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ममता ने केंद्र से समर्थन वापिस लिया: माया-मुलायम की जोड़ी टूटे बिना यूपीए सरकार को कोई खतरा नहीं…

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पिछले  दिनों मनमोहिनी सरकार द्वारा खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश, रसोई गैस पर सीमा बंदी और डीजल के दामों की बढ़ोतरी के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और केंद्र की यूपीए सरकार में अहम सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की चीफ ममता बनर्जी ने केंद्र की यूपीए सरकार से बाहर आने का फैसला किया है. उन्होंने ऐलान किया है कि शुक्रवार को पार्टी के कोटे से केंद्र में मंत्री इस्तीफा देंगे. मंगलवार शाम को कोलकाता में पार्टी की तीन घंटे से लंबी चली बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि वे केंद्र की नीतियों से बेहद खफा हैं. उन्होंने कहा कि सरकार हमें ज़रा सा भी सम्मान भी नहीं देती है. आम जनता को सीधे-सीधे प्रभावित करने वाले बड़े फैसले भी हमारी सहमती के बिना ले लिए जाते हैं. ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया है कि सिर्फ कोयला घोटाले से से लोगों का ध्यान हटाने के चक्कर में आम आदमी को संकट में डाल दिया गया.  डीएमके भी सरकार के लिए संकट खड़ा कर रहा है. यूपीए के घटक दल डीएमके ने 20 सितंबर को आयोजित हो रहे भारत बंद में हिस्सा लेने का फैसला किया है. डीएमके के 18 सांसद यूपीए को समर्थन दे रहे हैं. लेकिन यूपी में एक दुसरे के प्रखर विरोधी सपा और बसपा केंद्र में एक थाली में जीम रहे हैं. जिसके चलते कांग्रेस सरकार को कोई खतरा नहीं है.

ममता बनर्जी के ताज़ा रुख से कांग्रेस बैकफुट पर आ गई लगती है. सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबर है कि ममता बनर्जी की मांगों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी प्रधानमंत्री से बात करेंगी.  लेकिन सरकार के समीकरण पर नज़र दौड़ाने पर साफ हो जाता है कि केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है. क्योंकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सरकार को बाहर से समर्थन दे रही हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसदों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद इस समय यूपीए के पास अब बहुमत के लिए जरूरी 272 सांसदों के समर्थन की जगह 254 सांसद ही हैं. लेकिन सरकार फिलहाल खतरे से बाहर दिख रही है. यूपीए सरकार को बीएसपी के 22 और एसपी  के 21 सांसदों का समर्थन बाहर से मिला हुआ है.
इस बीच,  समाजवादी पार्टी ने ममता बनर्जी के ताज़ा फैसले का अपने ऊपर असर होने से इनकार किया है. कांग्रेस ने ममता की समर्थन वापसी पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का हक है. इस मुद्दे पर अंतिम फैसले से पहले कुछ भी कहना मुश्किल है. ममता बनर्जी हमारी सम्मानित सहयोगी रही हैं. उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उस पर प्रधानमंत्री विचार कर सकते हैं.’

बीजेपी की ओर से प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह सरकार का अहंकार है. यह गुरूर है. विपक्ष को छोड़ दीजिए, सहयोगियों के साथ भी सरकार का न तो संवाद है और न ही चर्चा हो रही है. ममता बनर्जी ने कहा है कि कोयला घोटाले से ध्यान हटाने के लिए एफडीआई का कदम उठाया गया है. बीजेपी शुरू से यही कह रही है. यह अस्थिर सरकार है. जिस तरह से हड़बड़ी में फैसले किए जा रहे हैं, उससे कई सवाल खड़े होते हैं. संसद के विशेष सत्र की मांग पर पार्टी आगे विचार करेगी.’ वहीं, लेफ्ट की तरफ से ममता के ताज़े रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए सीताराम येचुरी ने कहा, ‘शुक्रवार में अभी कुछ समय है. वे फिर से सरकार को समर्थन दे सकती हैं. एनडीए की सरकार के दौर में भी वे ऐसा कर चुकी हैं.’
मंगलवार शाम को कांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात की. लेकिन इस बैठक का ब्योरा सामने नहीं आया. तृणमूल की तमाम धमकियों के बावजूद केंद्र सरकार अपने रुख पर अड़ी हुई है. कई लोग अंदाजा लगा रहे थे कि पहले की तरह इस बार भी ममता बनर्जी तेवर दिखाकर अपना रवैया बदल लेंगी. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.  हालांकि ममता इससे पहले भी कई बार ऐसे तेवर दिखा चुकी हैं और अंत में शांत भी हो गई थीं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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4 thoughts on “ममता ने केंद्र से समर्थन वापिस लिया: माया-मुलायम की जोड़ी टूटे बिना यूपीए सरकार को कोई खतरा नहीं…

  1. भाई बात ये हे माया को मोह तो होता ही हे इएस में भय ओर्र जोड़ दीजिए कियो की सी बी ई की ताल वर दिखा राखी है सोनिया ने मरता किया न करता ताज कोरिडोर का सौदा सीधा सामान ने है ओर्र हजारो करोड़ की सम्माप्त्ती की चोकिदारी भी सोय्निया के हाथ में है अब मायामोह का चक्कर जिस ने नहीं देखा वोतो हज़ार सलाह दे सकता है मगर जिसे तकलीफ होगी भुगतना तो उसी को है ओर्र मुलायिम तो रेड लाईट एरिया की पैयदा वार उस का कोई बाप और माँ हे ही नहीं जय सा सोडा पट जाये कीमत मिलजाए खिल्ली मंदी का सोदागर है नैय्तिकता मरियादा सिध्हंत ये मुलायिम की किताब के किसी भी पन्ने पर नहीं लिखे है ओर्र मुलाई कांग्रेस की बी पार्टी है जो कांग्रेस में नहीं चला वो मुलाई के साथ ओर्र जो मुलायिम स्व नहीं चल वो कांग्रेस के साथ बस यिनिही नियम मो बंधे है लोग अब आप गनती लगते रहिये

  2. केंद्र सरकार जनता को थोड़ी रहत दे और डीजल में २/,तथा गैस सिलेंडर महीने में कम-से-कम ६ से बढाकर १२ कर दे,क्योकि जनता को देश से बहुत प्यार है पर उन्हें अपना घर भी चलाना है!jab जनता ही नहीं जी पायेगी तो देश किसके लिए होगा !इसलिए केंद्र सरकार देश के साथ जनता का भी ख्याल करे,साथ-साथ जनता को भरोसा दिलाये की कम से कम अहले लोकसभा चुनाव तक कोई दम नहीं बढाया जायेगा !हमें बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार जी का भी आभार व्यक्त करना चाहिए क्योकि उन्होंने भी जनता के दर्द को समझा और डीजल पर टैक्स कम करने की घोसना की!

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