सहारा अदालत में हुआ बेसहारा… निवेशकों को लौटाने होंगे 24 हज़ार करोड़ रुपये…

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सहारा ग्रुप को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा झटका देते हुए बेसहारा कर दिया. कोर्ट ने सहारा को निवेशकों के 24000 करोड़ रुपये वापस लौटाने का फैसला सुनाया. सहारा समूह की रियल एस्टेट कंपनी से जुड़े मामले पर आए इस फैसले में कोर्ट ने निवेशकों को 15 फीसदी ब्याज भी देने का निर्देश दिया है. ब्याज जोड़ने पर यह राशि 38 हज़ार करोड़ बनती है. शीर्ष कोर्ट ने पैसा लौटाने के लिए कंपनी को केवल 3 महीने का समय दिया है.

दिलचस्प है कि कोर्ट ने भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) से भी इस मसले पर सहारा समूह की 2 कंपनियों की जांच करने को कहा है. ये कंपनियां हैं- सहारा रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन. कोर्ट ने कहा है कि सेबी की जांच से सहारा का वास्तविक ग्राहक आधार पता लगाया जा सकेगा.

सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ सेबी की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल करेंगे.

रिपोर्टों के मुताबिक 2008 और 2011 के बीच सहारा ने करीब दो करोड़ निवेशकों से अरबों रुपए जमा किए थे. जून 2011 में सेबी ने सहारा से कहा था कि वो निवेशकों से निवेश लेना बंद करे क्योंकि इस पूरी व्यवस्था में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है.

सहारा ने फिर सिक्योरिटी अपीलेट ट्राइब्यूनल का रुख किया था जिसने सेबी के आदेश को बरकरार रखा. ट्राइब्यूनल ने कहा था कि वो निवेशकों का धन छह हफ्तों में वापस करे. सहारा ने फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

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5 thoughts on “सहारा अदालत में हुआ बेसहारा… निवेशकों को लौटाने होंगे 24 हज़ार करोड़ रुपये…

  1. क्या अचानक आगे बढे उद्योग घराने आर्थिक उदारीकरण का नतीजा है ,और उदारीकरण नीतियों में था कि नियम कानून सिर्फ आम जनता के लिए और देश के संविधान ,नियम के ऊपर जाकर इन घरानों को राजनितिक रूप से सांठगाँठ करके नियोमो के ऊपर जाकर मिलीभगत में सहयोग किया गया था.

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