बाड़मेर नगर परिषद् की करोड़ों की जमीन पर अवैध निर्माण कराया भूमाफियों ने

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राजस्थान सरकार के पास विचाराधीन मामला होने के बावजूद मामला ठन्डे बस्ते में…

बाड़मेर जिला मुख्यालय पर भूमाफियो द्वारा नगर परिषद् की करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण करा दिया जबकि इस जमीन में हुए भ्रष्टाचार की जांच स्वायत शासन विभाग और स्थानीय पुलिस कर रही है. इस प्रकरण में नगर पालिका के चार कार्मिक निलंबित भी हो चुके है, यहाँ तक की मुख्यमंत्री कार्यालय से मार्च उनतीस दो हज़ार बारह को इस प्रकरण की जांच जिला कलेक्टर और स्वायत शासन विभाग के सचिव को दी थी इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की, जबकि जिला कलेक्टर बाड़मेर द्वारा इस प्रकरण की जांच तहसीलदार बाड़मेर को दी थी, तहसीलदार ने पटवारी को जांच सौंप दी मगर कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई, मुख्यमंत्री के आदेशो की धजिया नगर परिषद् और जिला प्रशासन उड़ा रहे है, एल एस जी विभाग के सचिव द्वारा अप्रैल में यह जांच आयुक्त नगर परिषद् बाड़मेर को दी थी जो कचरे की टोकरी की शोभा बढ़ा रही है,

चन्दन सिंह भाटी ने इस आशय की शिकायत मुख्यमंत्री को की थी जिस पर मुख्यमंत्री ने द्वायत सचिव को जांच के आदेश दिए थे .शहर के महावीर नगर में नगरपालिका बाड़मेर का व्यवसायिक भूखंड संख्या 66 है जिसकी कीमत लगभग करोड़ो रूपए है. उध्क्त भूखंड पर तत्कालीन जिला कलेक्टर सुबीर कुमार ने वर्ष 2007 में निरस्तीकरण के आदेश जारी कर नगरपालिका के चार अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया था. उक्त प्रकरण में पालिका के चार अधिकारी कर्मचारी निलंबित भी किए गए है. इस व्यवसायिक भूखंड प्रकरण की जांच आज भी राज्य सरकार के पास विचाराधीन है. राज्य सरकार ने इस भूखंड के आवंटन को निरस्त कर भूखंड राशि जमा नही करवाई गई थी. इसके बावजूद इस भूखंड पर भूमाफिया जिन्होने सरकारी जमीनों पर कई अतिक्रमण कर रखे है. और वहां पर अवैध रूप निर्माण कार्य आरंभ करा रखा है. उक्त भूखंड पर रामचंद्र वैष्णव,  सावताराम माली,  भगाराम माली तथा इनके भूमाफिया सहयोगियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य निर्बाध रूप से किया जा रहा है. चूंकि उक्त भूंखड राज्य सरकार का है जिसकी कीमत करोड़ो रूपए है. इस पर नगरपालिका कर्मचारियों तथा अधिकारियों की मिली भगत से भूमाफियों द्वारा अतिक्रमण कर व्यवसायिक काम्पलेक्स का निर्माण करवाया जा चूका है . स्थानीय जिला प्रशासन की कई बार लिखित सूचना देने के बावजूद कोई कार्यवाही नही की गई.

उक्त व्यवसायिक भूखंड संख्या 66 के पूरे प्रकरण की जांच प्रशासनिक अधिकारी करने से कतरा रहे है जबकि इस मामले के तीन मुकदमे शहर कोतवाली में भी दर्ज है सरकारी संपति को भूमाफियों के चंगूल से मुक्त करवाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की बजाय भूमाफियो को शह दी जा रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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