बेख़ौफ़ अपराधी नहीं बल्कि हमारी पुलिस है…

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-अनुराग मिश्र||

पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही चोरी, राहजनी और छेड़ छाड़ की घटनाओ ने राजधानी में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी है और पुलिस की कार्यकुशलता को सवालो के घेरे में खड़ा कर दिया है. अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके है कि वो दिन दहाड़े सरे-राह राहजनी और छेड़छाड़ करने से भी नहीं चूकते. अभी दो दिन पहले ही एक युवक ने एक युवती सरे राह कैसरबाग बदतमीजी की गयी और उसके कपडे तक फाड़ डाले गये . पीड़ित युवती ने जब खंदारी बाजार पुलिस चौकी में मुकदमा दर्ज कराना चाहा तो पुलिस ने उसे टरका दिया. इसी तरह चोरी और राहजनी की घटनाये भी लगातार बढती जा रही है पर राजधानी पुलिस सिवाए घडयाली आसू बहाने के कुछ भी नहीं कर पा रही है.  ऐसा तब हो रहा जब यहाँ  दो – दो तेज़ तरार आई.पी.एस अधिकारियो की नियुक्ति की गयी है एक हमारे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और दूसरे पुलिस उप महानिरक्षक. कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हमारे एस.एस.पी महोदय ने मोटरसाइकिल पर क्यू.आर.टी का भी गठन कर दिया है फिर भी अपराधो के कमी नहीं आ रही है.

गुप चुप तरीके से पुलिस के अधिकारी यह कहते की अखिलेश सरकार में अपराधियों के अन्दर से पुलिस का डर ख़त्म हो जाता है जबकि वास्तविकता ये है कि अपराधियों में भले ही डर खत्म होता हो या न होता हो पर हमारे पुलिस अधिकारियो के मन से सत्ता का डर का जरुर ख़त्म हो जाता है जिसके चलते ये अधिकारी कानून व्यवस्था के प्रति लापरवाह हो जाते है.  यही बात हमारी राजधानी पुलिस पर लागू हो रही है अब यहाँ की  पुलिस में सत्ता को वो डर नहीं रहा जो पूर्ववर्ती माया सरकार के शासन काल में था.  पूर्ववर्ती माया सरकार के कार्यकाल में  लखनऊ पुलिस पूरे तन मन से राजधानी की कानून व्यवस्था का मजबूत किये हुए थी और छुटपुट घटनाओ को छोड़ दिया जाये तो शायद ही छेड़खानी और राहजनी की कोई बड़ी घटना हुई हो.  इसके पीछे कारण ये था कि तब यहाँ तैनात होने वाले अधिकारियो में अपराध ग्राफ बढ़ने पर कार्यवाही होने डर रहता था इसीलिए वे किसी भी कीमत पर कानून वयवस्था को बिगड़ने नहीं देते थे और छोटी से छोटी घटना को भी गंभीरता से लेते थे. सत्ता का यही डर इस सरकार के शासन काल में पुलिस के पर नहीं दिखा रहा है पुलिस छोटी घटनाओ की तो बात छोड़िये बड़ी घटनाओ पर भी जल्दी कार्यवाही नहीं करना चाहती.
इसलिए आवश्यक है कि अखिलेश सरकार सबसे पहले राजधानी की कानून व्यवस्था को मजबूत करे क्योकि जब घर मजबूत बनेगा तभी राज्य मजबूत बनेगा.  उन्हें शहर में बढती हुई घटनाओ को संज्ञान में लेते उच्च स्तर पर निलंबन से लेकर स्थानांतरण की कार्यवाही करनी चाहिए, सिर्फ निर्देशों को जारी कर देने से बे-खौफ हो चुके हमारे पुलिस अधिकारियो पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. अब ये समय की मांग अखिलेश को कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाये और जिलेवार अधिकारियो की जिम्मेदारी सुनिश्चित करे साथ में यह सन्देश भी दे कि यदि उनके क्षेत्र में अपराध की घटनाये बढ़ी तो उनपर कार्यवाही निश्चित है.यकीन मानिये कुछ ही समय में राजधानी सहित पूरे राज्य कि कानून व्यवस्था मजबूत हो जायेगी क्योकि डर बहुत बड़ी बला है ये अच्छे अच्छो को सुधार देती है.

(अनुराग मिश्र , तहलका न्यूज- लखनऊ के उपसंपादक हैं. उनसे मो – 93899990111 के ज़रिये संपर्क किया जा सकता है)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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