देश कांग्रेस की जागीर है क्या जो वह मनमाने तरीके से सरकारी खजाने की लूट करे…

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-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

संसद राजनीति की बंधक बनी हुई है. सौदेबाजी जोरों पर है. और पूरे आसार है कि हमेशा कि तरह यह घोटाला भी रफा दफा हो जायेगा. जैसे गार को बाजार, इंडिया इनकारपोरेशन और विदेशी निवेशकों के दबाव में खत्म कर दिया गया और राजनीति ने चूं तक नहीं की, वैसे ही कोयला घोटाले में भी अंततः निवेशकों के हित संसदीय राजनीति पर भारी पड़ने वाले हैं. राजनीति की बात करें तो तीसरे मोर्चा के आकार लेने से पहले भाजपा और कांग्रेस में गुपचुप समझौता हो जाने के आसार भी प्रबल हैं. सोनिया का देश छोड़ने का मतलब तो यही निकलता है कि सरकार पर कोई खतरा है ही नहीं. भाजपा ने आज अपने रुख में थोड़ी नरमी लाते हुए कहा कि यदि सरकार कोल ब्लॉकों के लाइसेंस रद्द करके आवंटनों की एक स्वतंत्र जांच का आदेश दे तो वह कोयला घोटाले पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार हो सकती है. लेकिन पार्टी ने यह स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के त्यागपत्र की मांग नहीं छोड़ेगी. कोयला ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर संसद में दो सप्ताह तक कामकाज ठप्प रहने के बाद मॉनसून सत्र के कल से शुरू हो रहे आखिरी सप्ताह में भी गतिरोध समाप्त होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही. कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग कर रही भाजपा अपने रुख से पीछे हटती नहीं दिखाई दे रही. भाजपा का कहना है कि वह संसद के भीतर और बाहर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम रहेगी. विपक्षी राजग को सरकार के खिलाफ इस मुद्दे पर सपा, तेदेपा और वाम दलों के रुझान से भी थोड़ा बल मिलता दिखाई दे रहा है. दूसरी ओर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) 2006 से 2009 के बीच निजी कंपनियों को कोयला खदानों के आवंटन में कथित गड़बड़ी को लेकर की जा रही सीबीआई जांच की समीक्षा करेगा. सीबीआई के निदेशक ए.पी. सिंह की केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार के साथ जल्दी ही बैठक हो सकती है जिसमें सिंह एजेंसी की अब तक हुई जांच के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे. बहरहाल, बैठक की तिथि अबतक तय नहीं हुई है. सीबीआई ने मामले में दो शुरूआती जांच दर्ज की है. भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर तथा हंसराज अहीर की शिकायत पर सीवीसी ने मामला जांच एजेंसी के पास भेजा है. विपक्षी दलों के दबाव के बीच कोयले पर अंतर-मंत्रालयी समूह ऐसे 58 कोयला खदानों के भविष्य के बारे में सोमवार को विचार करेगा जिनके विकास के लिए संबंधित कंपनियों ने समयानुसार कदम नहीं उठाए हैं.समूह की सिफारिश पर खदानों का आवंटन रद्द हो सकता है.

