवसर पर डगर के संस्थापक सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने दलितों की परस्पर एकता पर जोर दिया तथा जिले के दलितों व आदिवासियों का आह्वान् किया कि वे प्रजातंत्र में अपने वोट की ताकत पहचानें.

समारोह को बनेड़ा के पूर्व प्रधान गजराज सिंह ने भी संबोधित किया.  उन्होंने कहा कि यह सामाजिक कार्यक्रम है न कि किसी प्रकार का राजनीतिक कार्यक्रम.  उन्होंने कहा कि सभी जातियों को साथ लेकर चलने वाला ही सफलता को प्राप्त करता है.  समय बदल चुका है अब ना कोई दलित है और ना कोई ठाकुर, सब एक है.

समारोह को अखिल राजस्थान अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी कर्मचारी सयुक्त महासंघ के प्रदेश महासचिव दुर्गालाल बारेठ एवं पेंशनर्स एसोसियशन के डॉ. दीपचन्द सोलंकी, अर्जुन दुखाडिया, बंजारा समुदाय के राजकुमार बंजारा, कालबेलिया अधिकार मंच राजस्थान के प्रदेश संयोजक रतननाथ कालबेलिया, शुद्र सेवा संस्थान, भारतीय कपास निगम के रमेश वर्मा, अम्बेड़कर भीम परिषद एवं खटीक समाज के डॉ. जगदीश खटीक, सत्यप्रकाश खोईवाल, अमृत खोईवाल, एडवोकेट मदनगोपाल पुरोहित ने सम्बोधित किया.

आमजन जहां इस समारोह को केवल एक समारोह के रूप में आंक रहे है लेकिन राजनीतिक गलियारों (मुख्यधारा की दोनों ही पार्टियों) में सांसद मेघवाल के इस धुंआधार एक दिवसीय दौरे को लेकर भारी चिंताएं है.  बहरहाल कांग्रेस व भाजपा खेमें के लोग अभी तक तो यहीं पता लगाने की कोशिश कर रहे है कि आखिर मेघवाल को भीलवाड़ा जिले में बुलाने के पीछे किसका हाथ है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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