सुशासन बाबू का विरोध करने वालों के खिलाफ मुकद्दमें…

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बिहार में सुशासन देने का दावा कर सत्ता में बैठी नीतीश सरकार अपनी आलोचना और विरोध सहन नहीं कर पा रही तथा नीतीश कुमार  की अधिकार यात्रा में हुए विरोध से बौखला उठी है. नतीज़तन नीतीश सरकार के अधिकारीयों ने बेगूसराय में अधिकार यात्रा के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन को सरकारी कार्य में बाधा मानते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज़ करवा दिया है. अभी थोड़ी देर पहले मीडिया दरबार को एक कमेन्ट के ज़रिये निम्नलिखित सूचना मिली है जिसे हम जस का तस प्रकाशित कर रहे हैं..

अधिकार यात्रा के गैर सरकारी आयोजन में सरकारी कार्य में बाधा का आरोप लगा दर्ज़ कराई प्राथमिकी
अधिकार यात्रा को ले विगत 27 सितंबर को बेगूसराय में आयोजित मुख्यमंत्री के गैर सरकारी व राजनैतिक कार्यक्रम के दौरान विधि व्यवस्था बनाए रखने व उपद्रवकारियों से निपटने में अक्षम अधिकारियों द्वारा बौखलाकर अपने हक़ को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नियोजित शिक्षकों में 13 नामजद एवं 200 अज्ञात के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने एवं अन्य उपद्रव के आरोप में प्राथमिकी दर्ज़ कराई गई है . आदेशपालों और अकुशल मजदूरों से भी कम वेतन (जो महीनों तक लंबित रहते हैं.)पाने वाले नियोजित शिक्षकों के शांतिपूर्ण व लोकतान्त्रिक मूल्यों के अनुरूप चलाये जा रहे आंदोलन के मुद्दों पर संवेदनशील और निदानात्मक पहल करने के बजाय सरकारी निर्देश पर शासकीय दमन की कार्रवाई का प्राथमिक शिक्षक संघर्ष साझा मंच, बेगूसराय ने विरोध करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है.
प्राथमिक शिक्षक संघर्ष साझा मंच, बेगूसराय के समन्वय समिति सदस्यों ने इस मसले पर एक आपात बैठक कर गहन विमर्श किया .
मंच के समन्वय समिति सदस्य सह मुख्य सचेतक विनय कुमार ने नियोजित शिक्षकों के विरुद्ध सरकारी निर्देश पर प्रशासन के दमनकारी कार्रवाई के कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ‘बेगूसराय में शिक्षकों का प्रदर्शन बेहद शांतिपूर्ण और जनतान्त्रिक मूल्यों के अनुरूप था, अपनी मांगों को लेकर इन शिक्षकों का एक शिष्टमंडल ने श्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री जल संसाधन विभाग एवं जदयू नेता श्री प्रमोद कुमार शर्मा व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुख्यमन्त्री से सीधी वार्ता कर अपना ज्ञापन सौंप विधिवत आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करते हुए आंदोलन कर रहे शिक्षकों को वापस घर जाने का निर्देश दे दिया . पिछले कई दिनों से विभिन्न जिलों में शिक्षकों के कड़े विरोध का सामना करते हुए कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया देनेवाले मुख्यमंत्री, बेगूसराय में शिक्षकों के आंदोलन और आचरण को मर्यादित बताते हुए सभा को संबोधित करने के क्रम में सार्वजनिक रूप से तारीफ भी कर गए, बावजूद सभा स्थल पर राजनैतिक प्रतिरोध में शामिल उपद्रवकारियों की सही पहचान करने व उसके खिलाफ कार्रवाई में अक्षम अधिकारियों द्वारा सभास्थल से काफी दूर प्रशासन के निगहबानी मे एनएच-31 (माल गोदाम) के पास जबरिया रोक रखे गए शिक्षकों को उपद्रवकारी बता उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए की गई शासकीय गोलबंदी निश्चितरूपेण कठोर शब्दों में निंदा किए जाने के विषय हैं.’
समन्वय समिति सदस्य,रंजन कुमार ने शिक्षकों के विरुद्ध दर्ज़ कराई गई प्राथमिकी की तीखी निंदा करते हुए इस घटना को सरकार और प्रशासन द्वारा एक स्वच्छ लोकतान्त्रिक आंदोलन को कुचलने के लिये दमनात्मक रूप से की गई अलोकतांत्रिक व गैरकानूनी कार्रवाई बताया.

शिक्षक आंदोलनो से जुड़े आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता रंजन कुमार ने शिक्षकों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा दर्ज़ कराई गई प्राथमिकी को सरासर गलत और निराधार बताते हुए कहा है कि ‘एक गैरसरकारी और राजनीतिक सभा में शरीक होने आए मुख्यमंत्री के समक्ष अपने मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे शिक्षकों द्वारा कौन से सरकारी कार्य में बाधा डाला गया है ये अधिकारी स्पष्ट नहीं कर पा रहे, जुलूस लेकर आगे बढ़ रहे शिक्षकों को एनएच31 पर प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट ने रोक दिया जिससे एनएच जाम हो गया आंदोलनकारियों का ये इरादा कतई नहीं था कि वो एनएच जाम करें,सभा स्थल पर पहुंचे कुछ शिक्षक अपने प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री से हुए वार्ता के नतीजों को सुनने के लिए शांतिपूर्वक बैठे थे कतिपय उपद्रवियों (जिनके इरादे राजनैतिक प्रतिद्वंदिता से प्रेरित हो सकते हैं) जो शिक्षक नहीं थे के द्वारा कुर्सियाँ फेंकने की हुई घटना के बाद तैश में आई पुलिस के लाठीयाँ चटकाए जाने से घायल एक छात्र के ऊपर जानलेवा हमले का मिथ्या आरोप भी शिक्षकों के ऊपर मढ़ दिया गया है.’
समन्वय समिति सदस्य, धनंजय कुमार,जयप्रकाश ज्योति व अनुपमा सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन के शह पर शिक्षक राजनीति में शिक्षकों के शोषण के लिए ख्यात कुछ नेताओं और अधिकारियों ने मिलकर ये निंदनीय कुचक्र रचा है . हम इसकी घोर निंदा करते हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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