गौरतलब है कि कोयला ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को साफ किया कि वह अभी भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे पर अडिग है लेकिन यदि सरकार सभी कोयला ब्लॉक आवंटनों को रद्द कर उनकी स्वतंत्र जांच कराए तो वह संसद की कार्यवाही बाधित नहीं करेगी. सुषमा स्वराज के बाद अब लालकृष्ण आडवाणी ने भी कोल आवंटन रद्द करने की मांग की है. उन्होंने अपने ब्लॉग में पीएम के इस्तीफे का जिक्र नहीं किया है. लगातार आठ दिन तक संसद को ठप्प रखने वाली बीजेपी अब मनमोहन के इस्तीफे की मांग से पीछे हटती नजर आ रही है. शनिवार शाम को लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर इस ओर इशारा किया. सुषमा ने ट्विटर पर लिखा है कि सोनिया गांधी ने फोन कर संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए उनसे कहा है. सुषमा ने भी शर्तों के साथ विचार का भरोसा दिया है. आडवाणी की पहली मांग कोयला खान आवंटन रद्द करने की है, जबकि उनकी दूसरी मांग मामले की न्यायिक जांच कराने की है. आडवाणी के ब्लॉग में भी पीएम के इस्तीफे को लेकर कोई चर्चा नहीं है. पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के द्वारा दिए जा रहे संकेत यही बताते हैं कि पार्टी पीएम के इस्तीफे पर नरम हो रही है. आडवाणी कोयला ब्लॉक आवंटन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान से आश्वस्त नहीं हैं. आडवाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोयला आवंटन पर प्रधानमंत्री का बयान आवश्वस्त करने वाला नहीं है.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने रविवार को सफाई दी कि भाजपा शासित राज्यों के किसी भी मुख्यमंत्री ने कोयला ब्लॉक नीलामी का विरोध नहीं किया था. भोपाल दौरे पर आए प्रसाद ने संवाददाताओं से पार्टी कार्यालय में चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदनाम करने में लगी है. भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप मढ़ने के साथ ही लोकतंत्र की मान्य परंपराओं की दुहाई देते हुए कांग्रेस ने कहा कि देश के प्रमुख विपक्षी दल को प्रधानमंत्री के इस्तीफे की जिद छोड़कर संसद के जारी मानसून सत्र में चर्चा करानी चाहिए. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर विपक्ष के हल्ला मचाने भर से प्रधानमंत्री या किसी मुख्यमंत्री को बदल दिया जाए, तो क्या इस देश में लोकतंत्र चल सकता है.

कोयला ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के मुद्दे पर अब चुप्पी साधे रखने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कांग्रेस पर कडा प्रहार करते हुए कहा है कि देश उसकी जागीर नहीं है जो वह मनमाने तरीके से सरकारी खजाने की लूट करे और देश की जनता आंखें मूंद सब कुछ देखती रहे. दरअसल, यह बात कही है संघ के मुखपत्र पांचजण्य ने. संघ ने अब तक इस मसले पर चल रहे गतिरोध पर चुप्पी साध रखी थी. पहली बार अपने मुखपत्र के माध्यम से उसने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधा है और अपनी बात रखी है.

गौरतलब है कि  टाटा, बिड़ला, आर्सेलर मित्तल जैसी कंपनियों को दिए गए लगभग चार दर्जन कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद हो सकता है. भारतीय उद्योग परिसंघ [सीआइआइ] ने कोयला ब्लॉक आवंटन को सिरे से रद्द किए जाने के खिलाफ सरकार को आगाह किया है. सीआईआई ने कहा है कि इस तरह के कदम से व्यापारिक भावना को ठेस पहुंचेगी. सीआइआइ के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने एक बयान में कहा है कि कानून को अपना काम करना चाहिए और जल्दबाजी में कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर लगातार हो रहे खुलासों के बीच अब यह नई जानकारी आई है कि जब केंद्र सरकार प्राइवेट कंपनियों को दिल खोलकर ब्लॉक बांट रही थी, उस वक्त सरकारी कंपनियों को कोल ब्लॉक न देने के लिए बहाना बनाया जा रहा था. बीजेपी सांसद हंसराज अहीर का कहना है कि कोल ब्लॉक न मिलने की वजह से ही भारतीय कोल लिमिटेड कोयला खनन का अपना लक्ष्य भी पूरा नहीं कर पा रही है जबकि उसके पास इस कार्य की विशेषज्ञता है. . कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट पर पैदा हुए बवंडर के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय [पीएमओ] खनन शुरू नहीं कर पाने वाली कंपनियों को आवंटित ब्लॉक रद नहीं करने पर कोयला मंत्रालय से खफा है. पीएमओ ने 6 सितंबर तक इस मामले को निपटाने का निर्देश दिया है. सोमवार को हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक के बाद पीएमओ ने कोयला मंत्रालय को यह संदेश दिया है.

