राहुल गांधी गुजरात चुनाव प्रचार से दूर रहेंगे…

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गुजरात में राहुल गांधी के साथ कहीं उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव परिणामों जैसी पुनरावृति ना हो जाये इसी डर के चलते कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी को कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रचार अभियान के लिए नहीं भेजने का मन बना लिया है.

गौरतलब है कि कुछ समय पहले केन्द्रीय मंत्री बेनीप्रसाद ने कहा था कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सीधी टक्कर हो सकती है. लगता है कि गुजरात में नरेन्द्र मोदी की मज़बूत स्थिति को देखते हुए राहुल गांधी को गुजरात चुनाव में मुख्य चुनाव प्रचारक नहीं बनाने का फैसला किया है. क्योंकि गुजरात विधानसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी के तीसरी बार जीत जाने पर राहुल गांधी की छवि पर कोई विपरीत प्रभाव ना पड़े.

कांग्रेस नहीं चाहती कि गुजरात चुनाव का हश्र भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसा हो. जहां राहुल गांधी ने पार्टी का प्रचार करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन अखिलेश यादव के करिश्माई व्यक्तित्व के आगे जनता ने उन्हें नकार दिया था.

अब गुजरात में भी ठीक यही हालत उभर कर सामने आ रहे हैं जिसके चलते कांग्रेस राहुल की मोदी से सीधी टक्कर कराने से बचना चाह रही है. कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी इस मुद्दे पर बड़ी सफाई से राहुल गांधी को बचाते हुए कहते हैं कि “सभी राज्यों के चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं. काग्रेस की राज्य इकाई गुजरात में चुनाव लड़ने में सक्षम है.”

जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आलाकमान का यह कदम गुजरात के आम काग्रेसी कार्यकर्ता के मनोबल पर बुरा असर डालेगा, जो कि यह उम्मीद कर रहा था कि इस बार कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रचार अभियान की कमान राहुल गांधी के हाथों में होगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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4 thoughts on “राहुल गांधी गुजरात चुनाव प्रचार से दूर रहेंगे…

  1. आज कुछ लोग कह रहे हैं की राहुल गाँधी में ऐसी कोई बात ही नहीं जिससे वो मोदी का मुकाबला करें !मुझे एक कहानी याद आ गई एक बहुत बड़े ब्यापारी का बेटा जिसके पास बहुत साडी सम्पति थी ,पर उसका बेटा अपने पापा के ब्यापार में हाथ नहीं बटाता था ,ऐश करता था ,उसके बाप ने उसकी शादी करने की सोची और बात फ़ैल गई ,उस लड़के से शादी करने के लिए आप यकीन नहीं करेंगे ,बड़े बड़े घरानों के हजारो लड़कियों की शादी करने के लिए लाइन लग गई!उस लड़के में क्या था इसका जबाब अगर किसी के पास होगा तो उसे पता होगा की राहुल गाँधी में क्या बात है जो कांग्रेसी उन्हें PM बनाना चाहते हैं?राजीव गाँधी में भी कोई खास बात नहीं थी,पहली बार वे INDIRA जी के देहांत के बाद PM बने ,उसके बाद उन्हें हर का मुह देखना पड़ा,पर नेक्स्ट इलेक्शन में देश और विदेश की मीडिया ने बताना सुरु किया की राजीव गाँधी भरी बहुमत से चुनाव बाद सर्कार बनाने जा रहे है ,इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई ?ऐसा क्यों हुआ इसका जबाब किसी ने आज तक नहीं दिया ?समय अपने को दोहराने जा रहा है ,यूपी के चुनाव में किसी मीडिया ने ये नहीं कहा था की कांग्रेस की इतनी बुरी हालत होने वाली है पर हुई?क्यों इसका भी जवाब किसी के पास नहीं है जबकि सच्चाई यही है की जिस तरह राहुल जी ने यूपी का माहौल बनाया था उससे यही लगता था की राहुल जी ही मुख्यमंत्री बन्ने वाले हैं,पर यूपी की जनता को ये भी पता था की जो प्रधानमंत्री बन्ने वाला है वो मुख्यमंत्री कैसे बन सकता है और फिर कांग्रेस के दुसरे यूपी के नेताओं और मुलायम सिंह से तुलना में जाहिर है मुलायम सिंह जी भरी पड़े ,!गुजरात में भी ये हो सकता है क्योकि वहां भी कांग्रेस के पास कोई ऐसा नेता नहीं है १००%मोदी के बराबर का हो !फिर भी अगर गुजरात में कांग्रेस बजी मर ले तो ये कांग्रेस के लिए २०१४ में केंद्र सरकार के लिए रास्ता साफ दिखाई देने लगेगा और यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी !

  2. Rahul Gandhi me aisi kaun si yogyta hai kaun sabka aisa anubhav hai aisa ky kiya hai Jo mukabla sher dil modi ji se kar sake congress apni khair chahti ho to babua ko 10th janpath me hi rahne de uske paas matre ek yogyta hai khatra me mila udhar ka sir name Gandhi isi ke balpar congress ko sanjeevni milti hai magar ab yahi sanjeevni bhi congress ko nhi bacha payegi.

  3. gujrat chunav ke paas rah kar bhi kuchh nahi ukhad sakte,,,, baap, dada ne jaha se rajniti life sure ki thi wahi se rajniti life khatm bhi hone laga hai, ab to apna MP ka chunav jit lo ki chullu bhar pani me dub marne ki baat na kahe koe……………………….

  4. सदबुद्धि आ गयी,जो जिस लायक हो उस से वही कम करना अच्छा रहता है.राहुल को क्या जरूरत है,प्रचार करने की ,जब १९१४ में कुर्सी खली हो उस समय उन्हें सीधा वहीँ उस पर ही अवतरण करना चाहिए.beni जैसे लोग जन बूझ कर राहुल जी की image ख़राब करना चाहते हैं.खुद राहुल जी को इस से बचना चाहिए,यदि उन के न जाने से पार्टी का भत्ता बैठता है तो बैठे,उन के जैसे लोगों के स्तर का यह कार्य नहीं.पहले भी उतर प्रदेश और बिहार में इन चापलूसों ने घोड़े चढ़ा कर बदनाम करवा दिया.वह तो भला हो उन स्वमिभाक्तों का जोई इल्जाम अपने सर ले लिया.अब इस चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं.

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