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क्या हम हिंदू बंगाली शरणार्थियों को गले नहीं लगाएंगे…? (पार्ट-1)

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बांग्लादेशी घूसपैठियों की समस्या आज़ादी के कुछ समय बाद ही शुरू हो गई थी. दरअसल  इस समस्या के मूल में है वोटों की राजनीति. यही नहीं हमें इस समस्या की जड़ में जाने पर पता चलता है कि पूर्वी पाकिस्तान जो बांग्लादेश बन चुका है, से भारत में आने वाले सभी बांग्लादेशी मुस्लिम नहीं है, इनमें  बांग्लादेश में सताया गया हिंदू बंगाली भी हैं और अत्याचार का शिकार होने पर बड़ी उम्मीद से भारत में घुसता है. तो क्या हिंदू बंगाली को भी हम स्वीकार करने को तैयार नहीं? यदि हम पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं को अपने गले लगाने को उत्सुक रहते हैं तो बंगलादेश से आने वाले हिंदू भी हमारे उसी व्यवहार के पात्र होने चाहिए. हिंदू तो हिंदू है चाहे कहीं से आये उसे हमें गले लगाना ही होगा. पलाश विश्वास ने इस समस्या पर गहन अध्ययन किया है जिसे हम धारावाहिक रूप से प्रकाशित कर रहे हैं. -मॉडरेटर

-पलाश विश्वास||

२९ अगस्त को नई दिल्ली में अखिल भारतीय बंगाली उद्वास्तु समिति की ओर से मालव्यंकर हाल, कांस्टीट्यूशन क्लब एरिया रफी मार्ग में बंगाली हिंदू विभाजन पीड़ित शरणार्थियों की समस्याओं प एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। समिति के अध्यक्ष सुबोध विश्वास, महासचिव परमानंदघरामी और अन्यतम आयोजक सुप्रीम कोर्ट में वकील एटवोकेट अंबिका राय ने यह जानकारी दी है।

इस सिलसिले में खास बात यह है कि शरणार्थी नेता अब अपने हिंदुत्व पर जोर देकर संगोष्ठी में आने का वायदा करने वाले भाजपा अध्यक्ष नितिन गड़करी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और दूसरी हिंदुत्ववादी ताकतों से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। जबकि असम दंगों के बहाने संघ परिवार की ओर से नई दिल्ली, मुंबई , उत्तराखंड, हिमाचल और देश के दूसरे हिस्सों में बसाये गये बंगाली हिंदू शरणार्थियों को कदेड़ने की मुहिम इन्हीं हिंदुत्ववादी संगठनों की ओर से चलायी जा रही है। चूंकि घोषित तौर पर धरम निरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकते इन हिंदू बंगाली शरणार्थियों के नागरिक और मानव अधिकारों के मामले में मूक दर्शक बने हुए है, तो अब इस संगोष्ठी के जरिये शरणार्थियों के हिंदुत्व की पैदल सेना में बदल जाने की आशंका हो गयी है। वैसे भी बंगाल और देश के दूसरे हिस्सों में शरणार्थी समस्या के बारे में हिंदुत्ववादी नजरिया ही हावी है। इनके सामने उत्पन्न विकट परिस्थितियों के मद्देनजर कोई दूसरा विकल्प भी नहीं दीखता। सुबोध विश्वास के मुताबिक गडकरी समेत करीब दो दर्जन सांसदों ने संगोष्टी में शामिल होने के लिए सहमति दी है। बांग्लादेशियों के खिलाफ अथक अभियान चलाने वाले मीडिया को इस संगोष्टी के बारे में बताते हुए समिति का दस्तावेज व्यापक पैमाने पर भेजा गया है। सोशल मीडिया के अलाव न प्रिंट और न इलेक्ट्रानिक मीडिया ने इनकी समस्या को कोई स्थान देना जरूरी समझा। जाहिर है कि अब शरणार्थियों के सामने हिंदुत्व का ही एकमात्र विकलप नजर आ रहा है। इस नजरिये से अब तक कांग्रेस और वामदलों के प्रभाव में रहने वाले शरणार्थी आंदोलन के भगवा ब्रिगेड में  शामिल होने की पूरी संभावना है और हम इसे रोकने में असमर्थ हैं।