एसोचैम ने कहा कि सरकार को कोयला ब्लाक आवंटन से जुड़े मुद्दों की जांच किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में हो. एसोचैम ने एक बयान में कहा है, ‘अगर बिना नीलामी कोयला आवंटन बड़ी घटना बन गया है और अनियमितताओं के आरोप हैं तो किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराई जाये.’

केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) का गठन सभी पहलुओं की जांच के लिए किया गया है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर खदानों का आवंटन रद्द किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आईएमजी 15 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट देगा.

जायसवाल ने कानपुर में संवाददाताओं से कहा, फिलहाल कोई भी कोयला ब्लॉक आवंटन रद्द नहीं किया जा रहा है और 15 सितंबर को मंत्री समूह की रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी.

कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों को आवंटित उन 58 कोयला खदानों के भविष्य के बारे में विचार के लिए कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव जोहरा चटर्जी की अध्यक्षता में गठित अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) की सोमवार को बैठक होगी जिनका विकास समय से नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही 33 सरकारी तथा 25 निजी कंपनियों को लाइसेंस आवंटन रद्द करने का नोटिस जारी कर चुकी है.

इसी के मध्य भाजपा ने अपने पुराने रुख में थोड़ी नरमी दिखाई है. इससे पहले पार्टी ने प्रधानमंत्री के त्यागपत्र की मांग को लेकर अड़े रहकर मानसून सत्र के अधिकतर समय संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मुम्बई में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैंने सोनिया जी से कहा कि कोयला ब्लाकों के आवंटन रद्द होने चाहिए और एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के आदेश दिये जाने चाहिए. यदि आप इन दोनों मांगों पर सहमत हैं तो हम चर्चा शुरू कर सकते हैं और संसद चल सकती है.’

सुषमा की यह टिप्पणी वाम मोर्चा, समाजवादी पार्टी, तेदेपा और कुछ अन्य पार्टियों की ओर से इस बात पर जोर दिये जाने के मद्देनजर भाजपा के अलग थलग पड़ने के बीच आई है कि संसद को चलने दिया जाए और मुद्दे पर चर्चा हो. राजग के प्रमुख सहयोगी दल जदयू की भी यह इच्छा है कि संसद चले ताकि कोयला घोटाले पर सरकार का ‘परदाफाश’ हो सके. सुषमा ने उन अटकलों को खारिज किया कि पार्टी प्रधानमंत्री के त्यागपत्र की अपनी मांग से पीछे हट गई है. उन्होंने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री के त्यागपत्र की मांग पर पीछे नहीं हटे हैं. हम अपनी मांग पर कायम हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए त्यागपत्र दे देना चाहिए.’

भाजपा नेता ने कल ट्विटर पर लिखा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने के बारे में उनसे बात की थी. उन्होंने आज कहा कि उन्हें पार्टी की मांगों को लेकर सोनिया की ओर से अभी भी कोई संकेत नहीं मिला है. सुषमा ने ट्विटर पर अपनी मांगों की सूची दी थी लेकिन प्रधानमंत्री के त्यागपत्र का उसमें कोई उल्लेख नहीं किया था. सुषमा ने कहा, ‘मीडिया के एक वर्ग द्वारा (भाजपा के रुख नरम करने के बारे में) निकाला गया निष्कर्ष पूरी तरह से गलत है. भाजपा प्रधानमंत्री के त्यागपत्र की मांग को लेकर दृढ़ है. इस पर पीछे हटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता.’

कार्टून: मनोज कुरील

उन्होंने कहा कि भाजपा कोयला आवंटनों के लिए प्रधानमंत्री को ‘सीधे तौर पर जिम्मेदार’ ठहराती है क्योंकि उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार उन्हीं के पास था. सुषमा ने कहा कि इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हम संसद का सत्र 7 सितम्बर को समाप्त होने के बाद सड़कों पर उतरेंगे.’

