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घोटाले भूलना जनता की पुरानी आदत है: शिंदे

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आज़ादी के बाद से देश में अब तक हजारों घोटाले हो चुके. लूटने वाले लूटते रहे  और देश लुटता रहा तथा देशवासी कुछ दिन तक इन पर बतियाते रहे फिर सब भूल-भाल कर अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी जीने लगे. टूजी घोटाला हो या कोयला घोटाला, खूब हंगामा हुआ, थोड़े दिन सरकार को कोसा, सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को आड़े हाथ लिया मगर नतीजा ढ़ाक के फिर वही तीन पात. क्या बिगड़ा सरकार का? कोई फर्क नहीं पड़ता इन सबसे सरकार और कांग्रेस पर. क्योंकि सब जानते हैं कि जनता को भूलने की पुराणी बीमारी है.
इसे देखते हुए ही केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि कोयला वोइला रहने दो, अरे कल परसों की ही बात है बोफोर्स था, है ना याद, भूल गये हम. वैसा ही कोयले का है, थोड़े दिन हाथ काले, धोए कि दोबारा हाथ साफ़.
पुणे में देश के शिंदे का ये बयान तब आया जब आईएमजी ने तीन और कोयला खदानों के आवंटन रद्द करने की सिफारिश की. जिन कोल ब्लॉक के आवंटन रद्द करने की सिफारिश की गई है वो हैं, गौरांगडीह एबीसी कोल ब्लॉक जो हिमाचल ईएमटीए पावर लिमिटेड और जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड को आवंटित किया गया था. रावणवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक जो एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड को आवंटित किया गया था. न्यू पत्रापाड़ा कोल ब्लॉक जो भूषण स्टील लिमिटेड के नाम आवंटित किया था.
जैसे जैसे वक्त बीत रहा है कोयला घोटाले की परटी दर परत  खुलती जा रही हैं लेकिन गृह मंत्री भरोसे के साथ कह रहे हैं कि ये पब्लिक है सब भूल जाएगी. शिंदे साहब का ये बयान सुनकर विपक्ष के उन आरोपों में दम नजर आता है कि सरकार जानती है कि जनता का ध्यान कैसे भटकाना है. बहरहाल, शिंदे का बयान ये साफ करता है कि सरकार को कोयला घोटाले पर मचे तूफान की परवाह नहीं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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4 thoughts on “घोटाले भूलना जनता की पुरानी आदत है: शिंदे

  1. सिंदे साहब ने जनता की नब्ज को पहचान कर यह स्टेटमेंट दिया है, वोह यह भी जाताना चाहते है की सरकार इसलिए घोटाले पर घोटाले करती है ,क्योंकि कुछ बिगड़ना तो कुछ है नहीं. जनता को पता चलेगा, यदि शोर शराबा हंगामा होगा ,कोई जाँच आयोग बैठा देंगे,कोर्ट में जायेगा तो केस को इतना कमजोर बना देंगे की कुछ सिद्ध ही न हो.वहां भी पहले तारीख पर तारीख डलवा कर इतना वक्त लगा देंगे की जनता समय के साथ भूल जाती है. आखिर जनता अपनी परेशानियों से जूझे या इन चोरों पर निगरानी रखे.

  2. ये बात तो सच है शिंदे साहब की १९४८ में सब से पहले जीप घुलता हूया था साईकिल /मुशामेघा १९५१ में /तेजमोघारा/ १९६० में मुशामेस तेल १९६० में नागरवाला १९७१/ अन्तुलेत्रुस्त सीमेंट १९८१मे पनडुब्बी /तन्सिभूमि / चुरहट लाटरी / इयर बस १९९०/ हराषद मेहता / मिचुअल फंड / जेन डायरी /चिनिआयत जे ऍम ऍम [शिबुसोंर्ण] उरियाखाद/ संचार सुखराम / चारा घोटाला / लाखुभाई पाठक उए टी आये २००१ /तेलगी स्टाम्प पेपर / अनाज के बदले तेल २००३ ये सब भूल गए अभी जो ताजे है जय से बोफोर्ष ताज कोरी डोर हुस्सनाली टैक्स/ बाबूलाल झार खंण्ड मभुकोदा / कोमन गेम उ प सवास्थ आदर्श सोसायटी तू जी कोयला ये तो नए है शिंदे जी सही कह रहे है ये करते जाए हम लिस्ट बनाते रहे बे शर्म बे हया लुटेरे देश दिरोही रास्त के दुसमन गद्दार है ये सब

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