ये दूरियां…

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन और सपा से निकाले गए नेता अमर सिंह की दोस्ती के किस्से हाल-फिलहाल तक खासे मशहूर थे, लेकिन दोनों के कदमों से लग रहा है कि उनके बीच दूरियां बढ़ रही हैं। हाल ही में दोनों ने एक-दूसरे की कंपनियों से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही इन दोनों हस्तियों के रिश्ते में दरार गहराने की अटकलें तेज हो गई हैं।

खबर है कि अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन की बहुचर्चित कंपनी एबी कॉर्पोरेशन को अलविदा कह दिया है। इससे कुछ ही दिनों पहले बिग बी ने अमर सिंह द्वारा प्रमोटेड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लि.(ईडीसीएल) से इस्तीफा दिया था। अमर सिंह ने बताया कि उन्होंने ईडीसीएल के कार्यकारी अध्यक्ष का पद समय अभाव के कारण छोड़ा है।

जब इस बारे में अमर सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “चूंकि मैंने अपनी ही कंपनी के पद से इस्तीफा दे दिया था, इसलिए मैंने सोचा कि एबी कॉर्पोरेशन का उपाध्यक्ष बने रहना भी ठीक नहीं होगा। इसलिए मैंने यह पद भी छोड़ दिया।” राज्यसभा सदस्य सिंह ने कहा कि इस घटनाक्रम का कोई अन्य अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

ईडीसीएल में सिंह और उनकी पत्नी पंकजा कुमारी समेत सभी प्रमोटर्स की 56.36 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका मौजूदा मूल्य करीब 100 करोड़ रुपए है।

ईडीसीएल के निदेशक मंडल से अमिताभ के इस्तीफे को बोर्ड ने सोमवार को मंजूर कर लिया था। वे इस कंपनी में शेयर होल्डर रहे हैं। सिंह के मुताबिक पिछले दस वर्षो में अमिताभ ने ईडीसीएल की दो-तीन बैठकों में भाग लिया था।

चर्चा है कि एक समय साथ-साथ घूमने वाले अमिताभ-अमर के रिश्ते में अचानक आए बदलाव की वजह दोनों के मौकापरस्त होने की तरफ इशारा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जैसे ही मुलायम सिंह की सत्ता चली गई वैसे ही अमिताभ बच्चन ने उनसे किनारा कर लिया। उधर अमर सिंह ने भी सपा से निकाले जाने के बाद मुलायम के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। अमर भी पूर्व में कांग्रेस से सपा में शामिल हुए थे।

By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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