एलपीजी और डीजल के जरिये आम भारतीय की कमर तोड़ी….

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-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

एक के बाद एक घोटालों में उलझी यूपीए सरकार द्वारा पटरी से उतर चुकी अर्थ व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए फिर आम आदमी की गरदन रेंती जा रही है.

कार्टून: मनोज कुरील

पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी की है. सरकार ने डीजल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं. बढ़े दाम आज आधी रात से लागू होंगे. इतना ही नहीं रसोई गैस पर कोटा सिस्टम भी लगा दिया गया है. आर्थिक सुधारों का अश्वमेघ संसदीय मानसून सत्र की बलि के बाद अब असली रंग में है. चुनावी राजनीति और राजनीतिक बाध्यताओं के बावजूद घोटालों से घिरी सरकार कारपोरेट रिमोट से एक के बाद एक जनविरोधी कार्रवाई को अंजाम देकर जनसंहार की संस्कृति के नये नये आयाम खोलने में लगी है. केन्द्र सरकार के इस अप्रिय फैसले से ना केवल युवराज की तोजपोशी खतरे में पड़ गयी है बल्कि मनमोहिनी माया के बादल भी छंटने लगे हैं. शेयर बाजार के सांड़ के आक्रामक तेवर ही बता रहे है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के सर्वव्यापी सर्वनाश के रंग हो सकते हैं .

केंद्र सरकार ने डीजल कीमतों में वृद्धि तथा रसोई गैस प्रति परिवार साल में छह सीमित करने का फैसला कर आम भारतीय की कमर तोड़ने का पक्का इंतजाम कर दिया है.  मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति के फैसले की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

-डीजल का दाम 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ाया गया.
-इस मूल्यवृद्धि में मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल नहीं.
-प्रति परिवार प्रति वर्ष सब्सिडीयुक्त एलपीजी सिलेंडर सिर्फ छह.
-प्रति परिवार एलपीजी की सीमा तय होने से चालू वित्त वर्ष में तेल कंपनियों की कमाई में संभावित नुकसान में 5,300 करोड़ रुपए की कमी होगी.
-डीजल की कीमत में वृद्धि से तेल कंपनियों की संभावित राजस्व में नुकसान करीब 15,000 करोड़ रुपए कम होगा.
-पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क मौजूदा 14.78 में 5.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती. इससे तेल कंपनियों को राहत मिलेगी.
-केरोसीन के मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं.
-इन उपायों से सरकारी तेल कंपनियों को 20,300 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी और उनकी संभावित कमाई का नुकसान चालू वित्त वर्ष में 1.87 लाख करोड़ रुपए से घटकर 1.67 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान.

लंबी ऊहापोह और कई बार हाथ खींचने के बाद आज आखिरकार केंद्र सरकार ने डीजल की कीमत बढ़ा ही दी. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय समिति ने देर शाम डीजल की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने को हरी झंडी दे दी.
कुछ प्रमुख शहरों में डीजल के दाम कुछ इस प्रकार होंगे-

दिल्ली : 41.29 रुपए प्रति लीटर की जगह अब 46.29 रुपए प्रति लीटर
मुंबई : 41.98 रुपए प्रति लीटर की जगह अब 46.98 रुपए प्रति लीटर
जयपुर : 43.22 रुपए प्रति लीटर की जगह अब 48.22 रुपए प्रति लीटर
भोपाल : 45.66 रुपए प्रति लीटर की जगह अब 50.66 रुपए प्रति लीटर
लखनऊ : 44.04 रुपए प्रति लीटर की जगह अब 49.04 रुपए प्रति लीटर
अहमदाबाद : 45.89 रुपए प्रति लीटर की जगह 50.89 रुपए प्रति लीटर

प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में हुए फैसलों पर चुनावी जोड़-तोड़ का असर भी दिखा क्योंकि केरोसिन और रसोई गैस की कीमत के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं की गई. अलबत्ता रसोई गैस के सिलिंडरों की सीमा जरूर तय कर दी गई. इसके मुताबिक अब किसी भी उपभोक्ता को रियायती दर पर साल भर में केवल 6 रसोई गैस सिलिंडर मिलेंगे. इसके बाद उसे बाजार मूल्य के मुताबिक भुगतान कर सिलिंडर लेना होगा. सरकार ने पेट्रोल उपभोक्ताओं को राहत दी है. पेट्रोल की कीमत 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने का प्रस्ताव था लेकिन सरकार ने उस पर उत्पाद शुल्क 5.50 रुपये प्रति लीटर घटाकर मूल्य वृद्घि की गुंजाइश खत्म कर दी.