हम शुरु से शरणार्थी समस्या को विभाजन और सत्ता हस्तांतरण के दौरान वर्चस्ववादी राजनीति और जनसंख्या समायोजन का परिणाम मानते रहे हैं। शरणार्थी नेताओं के दस्तावेज से भी साफ जाहिर है कि असम और देश के दूसरे हिस्से में फैल रही सांप्रदायिक हिंसा और धर्म के नाम पर सांप्रदायिक ध्रूवीकरण उसी वर्चस्ववादी राजनीति और अर्थ व्यवस्था की निरंतरता का परिणाम है। समिति के दस्तावेज में भी इसका खुलासा हुआ है। हम बार बार आगाह करते रहे हैं कि जहां संघ परिवार हिंदुत्व राष्ट्रवाद के नाम पर सांप्रदायिक ध्रूवीकरण से हिंदी वोट बैंक बनाते हए चुनावी समीकरण अपने हक में करने की कवायद में लगी है, वहीं अल्पसंख्योकों का संकट और घना करके खांग्रेस और र दूसरे दल, जो खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने में थकते नहीं, अल्पसंख्यकों को बंधुआ वोट बैंक बनाये रखना चाहते हैं। इसीलिए असम की आग रोकने में किसी पक्ष का कोई हित नहीं है, राजनीति चाहती है कि देश को सांप्रदायिक आग के हवाले कर दिया जाये। हम असहाय यह सब देख रहे हैं और कोई प्रतिकार नहीं कर रहे हैं। विभाजन के तुरंत बाद से हिंदू बंगाली शरणार्थियों की समस्या की जो अनदेखी हुई है और आदिवासियों के साथ उन्ही की तरह उनका जो अलगाव और बहिष्कार हुआ है, देश को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी अगर ये असहाय लोग अंततः अपनी जान माल बचाने की गरज से हिंदुत्व की पैदल सेना में तब्दील हो गये।

कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के तहत धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों को पिछले दशकों में जिस तरह बंधुआ बनाये रखा असुरक्षा बोध और भयादोहन के जरिये, वामदलों ने जैसे दंडकारण्य के शरणार्थियों को मरीचझांपी बुलाकर उनका नरसंहार किया, तो घटनाकरम की तार्किक परिणति यही हो सकती है, जबकि देश के सचेत नागरिकों और सुशील समाज की भी हिंदू बंगाली शरणार्थियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है। उत्तराखंड के एक भाजपा विधायक किरण मंडल के कांग्रेस में दलबदल, उनकी खाली सीट पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की एकतरफा जीत और फिर किरण मंडल को कुमांयूं विकास मंडल का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद १९५२ से उधमसिंह नगर जिले में बसाये गये शरणार्थियों के खिलाफ शक्तिफार्म के कुछेक हजार परिवारों को भूमिधारी पट्टा दिये जाने के बहाने जो अभूतपूर्व घृणा अभियान चला, वह अब बांग्लादेशी भगाओ जिहाद में बदल चुका है। ऐसे में परंपरा मुताबिक शरणार्थी अपनी सुरक्षा के लिए उसी राजनीति का इस्तेमाल करेंगे, जो उनकी बेदखली की वजह है, इससे बड़ी विडंबना क्या हो सकती है?

अखिल भारतीय बंगाली उद्वास्तु समिति की ओर से मूलतः तीन मांगों पर फोकस किया गया है।

एकः  पंडित जवाहर लाल नेहरु  ने वायदा किया था,  `इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि ये विस्थापित, जो भारत में रहने आये हैं, उन्हें भारत की नागरिकता अवश्य मिलनी चाहिए।अगर इसके लिए कानून अपर्याप्त है, तो कानून बदल देना चाहिए।’ हकीकत में कानून तो बदल गया लेकिन बंगाली विभाजन पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए नहीं। तत्कालीन भारत सरकार ने सीमा पार करके भारत आने वाले पूर्वी पाकिस्तान के धार्मिक सामाजिक आर्थिक उत्पीड़न के शिकार शरणार्थियों को विबाजन पीड़ित नहीं माना और उन्हें पश्चिम पाकिस्तान से आये शरणार्थियों की तरह शरणार्थी पंजीकरण के साथ साथ नागरक बतौर पंजीकृत नहीं किया और न ही जनसंख्या स्थानांतरण और दो राष्ट्र के सिद्धांत के मुताबिक उन्हें कोई मुआवजा दिया। देशभर में उन्हें छितरा दिया गया। नागरिकता संसोधन कानून के जरिए विभाजन के तुरंत बाद आये पूर्वी बंगाल के शरणार्थियों के खिलाफ जिन्हें भारत सरकार ने ही विभिन्न परियोजनाओं के तहत पुनर्वास दिया, अब छह – सात दशक बाद विदेशी बांग्लादेशी घुसपैठिया करार देकर उनके खिलाफ देश निकाला अभियान चालू किया गया है।

