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पुलिस की नौकरी दिलवाने का ठेका चार लाख में..

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चार-चार लाख रुपए में सिपाही बनवाने का ठेका लेने वाले रैकेट का पर्दाफाश कर पुलिस ने ग्वालियर और मुरैना में 83 युवकों को गिरफ्तार किया है. रविवार को हुई परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान पकड़े गए सदस्यों ने पुलिस की पूछताछ में कबूल किया है कि इन लोगों ने सिपाही बनवाने के लिए चार लाख रुपए में सौदा किया था. दूसरे राज्यों से परीक्षा देने आए फर्जी परीक्षार्थियों को पांच हजार से तीस हजार रुपए तक मिलने थे. सिपाही बनने की लालसा रखने वाले युवकों को रैकेट ने यह भी झांसा दिया था कि उनकी पैठ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) में भी है. सिपाही भर्ती परीक्षा में असली परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा देने आए 15 युवकों को ग्वालियर पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

इसके अलावा एक असली परीक्षार्थी के भाई व दो ऐसे लोग पकड़े गए जिन्होंने फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने का ठेका लिया था. मुरैना में 65 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए. इस तरह दोनों जिलों में कुल 83 युवक गिरफ्तार किए गए. भोपाल में पुलिस ने दावा किया कि पूरे प्रदेश में कुल 94 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए हैं. ग्वालियर में एसटीएफ ने रैकेट के सरगना पुत्तू सिंह और पिंटू सिंह को पकड़ा है.

ये लोग फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा दिलाने के लिए लाए थे. इनमें पुत्तू सिंह सेना से रिटायर है. प्रारंभिक पड़ताल में पुलिस को पता चला है कि इन लोगों ने चार लाख रुपए में सिपाही बनाने का सौदा किया था. इन्होंने युवकों को बताया था कि उनके स्थान पर ऐसे लोगों को परीक्षा में बिठाएंगे जो परीक्षा पास कर सकते हैं. पुलिस अधिकारियों को शनिवार की रात सूचना मिली थी कि परीक्षा में बड़े स्तर पर फर्जी परीक्षार्थी बैठने जा रहे हैं. इस पर रात से ही पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) सक्रिय हो गई थी. फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने रात में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, धर्मशालाएं, होटल चेक किए थे. सुबह परीक्षा शुरू होते ही पुलिस ने फिर अभियान चलाया. परीक्षा खत्म होते-होते ऐसे 18 लोग मिल गए जो फर्जी परीक्षा रैकेट से जुड़े थे.

तीस हजार में बिहार से आए

मुरैना में पकड़े गए युवकों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें परीक्षा में पास होने पर 30 हजार रुपए देने का आश्वासन दिया गया था. पटना के संजय कुमार गुप्ता ने कहा, ‘मैं बिहार में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं, एक दोस्त के माध्यम से 30 हजार रुपए में परीक्षा देने का ऑफर मिला. पांच हजार रुपए एडवांस मिले, इसलिए परीक्षा देने चला आया.’

रैकेट के सरगना अंबाह निवासी प्रमोद शर्मा ने बताया, ‘अपने दोस्तों के माध्यम से यूपी व बिहार से युवकों को परीक्षा देने के लिए बुलाया था. एडवांस में पांच-पांच हजार रुपए दिए थे. बाकी की रकम परीक्षा में सफलता मिलने के बाद दी जाती लेकिन पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया. उधर रैकेट के एक एजेंट आगरा निवासी मयंक त्यागी ने बताया ‘मैं प्रमोद शर्मा के संपर्क में था. प्रमोद ने ही युवक लाने के लिए कहा था, इसलिए बिहार व उत्तर प्रदेश के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले युवकों को परीक्षा देने के लिए बुला लिया.

अभी तक 15 फर्जी परीक्षार्थियों के साथ तीन अन्य लोग पकड़े गए हैं. ठेके पर परीक्षा कराने वाले सरगना का पता नहीं चला है. इन लोगों से पूछताछ की जा रही है. इसके बाद ही कोई खुलासा हो सकता है.
– जीके पाठक, एसपी ग्वालियर

सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में फर्जी परीक्षार्थियों के बैठने की सूचना मिली थी, इसलिए परीक्षा से पहले ही कार्रवाई की गई. कार्रवाई में 65 युवक पकड़े गए हैं. सभी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है.
– जयदेवन ए, पुलिस अधीक्षक मुरैना

(भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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