पीलीभीत में पुलिस का कारनामा, मददगार पत्रकार को ब्लैकमेलर बना जेल भेजा

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पीलीभीत में पुलिस ने फोटोग्राफर को जेल भेजा :

एफआईआर में नाम न होने के बावजूद कार्रवाई :

पत्रकारों में रोष, कहा- फर्जी फंसा रही है पुलिस :

बारहवीं की छात्रा की मदद कर रहा था फोटोग्राफर साकेत :

पुलिस ने छात्रा को धमकाया, बयान बदला तो वेश्‍यावृत्ति में फंसायेगी :

पीलीभीत में पुलिस ने दैनिक जागरण और अमर उजाला के एक पूर्व फोटोग्राफर साकेत सक्सेना को एक छात्रा का अश्‍लील एमएमएस बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि एक फोटो पत्रकार एक छात्रा का एमएमएस बना कर उसे ब्‍लैकमेल करना चाहता था।

उधर इस घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में खासा रोष है। पत्रकारों का कहना है कि पकडा गया पत्रकार ब्‍लैकमेल करने वाले शख्‍स को पकडवाने में उक्‍त छात्रा की मदद कर रहा था जबकि पुलिस ने उसे फर्जी फंसा दिया। पत्रकारों का तो यहां तक कहना है कि पीडित छात्रा भी उक्‍त पत्रकार के पक्ष में बयान देना चाहती है लेकिन पुलिसवालों ने छात्रा को ऐसा करने पर वेश्‍यावृत्ति के मामले में फंसाने की धमकी दी है।

पीलीभीत पुलिस ने दैनिक जागरण और अमर उजाला के फोटोग्राफर रहे साकेत सक्‍सेना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साकेत पर आरोप है कि उन्‍होंने एक छात्रा का अश्‍लील एमएमएस बनाया और उसे ब्‍लैकमेल करने की धमकी दे रहा था। लेकिन हैरत की बात है कि छात्रा ने पुलिस में दर्ज करायी गयी अपनी रिपोर्ट में साकेत का नाम नहीं लिया है।

दरअसल, कुछ दिन पहले शहर के एक कालेज में पढने वाली बारहवीं की एक छात्रा का एक युवक ने अश्‍लील एमएमएस बनाया था। वह उस एमएमएस जारी न करने के लिए पांच लाख रूपये मांग रहा था। छात्रा का आरोप है कि पांच लाख रूपये न मिलने पर वह इस एमएमएस को यू-ट्यूब पर डालने के अलावा उसे दूसरों के मोबाइल पर ब्‍लूटूथ के जरिये सार्वजनिक करने की धमकी दे रहा था। इस मामले की रिपोर्ट दो दिन पहले उसने पुलिस में दर्ज करायी थी। हालांकि छात्रा ने अपनी शिकायत में किसी युवक का नाम नहीं लिया था, लेकिन पुलिस ने साकेत सक्‍सेना को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

इस गिरफ्तारी की खबर से जिले के पत्रकारों में भारी रोष है। उनका कहना है कि साकेत के अनुसार वह छात्रा साकेत की दोस्‍त थी। उसने अपने साथ हुए हादसे के बारे में साकेत से बात कर मदद की अपील की थी। साकेत ने उसे सलाह दी थी कि भविष्‍य में जब भी उस ब्‍लैकमेलर का फोन आये तो वह उसे रिकार्ड कर ले और साथ ही इस हादसे की शिकायत पुलिस में कर दे। छात्रा ने ऐसा ही किया और पुलिस कप्‍तान को एक शिकायती पत्र सौंपा जिसके आधार पर दो दिन पहले मामले में मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

साकेत की गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों में पुलिस के खिलाफ रोष फैल गया। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने साकेत को फर्जी फंसाया है। और ऐसा करने से अब पुलिस पर से लोगों का विश्‍वास उठ जाएगा और कोई भी अब किसी पीडित की मदद नहीं करेगा। पत्रकारों के अनुसार पीडित छात्रा और उसके परिवारीजन भी साकेत से गिरफ्तारी से सकते में हैं और उसे निर्दोष बता रहे हैं। वे तो साकेत के पक्ष में बयान देने को भी तैयार थे, लेकिन पत्रकारों की मानें तो पुलिस ने दबाव बनाया कि अगर साकेत के पक्ष में वह छात्रा खडी हुई तो उस पर वेश्‍यावृत्ति का मामला चला कर जेल भेज दिया जाएगा।

उधर पुलिस का कहना है कि मामले की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से ही लडकी के फोन की टेपिंग और काल डिटेल्‍स की छानबीन शुरू कर दी गयी थी। इस कार्रवाई से साफ जाहिर हुआ कि केवल साकेत ही उस लडकी के सम्‍पर्क में था। गौरतलब है कि अभी हाल ही अमर उजाला के एक पत्रकार को सेक्‍स रैकेट में शामिल होने के आरोप में पकडे जाने के बाद से ही संस्‍थान प्रबंधन ने यहां के पूरे स्‍टाफ को हटा कर नई नियुक्तियां कर दी थीं। साकेत भी इसी कार्रवाई का शिकार हुए थे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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