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एनडीटीवी ग्रुप में कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं, लेकिन पिछले दिनों विवादों के केंद्र में रही बरखा दत्त की ‘कुर्सी’ पर कोई खतरा नहीं है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अभी बरखा अंग्रेजी न्यूज़ की ग्रुप एडिटर के तौर पर काम करती ही रहेंगी। ग्रुप के बोर्ड मीटिंग में शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण पदों पर कंपनी के ही पुराने लोगों को बिठाया गया है।

गौरतलब है कि 2G स्पेक्ट्रम घोटाले में बरखा का नाम खासा विवादों में आ गया था जब उनकी कॉर्पोरेट लॉबीस्ट नीरा राडिया के साथ बातचीत के टेप जारी हुए थे। मीडिया में बरखा दत्त की भारी आलोचना हुई थी और इंडिया गेट पर तो एक बार उन्हें आम लोगों ने हूट कर भगा दिया था। इतना ही नहीं, हाल ही में उनके ही शो में ही स्वामी अग्निवेश ने मीडिया करप्शन पर एक सवाल पूछकर उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर दिया था।

लेकिन कहा जा रहा है कि ग्रुप ने इतनी शर्मिंदगी उठाने के बावजूद बरखा की ही तरफदारी करने का फैसला किया है। सूत्रों की मानें तो प्रणॉय रॉय ने माना है कि बरखा को अभी हटाना ग्रुप की बची-खुची साख भी खत्म कर देगा क्योंकि वह इस मुद्दे पर अब तक अपना बचाव करते आए हैं। अगर अभी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तो इसका संकेत यह जाएगा कि अब तक बरखा के किए पर पर्दा डाला जा रहा था।

बरखा दत्त के कुछ बड़े कॉरपोरेट घरानों से अच्छे संबंध हैं जिनके करोड़ों के विज्ञापन ग्रुप के चैनलों पर चल रहे हैं। कहा ये भी जा रहा है कि बरखा ने इन कॉरपोरेट घरानों से अपने लिए मैनेजमेंट पर दबाव तो डलवाया ही, साथ ही यह भी संकेत दिए कि अगर उसे हटाया गया तो वह ये विज्ञापन रुकवा देगी। ऐसे में एनडीटीवी बरखा को छेड़ कर नुकसान करने के लिए तैयार नहीं था।

इसके अलावा एनडीटीवी में कई और परिवर्तन हुए हैं। एनडीटीवी के ग्रुप सीईओ केवीएल नारायण राव को एक्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनाया जा गया है जबकि विक्रम चंद्रा को ग्रुप सीईओ का पद दिया गया है।

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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