जैसलमेर में उर्जा क्षेत्र को लगा बडा झटका…

जैसलमेर से मनीष रामदेव

पवन व सौर उर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पिछले दिनों अपनी एक विशेष पहचान बनाने वाले जैसलमेर जिले में इन दिनों उर्जा का उत्पादन कर रही कंपनियों को एक बडा झटका लगा है। विगत कुछ समय से वित्तिीय संकट से जूझ रही इन कंपनियों में काम कर रहे ठेकेदारों ने भुगतान नहीं होने के कारण कंपनियों का काम बंद कर दिया है.  ऐसे में उर्जा उत्पादन के लिये लगे करोडों के संयत्र किसी काम नहीं आ रहे है और उत्पादन ठप्प सा हो रहा है. भुगतान के आंकडों पर अगर नजर डालें तो ये भी चौकाने वाले ही होंगे कि जैसलमेर के विभिन्न ठेकेदारों का 150 करोड से भी अधिक का भुगतान इन कंपनियों में अटका पडा है, जिसके चलते ठेकेदारों के लिये आगे काम करना संभव नहीं हो पा रहा है. वहीं कंपनियों द्वारा भी भुगतान को लेकर इन ठेकेदारों को संतोषजनक उत्तर नहीं दिये जाने की स्थिति में ठेकेदार भुगतान को लेकर लामबंद हो गये हैं और कंपनियों के विरूद्ध मोर्चा खोलने की तैयारियों में जुट गये हैं.

सीमान्त जिले जैसलमेर में पवन व सौर उर्जा को लेकर बढ रही संभावनाओं के चलते विगत कई वर्षों में कई बडी व छोटी कंपनियों ने उर्जा उत्पादन के लिये जैसलमेर का रूख किया है और वृहत स्तर पर संसाधन जुटा कर बडे पैमाने पर उर्जा उत्पादन के कार्य में लग गये थे. जिससे जहां सरकार के लिये बिजली का संकट कम हो गया था. वहीं जैसलमेर जिले में रोजगार के अवसरों में भी बढोत्तरी हो गई थी. लेकिन पिछले कुछ समय से इन कंपनियों द्वारा विभिन्न स्तर पर कर्मचारियों, वाहन चालकों व ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं होने की समस्याओं के चलते इन लोगों द्वारा आये दिन आन्दोलन किये जा रहे हैं, जिससे विद्युत उत्पादन पर सीधा असर पड रहा है. जैसलमेर जिले में करीब आधा दर्जन पवन उर्जा कंपनियों व इतनी ही सौर उर्जा कंपनियों में विभिन्न स्तर पर कार्य कर रहे ठेकेदारों की माने तो करीब 150 करोड रूपये से अधिक का भुगतान लम्बे समय से बकाया पडा है और कंपनी के स्थानीय अधिकारी इस संबंध में कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पा रहे हैं . ऐसे में भुगतान को लेकर आशंकित इन ठेकेदारों ने स्थानीय रंगमहल होटल में एक बैठक आयोजित कर अपना एक संगठन बनाया है.

जैसलमेर जिला विंड एवं सोलर उर्जा ठेकेदार एसोशियेशन के नाम से बने इस संगठन की कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए संघ के अध्यक्ष हिम्मताराम चौधरी ने बताया कि मूलाराम चौधरी के संरक्षण में इस संगठन का निर्माण किया गया है, जो कि विभिन्न स्तर पर कंपनियों पर भुगतान के लिये दबाव बनायेगा और आगामी कार्यों में भुगतान व अन्य समस्याओं को लेकर एक नियमावली बनायेगा. इसी नियमावली के तहत कंपनियों में कार्य किये जायेंगे. संगठन की बैठक के अवसर पर अध्यक्ष चौधरी ने बताया कि जब तक ठेकेदारों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिलता तब तक किसी भी प्रकार का कार्य नहीं किया जायेगा. पवन व सौर उर्जा कंपनियों के विरूद्ध अब ठेकेदारों द्वारा मोर्चा खोले जाने के बाद जिले में उर्जा उत्पादन के कार्य को ब्रेक सा लग गया है. ऐसे में पूर्व में जितना उत्पादन जिले से होता था अब उसका दस प्रतिशत भी नहीं हो पा रहा है. इसके चलते इन कंपनियों के लिये संकट बढता ही जा रहा है. ठेकेदारों की माने तो वित्तीय समस्याओं से जूझ रही इन कंपनियों की हालत यह हो गई है कि वह अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन तक दे पाने की स्थिति में नहीं हैं.

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