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दरकने लगी जैसलमेर के सोनार किले की दीवारें

-जैसलमेर से मनीष रामदेव||

जैसलमेर। गत साल हुई जोरदार बारिश से धराशायी हुई सोनार किले के परकोटे की दीवार ने इस बार बारिश का दौर थमने के बाद भी स्थानीय लोगो को चिंतित कर रखा है। स्वर्णनगरी के ऎतिहासिक सोनार किले के परकोटे की दीवार के पास से गुजरने के दौरान हमेशा सावधानी बरतने की जरूरत बनी हुई है। यही नहीं, सोनार किले की मौलिक सुंदरता को निहारने व फोटोग्राफी करने के लिए सैलानियों को परकोटे की दीवार से कुछ दूरी बनानी पड़ती है।

प्रशासन व पुरातत्व विभाग की लापरवाही के कारण यह हालात बने है। मानूसन के बादल तो स्वर्णनगरी से छंट गए हैं, लेकिन आशंकाओ के बादल अभी छाए हुए हैं। करीब साढ़े आठ सौ साल पुराने इस किले को अपने बेजोड़ तालमेल से बांधे रखने वाली दीवारें अब दरकने लगी हैं और दीवारो के पत्थर भी बाहर निकलते देखे जा सकते हैं। कहीं-कहीं तो दीवारें फूल कर बाहर आने लगी है, ऎसे मे किसी भी समय यहां हादसा होने की आशंका है।

कब तक ईश्वर मेहरबान
करीब 15 साल पहले सोनार किले के परकोटे की दीवार अचानक गिर गई थी, जिसके नीचे दबने से छह जनो की मौत हो गई थी। हालांकि उसके बाद पुरातत्व विभाग की आंखें खुली और पुरानी व जर्जर दीवारो को दुरूस्त करवाने का कार्य शुरू हुआ, लेकिन निराशाजनक बात यह है कि अभी तक यह कार्य शनै: शनै: चल रहा है। करीब साल भर पहले गोपा चौक पुलिस चौकी के सामने जर्जर हो चुकी सोनार किले के परकोटे की दीवार एकाएक भरभरा कर गिर गई थी।

बारिश का मौसम होने के कारण न तो बाहर कोई पुलिसकर्मी था, न दुकानदार और न हीं सैलानी। ऎसे मे कई किलो वजनी पत्थरो वाली इस दीवार के गिरने के बावजूद कोई जन हानि नहीं हुई। इसी तरह शिव मार्ग से भी परकोटे से पत्थर सड़क पर गिर पड़े थे। गत साल जैसलमेर प्रवास पर आए संभागीय आयुक्त व हाल ही में आई पर्यटन की प्रमुख शासन सचिव ने भी सोनार किले के परकोटे की जर्जर दीवारो को लेकर चिंता जताई थी और इस धरोहर का संरक्षण करने की भी जरूरत बताई थी।

दिन-रात आशंका
जैसलमेर के ऎतिहासिक सोनार किले को पहुँच रहे नुकसान से हर कोई दु:खी है। पर्यटन व्यवसायी व दुर्गवासी तो किले के बदहाल हो रहे स्वरूप के कारण दु:खी हैं ही, साथ ही सबसे ज्यादा भयभीत वे लोग हैं जो इस दीवार के पास रहते हैं या उनकी दुकाने इसके पास हैं। हमने सोनार किले की पीडा को लेकर जब बात की कुछ लोगों से तो उनकी किले के प्रति पीडा कुछ इस प्रकार निकल कर सामने आई

भाजपा से जुड़े ओम सेवक का कहना है कि सोनार किले के पत्थर मुख्यत: ठोस मिट्टी है, जो पानी के रिसाव को ज्यादा सहन नहीं कर सकती। दोषपूर्ण सीवरेज व विफल पानी की निकासी की व्यवस्था होने से ये हालत बने हैं।
महाविद्यालय छात्र प्रियंक पुरोहित का कहना है कि सोनार किले के परकोटे की दीवार बारिश के दिनों में ही हर दिन खतरे से जूझ रही थी। अब समय है इसकी सुध लेने का। कारण यह है कि जर्जर दीवार खतरे का सबब बनी हुई है।
गृहणी अल्का व्यास का कहना है कि सोनार किले के परकोटे की दीवार दिनोंदिन कमजोर हो रही है। हकीकत यह है कि दीवार की मरम्मत का कार्ये जिस गति से होना चाहिए, उस गति से नहीं हो रहा है।
पर्यटन व्यवसायी मुकेश बिस्सा का कहना है कि सोनार किले की दीवार प्रभावित करने वाले कारणों का पता लग गया है और दीवार को दुरूस्त भी किया जा रहा है, लेकिन कई ऎसे भाग भी है जो मरम्मत के लिहाज से अछूते हैं।
आदर्श व्यास का कहना है कि पर्यटन के लिहाज से सोनार दुर्ग की दीवारों का संरक्षण जरूरी है। बावजूद इसके हकीकत यह है कि न तो इसके जर्जर होने से संभावित खतरे को महसूस किया जा रहा है और न ही इसकी सुध ली जा रही है।
कंपनी में कार्यरत मृत्युंजय व्यास का कहना है कि क्षतिग्रस्त दीवार के आसपास रहने वाले लोगों को हर समय आशंकित रहना पड़ता है। इन दीवारों की समयबद्ध सुध लेने की जरूरत है।

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