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बेशर्मी की हद होती है पर जिनका शर्म से कोई वास्ता ही न हो…

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चाहे देश को बेच डालें या फिर कालेधन के बंदोबस्त में आम जनता के खिलाफ चांदमारी करें, राजनीति की पिच पर जमे खिलाड़ियों को कोई माई का लाल उखाड़ने वाला नहीं! 

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम और घोटालो का परिणति देखिये. पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री एवं 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मुख्य अभियुक्त ए. राजा और राष्ट्रमंडल खेल घोटाले के अभियुक्त सुरेश कलमाड़ी को संसद की दो विभिन्न स्थायी समितियों का सदस्य बनाया गया है. गौरतलब है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में राजा को पिछले साल 2 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और वह इस साल 15 मई से जमानत पर रिहा हैं. कलमाड़ी को भी नौ महीने तक जेल में रहने के बाद इस साल 19 जनवरी को जमानत पर रिहा किया गया था.

यही नहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कोयला घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच का हवाला देते हुए कोयला खान आवंटन से जुड़ी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत देने से इनकार किया है. सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत दाखिल एक सवाल के जवाब में पीएमओ ने जांच का उल्लेख कर जानकारी देने से इन्कार कर दिया है. पीएमओ ने कहा है कि मामले में मौजूदा सीबीआई जांच को ध्यान में रखते हुए आरटीआई कानून की धारा 8 (1) (एच) के संदर्भ में सूचना का खुलासा फिलहाल रोका जा सकता है. कानून की यह धारा के तहत यदि किसी सूचना के प्रकट करने से जांच प्रक्रिया या दोषियों के अभियोजन में संभावित अड़चन आ सकती है तो उसे रोका जा सकता है.वकील विवेक गर्ग ने आरटीआई के तहत कोयला खान आवंटन के संबंध में केंद्रीय कोयला मंत्री तथा प्रधानमंत्री के बीच सभी बैठकों का ब्यौरा, फैसलों, मंजूरियों तथा कोयला मंत्रालय तथा पीएमओ के बीच अन्य संवाद या पत्रों की प्रतियां मांगी थी.

द्रमुक के लोकसभा सदस्य ए. राजा को ऊर्जा पर संसद की स्थायी समिति के लिए मनोनीत किया गया है, जबकि कांग्रेस के लोकसभा सदस्य कलमाड़ी को विदेशी मामलों की स्थायी समिति के लिए मनोनीत किया गया है. इनके अलावा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कुछ मामलों की अभियुक्त द्रमुक सांसद कानिमोझी को भी गृह मामलों की स्थायी समिति के लिए मनोनीत किया गया है. मालूम हो कि संसद की स्थायी समितियां विधेयकों का निरीक्षण कर संबंधित मंत्रालयों को प्रस्तावित कानून के बारे में सुझाव देती हैं.

विभिन्न समितियों के पुनर्गठन के तहत कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को भी वित्त से संबंधित संसद की स्थायी समिति का सदस्य बनाया गया है, जिसके अध्यक्ष भाजपा नेता यशवंत सिन्हा हैं. इससे पहले राहुल मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित समिति के सदस्य थे.

द्रमुक के तिरुची शिवा को उद्योग से संबंधित स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बसपा बसपा के ब्रजेश पाठक को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण संबंधी स्थायी समिति के सदस्य रह चुके बसपा नेता दारा सिंह चौहान को श्रम संबंधी समिति में स्थानांतरित किया गया है. धनशोधन के मामलों में रांची कारागार में बंद निर्दलीय सांसद मधु कोड़ा को किसी भी समिति का सदस्य नहीं बनाया गया है.

 

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “बेशर्मी की हद होती है पर जिनका शर्म से कोई वास्ता ही न हो…

  1. सरकार को सिवाय इन्हें देने के और आप कर ही क्या सकते हैं ,जब चोरों का जमावड़ा हो तो इमानदारों की कौन सुनेगा.सतारूढ़ गठबंधन की कितनी मज़बूरी है किउसके पास साफ़ छवि का और कोई नेता ही नहीं.यह इस बात का भी संकेत है कि सरकार अब भी उन्हें गलत नहीं मानती,और ऐसा करने वालों को इस प्रकार पद दे कर,अन्य लोगों को भी यही करने को प्रेरित कर रही है. यह इस बात का भी प्रतीक है कि वह तानाशाही तरीके से कम कर रही है,जनता की या लोकमत कि कोई परवाह नहीं. धन्य है कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकार,इस पर तुर्राह यह की हम इमानदार हैं.

  2. सरकार को सिवाय इन्हें देने के और आप कर ही क्या सकते हैं ,जब चोरों का जमावड़ा हो तो इमानदारों की कौन सुनेगा.सतारूढ़ गठबंधन की कितनी मज़बूरी है किउसके पास साफ़ छवि का और कोई नेता ही नहीं.यह इस बात का भी संकेत है कि सरकार अब भी उन्हें गलत नहीं मानती,और ऐसा करने वालों को इस प्रकार पद दे कर,अन्य लोगों को भी यही करने को प्रेरित कर रही है. यह इस बात का भी प्रतीक है कि वह तानाशाही तरीके से कम कर रही है,जनता की या लोकमत कि कोई परवाह नहीं. धन्य है कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकार,इस पर तुर्राह यह की हम इमानदार हैं.

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