भ्रष्टाचार का पाताल तोड़ स्रोत है एनजीओ

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-देवेश शास्त्री||

आज कल कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के एनजीओ जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के गोरखधंधे को लेकर बवाल मचा हुआ है। पूरा देश इस विन्दु पर दो-दो हाथ होते केजरीवाल-खुर्शीद को ‘न्यूज चैनलों’ के माध्यम से टकटकी लगाकर देख रहा है। केजरीवाल ने पहली नबंबर को सलमान खुर्शीद के निर्वाचन क्षेत्र फर्रुखाबाद में शंखनाद करने का ऐलान क्या किया। नवाब खुर्शीद धमकी भरे अंदाज में बोले-“आकर तो दिखायें फर्रुखाबाद।” वे स्वयं अपनी वास्तविकता इस खीज से उजागर कर रहे हैं। यह पूरा ड्रामा एनजीओ के सहारे किये जाने वाले गोरखधंधे को लेकर है।

नायक बने अरविन्द केजरीरवाल के इर्द-गिर्द तिरंगा लहराने से लेकर पल्ली विछाने और पर्चे बांटने तक देश भर के हम सरीखे सभी कार्यकर्ता एनजीओ संचालक हैं, जो ये करते हैं वही उन्होंने किया, फिर तमाशा क्यों? सलमान खुर्शीद तो केन्द्रीय मंत्री हैं, जो कछु करें उन्हें सब छाजा।

खुर्शीद के साथी बेनी प्रसाद ने तो रेट कार्ड ही जारी कर दिया है-केन्द्रीय मंत्री के ‘पद कद’ के लिहाज से 71 लाख कोई रकम ही नहीं है। बहरहाल कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को अपने पद का प्रयोग करते हुए देश भर के एनजीओज के दस्तावेज तलब करके पोल सरकारी स्तर पर खोलते हुए दंडित करना शुद्व कर दें। सबसे पहले आईएसी के ऊपर से नीचे तक के कार्यकर्ताओं पर शुरूआत करें। मेरा भी एक एनजीओ है , इष्टिकापुरी अकादमी। एक समर्थवान केंद्रीय मंत्री का धमकी देना फर्रुखाबाद आकर दिखाओ। मंत्री जी की अर्हता प्रकट करता है।

 

देश भर के एनजीओज के दस्तावेज और लेखा-जोखा खंगालने में भेदभाव न हो। सभी जन- प्रतिनिधियों और लोक सेवकों ने विना भेदभाव के समान भाव से कर्तव्य निर्वाह की शपथ ली है। मेरी सलाह रत्ती भर भी नहीं मानी जा सकती। एनजीओ भ्रष्टाचार के पाताल तोड़ स्रोत हैं। बहुतेरे सामाजिक कार्यकर्ता तो जनहित साधना की एकाग्रता के लिए एनजीओ का पंजीयन कराकर मिशनरी साधना में लगे हैं। स्वार्थ और महत्वाकांक्षा में फंसे लोग इस पाताल तोड़ स्रोत से जमकर दोहन कर रहे है, ऐसे लोगों की तादात 99.999 फीसदी हो सकती है।

व्यंग्यचित्र: मनोज कुरील

अनुमान-प्रमाण यह है कि मंत्री, नेता, अधिकारी, कर्मचारी, जज, वकील, शिक्षक आदि ऐसे लोग जो शासन के अंग हैं, अधिकांश एनजीओ के सहारे वारे न्यारे कर रहे है। कार्यपालिका व न्याय पालिका से सम्बद्ध व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप एनजीओ में जरूर नहीं हैं मगर परोक्ष रूप से मां, बाप, पति-पत्नी, संतान रिश्तेदार अथवा मित्र के नाम पर इस पाताल तोड़ स्रोत वोरिंग के माध्यम से सराबोर हैं। केंद्र सरकार हो राज्य सरकारें कोई भी एनजीओ रूपी स्रोत बंद कराना तो दूर उनकी पड़ताल करने की भी नहीं सोचेंगे। यदि पड़ताल हो जाये तो मजा आ जाये। विदेशों में जमा कालेधन से ज्यादा बड़े गोरखधंधों का खुलासा हो जायेगा। प्रत्येक सरकारी काम एनजीओ के माध्यम से ही होता है वह भी अपने खास को दे दिया जाता है। अब तक जितने घपले सामने आये हैं या सामने आयेंगे उनका संबंध कहीं न कहीं एनजीओज से जुड़े हैं। मेरा राष्ट्रपति जी से करबद्ध निवेदन है कि देश भर के अनंत एनजीओज की पड़ताल कराकर सभी को समाप्त करा दें और रिकवरी करादें, ताकि देश फिर सोने की चिड़िया बन सके।

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