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, जहां प्रधानमंत्री के इस्तीफे की और उच्चस्तरीय जांच की मांग बनी रही वहीं अब सबकी मांग यह है कि कम से कम कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया जाए और सपा, वाम दल तथा अन्य सभी इसकी मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि संसद में अधिकतर लोग कोयला ब्लॉकों के आवंटन रद्द करने की मांग कर रहे हैं जो बड़ी बात है. जावड़ेकर ने कहा कि संसद में विरोध प्रदर्शन जनता का और देश का विरोध बन गया है.

काला धन एवं भ्रष्टाचार के विरोध में आंदोलन चला रहे योगगुरू  बाबा रामदेव ने कोयला ब्लॉकों के आवंटन में हुई गड़बडिय़ों के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग करते हुये सवाल किया कि अगर डा. सिंह ईमानदार हैं तो फिर बेईमान कौन है?

बाबा रामदेव ने आज यहां संवाददताओं को संबोधित करते हुये कहा कि कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का कीर्तिमान बना डाला है. उन्होंने कहा कि लाल किला मैदान पर आंदोलन के बाद उन्होंने अपना अभियान बंद नहीं किया बल्कि आगामी लोकसभा चुनाव तक सत्ता एवं व्यवस्था परिवर्तन तक यह जारी रहेगा.उन्होंने कोयला ब्लाक आवंटन घोटाले के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहाराते हुए आज कहा कि इतने बड़े घोटाले के बाद भी वह इस्तीफा नहीं देने पर अड़े हुए है और जबकि सरकार उनके ट्रस्ट को बदनाम करने की साजिश कर रही है.

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2 thoughts on “देश कांग्रेस की जागीर है क्या जो वह मनमाने तरीके से सरकारी खजाने की लूट करे…

  1. सबसे पहले तो मैं कहना चाहता हु की देश कांग्रेस की बपौती है या नहीं मई नहीं जनता हाँ कांग्रेस ने जो देशह के लिए किया है उसे भुलाया भी नहीं जा सकता ,जो कुरबानिया उसने दी है या देश की आज़ादी के लिए कांग्रेस के पूरब नेताओ ने जो भूमिका अदा की है वो देश के किसी और पार्टी के नेताओ ने या बी जे पी ने नहीं की है !बी जे पी तो सावरकर के अनुयायी है जिनके नाम देश के रास्ट्रपिता महात्मा गाँधी के कातिलो में सामिल रहा है भले ही अदालत ने साबुत न रहने के कारन बरी कर दिए हो !अब रही बात घोटाले की तो वर्तमान पारिस्थि के लिए पूरी कांग्रेस को दोषी करार नही दिया जा सकता .भाजपा या कोई भी राजनितिक दल ये नहीं कह सकते की उनके पार्टी में कोई घोटाले का दागदार नहीं है ?यु पी ए जनता की चुनी हुई सर्कार है भाजपा द्वारा दान दी हुई नहीं ,अगर सचमुच अवाम कांग्रेस के खिलाफ है तो कांग्रेस के खिलाफ की सभी पार्टी सड़क पर उतर कर आन्दोलन करे और दिखाए की जनता उनके साथ है ,संसद नहीं चलने देना भी जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी है जो भाजपा द्वारा करवाया जा रहा है अगर सचमुच कांग्रेस पार्टी भ्रस्ताचार की सीमा पार कर चुकी है तो फिर वो सारकार में कैसे रह सकती है ?उसके तो सिर्फ २०६ एम् पी ही हैं ?भाजपा जबाब दे की इतनी भर्स्ट कांग्रेस के साथ किसी को होना ही नहीं चाहिए ?अगर भाजपा एक दिन भी सारकार नहीं रहने देना चाहती तो संसद में अविश्वाश /विशष प्रस्ताव लाये ?अगर मनमोहन सिंह की सारकार कोल आवंटन में जनता की पैसे की लूट की है तो संसद न चलने में भी जनता की ही पैसे की बर्बादी हो रही है,बहुत सरे विधेयक पारित होने के लिए लंबित है वो भी तो जनता के लिए ही है ,ऐसे में संसद न चलने देना क्या उचित है भाजपा भी वही कर रही है जिसके लिए वह कांग्रेस को दोषी बता रही है!

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