हिना रब्बानी और बिलावल भुट्टो के इश्क पर फ़तवे की तलवार…

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मरहूम बेनज़ीर भुट्टो की विरासत का लुत्फ़ उठाते उठाते ज़रदारी के दांतों में हिना रब्बानी खार एक पथरीली किरच की तरह आ गयी हैं. हिना-बिलावल के इश्क के चर्चों ने आसिफ ज़रदारी की नींद उड़ा कर रख दी है. एक तरफ जवान बेटे द्वारा विद्रोह की धमकियां  तो दूसरी तरफ कट्टर इस्लामी गुटों द्वारा हिना-बिलावल के खिलाफ किसी भी वक्त फ़तवा जारी कर दिए जाने का भय. बांग्लादेश के प्रतिष्ठित बांग्ला दैनिक ‘इत्तेफाक’ ने भी कहा है कि पाकिस्तान के इस्लामी ग्रुप हिना-बिलावल के खिलाफ फतवा जारी कर सकते हैं.

बांग्लादेश के अखबार ‘इत्तेफाक’ ने लिखा है कि कुछ कट्टरपंथी इस्लामी ग्रुप हिना और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो के खिलाफ फतवा जारी करने की तैयारी में हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है जरदारी इसे पूरे मामले से हो रही बदनामी से बेहद परेशान हैं. खासकर बिलावल के खिलाफ फतवा जारी होने की आशंका ने उन्हें बेचैन कर दिया है. अगर फतवा जारी होता है तो पीपीपी सरकार और मुश्किल में आ सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जरदारी इस ‘बदनामी’ के बाद खार की विदेश मंत्री पद से छुट्टी भी कर सकते हैं.

गौरतलब है कि बांग्लादेशी टैब्लॉइड “ब्लिट्ज” ने पहले खबर दी थी कि बिलावल, हिना रब्बानी से शादी करने की जिद पर अड़े हैं. इसकी वजह से बिलावल और उनके पिता जरदारी के बीच तनाव पैदा हो गया है. खबर में कहा गया था कि बिलावल से शादी करने के लिए हिना भी अपने अरबपति पति फिरोज गुलजार को तलाक देने के लिए तैयार हैं. दोनों स्विट्जरलैंड में बसना चाहते हैं. बिलावल से 11 साल बड़ी खार की गुलजार से दो बेटियां हैं.

अब बांग्लादेशी अखबार ‘ब्लिट्ज’ ने अपने नए  दावे में कहा है कि जरदारी और हिना के शौहर गुलजार इससे नाराज हैं. ब्लिट्ज के अनुसार मंत्री बनने के बाद हिना के बदले रंगढंग देख गुलजार ने उन्हें राजनीति छोडऩे की सलाह दी थी जिसे ठुकराते हुए हिना ने उन्हें दो टूक जवाब दिया था, शौहर छोड़ दूंगी मगर राजनीति नहीं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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