कार्टून: हाडा

इससे पहले दिन में वित्त मंत्रालय ने रसोई गैस की कीमत में 100 रुपये प्रति सिलिंडर इजाफा करने का प्रस्ताव रखा था. डीजल की कीमत में भी 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की बात कही जा रही थी. डीजल की कीमत बढ़ाने के कठिन फैसले के संकेत सरकार पहले से दे रही थी. इस बीच संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के प्रमुख घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि इस फैसले से वह नाखुश है. प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्र्टी ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की.
इस बढ़ोतरी से पहले सरकारी तेल विपणन कंपनियों को डीजल की बिक्री पर 19 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा था. इसी तरह केरोसिन की बिक्री पर तकरीबन 32.7 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस पर 347 रुपये प्रति सिलिंडर का घाटा इन कंपनियों को सब्सिडी के कारण  उठाना पड़ रहा है.

केन्द्र में सत्तारुढ़ गठबंधन के घटक दल और विपक्ष ने गुरुवार रात डीजल मूल्यवृद्धि के लिए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इससे आम आदमी पर बोझ और बढ़ जाएगा तथा इसे फौरन वापस लेने की मांग की. संप्रग के दूसरे सबसे बड़े घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पार्टी इससे नाखुश है और वह इसे वापस लेने की मांग करती है.
तृणमूल प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘हम अप्रसन्न हैं. हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे और हम इसे वापस लेने की मांग करते हैं.’ एक अन्य तृणमूल नेता एवं रेल मंत्री मुकुल रॉय ने कहा, ‘इस बारे में हमारे साथ विचार विमर्श नहीं किया गया.’

भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘यह देश के आम आदमी के साथ क्रूर मजाक है. इससे धान बुवाई के मौसम में किसानों पर बुरी मार पड़ेगी. हम इस मूल्यवृद्धि को स्वीकार नहीं करेंगे. हम सरकार को इस तरह आम आदमी को लूटने की इजाजत नहीं दे सकते.’

भाजपा नेता यशवन्त सिन्हा ने कहा कि डीजल मूल्य बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. कीमतें पहले से ही काबू में नहीं है. इसके कारण मुद्रास्फीति बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में दुश्वारियां पैदा हो जाएंगी. भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी. राजा ने इस निर्णय को पीछे ले जाने वाला और जन विरोधी करार दिया. उन्होंने कहा कि इससे जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे जो पहले से काफी उंचे हैं. इससे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ेंगी. सरकार को इसे लागू नहीं करना चाहिए.

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One thought on “एलपीजी और डीजल के जरिये आम भारतीय की कमर तोड़ी….

  1. सरकारने जो डीजल ,और रसोई गैस के दाम बढ़ाये हैं अगर देश के अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी था तो सही है पर माध्यम वर्ग पर जो इसका प्रभाव पड़ेगा ,उससे निजात दिलाने की भी व्यवस्था करनी चाहिए थी ,क्योकि डीज़ल और गैस के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा माध्यम वर्ग ही प्रभावित होंगे!जो सरकारी पेशा लोग है उनकी महंगाई भत्ता बढ़ा दिया जायेगा और जो कमजोर वर्ग के लोग है उनकी मजदूरी बढ़ जाएगी,[उदहारण स्वरुप जब १०रुपिये किलो चावल था उस समय मजदूरी ९०रुपिये प्रति दिन थी और आज २५से ३० रुपये किलो चावल है तो मजदूरी २५०रुपिये प्रति दिन है ,एक ठेला वाले की मजदूरी आज से १० वर्ष पहले २किलोमितर की १०रुपिये थी वो आज कम-से-कम ५०रुपिये है],,कहने का मतलब है की जी निजी संस्थानों में काम करते है उनका मासिक और जो पिछले दस वर्षों में सरकार द्वारा महंगाई बढाई गई है दोनों के दर में काफी अंतर है यानि की हर हाल में मरना तो माध्यम वर्ग को ही है जिसके लिए सरकार ने कोई उपाय नहीं सोचा !लोग जानते है की इन चुनावी वक़्त में सरकार दाम बढ़ा रही है तो जरूरी होगा तभी ,पर हम माध्यम वर्ग के हित में भी सोचना चाहिए था क्योकि सबसे ज्यादा आबादी भी माध्यम वर्ग की ही है ,!किसानो को भी ज्यादा नुकसान नहीं है ,वो आन्दोलन करेंगे और सरकार उनका खरीदारी दाम बढ़ा देगी !आखिर सरकार करेगी भी क्या ?पेत्रोलिआम पदर्थो पर से सरकार अपने टैक्स हटाकर इसकी भरपाई कर सकती है फिर सरकारी खजाने खली हो जायेंगे और विकाश प्रभावित होगी,जनता और विरोधी दल को विकाश भी तेजी से चाहिए?फिर तो हम माध्यम वर्गों को भूखे मरने की नौबत हो जाएगी?अब हम जनता पर ही छोड़ दिया जाये !जनता को अपनी ताकत दिखने का मौका तो चुनाव में ही मिलेगा!अब सब कुछ जनता पर ही सोचेगी की माड़ दिया जाये या इस सरकार को छोड़ दिया जाये!

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