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पाठकों की अरुचि बढ़ गयी पत्रिकाओं में…

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इंडियन रीडरशिप सर्व (आईआरपएस) २०१२ के दूसरी तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक टाप 10 में से 7 हिंदी पत्रिकाओं के पाठक घटे हैं. एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार दूसरी तिमाही में सरस सलिल, मेरी सहेली, क्रिकेट सम्राट, इंडिया टुडे, गृहलक्ष्मी, गृहशोभा और चंपक के पाठकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है. सरस सलिल के पाठकों की संख्या में 53 हजार की कमी आई है. प्रतियोगिता दर्पण हिंदी पत्रिकाओं के बीच अग्रणी बनी हुई है और इसके पाठकों भी बढ़े हैं. 2012 के पहली तिमाही के पाठकों की संख्या 18 लाख 93 हजार से बढ़कर, एवरेज इश्यू रीडरशिप के मुताबिक दूसरी तिमाही में 19 लाख 18 हजार हो गई है. निरोगधाम के पाठकों की संख्या में 3 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और दूसरी तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 7 लाख 50 हजार हो गई है.

सामान्य ज्ञान दर्पण के पाठकों की संख्या में दूसरी तिमाही में पहली तिमाही की अपेक्षा में 20 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, 16 लाख 44 हजार थी वहीं अब बढ़कर यह 16 लाख 64 हजार हो गई है. 2012 की पहली तिमाही में सरस सलिल के पाठकों की संख्या 16 लाख 1 हजार थी वहीं दूसरी तिमाही में इसके पाठकों की संख्या घटकर 15 लाख 48 हजार हो गई है.

मेरी सहेली के पाठकों की संख्या में दूसरी तिमाही में 67 हजार की कमी दर्ज की गई है.  पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या 12 लाख 59 हजार थी वहीं दूसरी तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 11 लाख 92 हजार हो गई है. क्रिकेट सम्राट के पाठकों की संख्या पहली तिमाही के पाठकों की संख्या 11 लाख 76 हजार से घटकर 11 लाख 35 हजार रह गई है. इंडिया टुडे के पाठकों की संख्या में भी पहली तिमाही के मुताबिक भारी कमी दर्ज की गई है. पहली तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 15 लाख 1 हजार थी जो दूसरी तिमाही में घटकर 10 लाख 1 हजार रह गई है.

गृहलक्ष्मी के पाठकों की संख्या में भी पहली तिमाही के मुताबिक 45 हजार की कमी दर्ज की गई है। पहली तिमाही में गृहलक्ष्मी के पाठकों की संख्या जहां 9 लाख 58 हजार थी वहीं अब यह घटकर 9 लाख 13 हजार रह गई है. गृह शोभा (आठवें) और चंपक (नौंवे) के पाठकों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है. गृहशोभा के पाठकों की संख्या दूसरी तिमाही में 8 लाख 43 हजार और चंपक की पाठक संख्या 7 लाख 62 हजार रह गई है.

अंग्रेजी पत्रिकाओं की बात करें तो 10 में से 6 अंग्रेजी मैगजीन के पाठकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है. इंडिया टुडे, अंग्रेजी मैगजीन में अग्रणी बना हुआ है लेकिन इसके पाठकों की एवरेज इश्यू रीडरशिप संख्या में दूसरी तिमाही में कमी दर्ज की गई है. पहली तिमाही में, जहां इसके पाठकों की संख्या 16 लाख 13 हजार थी वहीं अब घटकर यह 15 लाख 54 हजार रह गई है.

दूसरी तिमाही में, जिन अंग्रेजी पत्रिकाओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है उनके नाम हैं – रीडर्स डाइजेस्ट, आउटलुक, प्रतियोगिता दर्पण, द वीक और विज़डम,  जनरल नॉलेज टुडे, कंपीटीशन सक्सेस रिव्यू, स्टारडस्ट और बिजनेस टुडे के पाठकों की संख्या में 2012 की दूसरी तिमाही में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.  जनरल नॉलेज टुडे 10 लाख 87 हजार पाठकों की संख्या के साथ, अंग्रेजी पत्रिकाओं के बीच दूसरे स्थान पर काबिज है, पहली तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 10 लाख 86 हजार थी.

रीडर्स डाइजेस्ट के पाठकों की संख्या में इस तिमाही में 34 हजार की कमी आई है. दूसरी तिमाही में, जहां इसके पाठकों की संख्या 10 लाख 9 हजार है वहीं पहली तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 10 लाख 43 हजार थी. इस बीच, कंपीटीशन सक्सेस रिव्यू के पाठकों की संख्या में 14 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दूसरी तिमाही में, इसके पाठकों की संख्या 7 लाख 19 हजार है वहीं पहली तिमाही में यह 7 लाख 5 हजार थी.

आउटलुक के पाठकों की संख्या इस तिमाही में 4 लाख 92 हजार से घटकर 4 लाख 83 हजार रह गई है. प्रतियोगिता दर्पण के पाठकों की संख्या में भी इस वर्ष कमी दर्ज की गई है. पहली तिमाही में, जहां इसके पाठकों की संख्या 4 लाख 46 हजार थी वहीं अब घटकर 4 लाख 31 हजार रह गई है.  स्टारडस्ट के पाठकों की संख्या में 5 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पहली तिमाही में, जहां इसके पाठकों की संख्या 4 लाख 11 हजार थी वहीं अब दूसरी तिमाही में यह संख्या बढ़कर 4 लाख 16 हजार रह गई है. बिजनेस टुडे आठवें स्थान पर और द वीक नौवें स्थान पर है.

बिजनेस टुडे के पाठकों की संख्या में दूसरी तिमाही में 11 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 40 लाख 8 हजार हो गई है जबकि द वीक के पाठकों की संख्या में 21 हजार की कमी आई है और यह दूसरी तिमाही के एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, 39 लाख 70 हजार रह गई है. विज़डम के पाठकों की संख्या में भी पहली तिमाही के मुताबिक 6 हजार की कमी दर्ज की गई है. पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या 35 लाख 9 हजार थी वहीं अब दूसरी तिमाही में यह घटकर 35 लाख 3 हजार रह गई है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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