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भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन पर विचार..

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-शिवनाथ झा||

प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने आज इशारा किया की केंद्र सरकार देश में मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन पर विचार कर रही है, ताकि इसमें मौजूद खामियों को दूर किया जा सके और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके.

 

डॉ सिंह आज सीबीआई और राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के19वें सम्मेलन के उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन पर विचार कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में ईमानदार अधिकारी और कर्मचारी बेवजह परेशान न हों जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति बख्शे न जाएं. इसके लिए मौजूदा कानून में संशोधन की आवश्यकता है.

वैसे अन्य वर्षों की तरह प्रधान मत्री (चाहे कोई भी रहे हों) के भाषण में कोई “विचारणीय तथ्य नहीं थे, परन्तु डॉ सिंह का यह स्वीकारना कि मौजूदा संबंधित कानून में कई खामियां हैं और इसमें संशोधन का इरादा न केवल न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से बल्कि विधिक स्तर पर अनेक गड़बड़ियों को दूर करने के लिए आवश्यक है, अपने आप में एक बड़ी बात थी. उन्होंने इस कानून को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिहाज से भी संशोधन को जरूरी करार दिया.

वर्तमान “भ्रष्टाचार युद्ध” के बारे में प्रधान मंत्री का मानना है की आज देश में जो माहौल बनाया जा रहा है वह सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए प्रतिकूल हैं. डॉ सिंह का मानना है  की “भ्रष्टाचार की समस्या से हर तरीके से निपटने के प्रति सरकार की प्रतिबद्ध है और मैं ईमानदार अधिकारियों को संरक्षित करने तथा उनका मनोबल ऊंचा रखने पर जोर देना चाहूंगा. साथ ही, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देश में नकारात्मकता और निराशावाद का जो लापरवाह माहौल बनाया जा रहा है, उससे हमारा भला नहीं हो सकता. इससे न केवल हमारे देश की छवि खराब होगी बल्कि कार्यपालिका का मनोबल भी गिरेगा.”

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि भ्रष्टाचार के नाम पर निर्दोष लोगों का उत्पीडन नहीं हो. हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में बड़ी व्यावसायिक कंपनियों के संलिप्त होने के खुलासे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि घूस लेने ही नहीं बल्कि घूस देने को भी भ्रष्टाचार की परिभाषा के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है.

सिंह ने कहा कि ऐसे अनेक उदाहरण सामने आए हैं कि ज्यादातर मामलों में घूस देने वाला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों का सहारा लेकर बच निकलता है और प्रस्तावित संशोधन में इस बात का ध्यान रखा जाएगा.

मुद्दत हो गए थे सुने हुए कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो को अपराधों की तहकीकात में राज्यों के एंटी करप्शन ब्यूरो से समर्थन अब मिल रहा है. आज दशकों बाद केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक श्री अमर प्रताप सिंह ने अधिकारिक तौर पर कहा और यह भी कहा कि इस सहयोग की प्रक्रिया को यदि और सबल बनाया जाय तो आने वाले दिनों में इससे बहुत फायदे होंगे. श्री सिंह ने यह भी कहा कि ‘सरकारी निष्पादन प्रक्रिया’ को भी और सबल बनाना होगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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