लुईस खुर्शीद ने गबन के आरोपों को झूठ बताया..

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वैशाखी घोटाले के आरोपों से घिरे कानून मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद ने उनके गैर सरकारी संगठन पर लाखों रुपये का गबन करने का आरोप लगाने पर अरविंद केजरीवाल एवं टीवी चैनलों की आलोचना की. उन्होंने आरोपों को झूठा बताया है.

लुईस खुर्शीद ने शनिवार को कहा, हमारे दस्तावेज जांच के लिए खुले हैं. उनके सभी आरोपों का हम प्रतिवाद करते हैं. हमारे पास सभी के बिल हैं और उनके आरोपों के तथ्य एवं आंकड़े झूठे हैं.

लुईस ने कहा कि इलज़ाम लगाने वालों को केवल तीन लोग मिले जिन्होंने कहा कि उन्हें उपकरण नहीं मिले. अगर हमने इतने बड़े पैमाने पर घोटाला किया होता तो क्या उन्हें हजारों लोग नहीं मिलते? हमने 2009 एवं 2010 में 2353 लोगों में उपकरण  वितरित किए और हजारों में से केवल तीन आरोप लगे.

न्यायालय के सूत्रों के अनुसार लुईस खुर्शीद ने दिल्ली उच्च न्यायालय में टीवी टूडे समूह के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि को मामला भी दायर किया है.

समूह के टीवी चैनल के अनुसार केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने लुईस के संगठन जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट को 71.50 लाख रुपये ट्राइ साइकिल एवं सुनने में सहायक उपकरण जरूरतमंदों में वितरित करने के लिए दिए थे.

सलमान खुर्शीद इस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं लुईस परियोजना निदेशक हैं.

सलमान खुर्शीद की गिरफ्तारी की मांग करने वाले अरविंद केजरीवाल की आलोचना करते हुए लुईस ने उन्हें लाभ के लिए मामला खड़ा करने वाला कहा.

लुईस ने कहा, वह अब सामाजिक कार्यकर्ता नहीं रहे. वह एक राजनीतिक दल चला रहे हैं और वह मुद्दों की तलाश कर रहे हैं. मुझे दुख होता है कि वह विकलांगों का प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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