समिति ने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को लिखे आवेदन में मांग की है कि  कानून में समुचित संशोधन करके पूर्वी पाकिस्तन बांग्लादेश से भारत आये वहां से विस्थापित अल्पसंखयक समुदायों को भारत की नागरिकता दी जाये। यही समिति की सबसे बड़ी मांग है।आवेदन पत्र में लिखा है,`हम पूर्वी पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश से वहां के करोड़ों अल्पसंख्यक हिंदू बंगाली शरणार्थियों जो किंन्हीं विशिष्ट परिस्थितयों में भारत में शरण लेने को विवश हुए, की नागरिकता के बारे में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।हमारी स्थिति उन लोगों से कतई भिन्न है जो आर्थिक कारणों से या फिर आजीविका के प्रयोजन से भारत में आ गये।

हम आपको यह स्मरण कराना चाहते हैं कि ३ दिसंबर, २००३ में पेश नागरिकता संशोधन विधेयक २००३ पेश करते समय इसके प्रभाव में आने वाले समाज के विभिन्न वर्गों, समुदायों के बीच कोई फर्क नहीं किया गया।लेकिन यह आप ही थे जिन्होंने कहा था कि `… हमारे देश के विभाजन के बाद शरणार्थियों के मामले में यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश जैसे देशों में अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा,और हमारा यह नैतिक उत्तरदायित्व है कि अगर परिस्थितियां ऐसे अभागा लोगों को भारत में शरण लेने को विवश करती हों तो उन्हें नागरिकता देने के मामले में हमारा दृष्टिकोण अवश्य ही उदार होना चाहिए।..’और आपकी इस अपील के बाद ततकालीन उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, मैं उस दृष्टिकोम से पूरी तरह सहमत हूं।’

इसका तार्किक नतीजा यह होना चाहिए था कि नागरिकता संशोधन विधेयक २००३ के Clause 2(i) (b) में पूर्वी पाकिस्तान/ बांग्लादेश से आये वहां के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के संदर्भ में समुचित संशोधन के जरिये नागरिकता हेतु प्रावधान किया जाता।विडंबना यह है कि सदन की सहमति के बावजूद ऐसा किया नहीं गया।लगभग एक दशक से यह प्रकरण लंबित है।इस बीच इन लाखों उत्पीड़ित विभाजन पीड़ितों में असुरक्षा की भावना प्रबल होती गयी क्योंकि उन्हें न केवल अवैध घुसपैठिया बताया जा रहा है , बल्कि कई राज्यों से उनके देश निकाले की कार्रवाई भी हो गयी। हम लज्जित हैं कि ऐतिहासिक परिस्थितियों के शिकार के बजाय हमसे अपराधियों जैसा सलूक किया जा रहा है।हमारे लोग बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार होकर अपने मूल मातृभूमि में शरण लेने के लिए पलायन करने को बाध्य हुए, लेकिन कैसी विडंबना है कि यहां भी उन्हें हजारों की तादाद में फिर नये सिरे से उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। क्योंकि उन्हें अपनी मूल मातृभूमि में भी विदेशी घुसपैठिया बताया जा रहा है,फिर ढोर डंगरों की तरह हिरासत में लेकर देश से बाहर निकाला जा रहा है। यानी उत्पीड़न का वही दुश्चक्र यहां भी।हम लोग भारत में दशकों से रह रहे हैं और हमारी कई पीढ़ियों ने भारत भूमि पर ही जनम ग्रहण किया है, फिर भी हमें भारतीय नागरिक नहीं माना जाता। कब तक यह अन्याय होता रहेगा?

इस विमर्श के आधार पर हमारा आपसे सविनय निवेदन है कि नागरिकता संशोधन विधेयक २००३ के Clause 2 (i) (b) में समुचित संशोधन हेतु आप हस्तक्षेप करें और पूर्वी पाकिस्तान/ बांग्लादेश से आये वहां के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के संदर्भ में संबंधित कानून और तमाम दूसरे कानूनों में जरूरी बदलाव करें। ताकि लाखों की तादाद में ये उत्पीड़ित करोड़ों हिंदू बंगाली शरणार्थी और उनके बच्चे भारत में गरिमा के साथ नागरिक जीवन निर्वाह कर सकें।’

दो:पुनर्वास योजनाओं में बसाये गये शरणार्थियों को कृषि भूमि और आवासीय प्लाट लीज पर मिले। अनेक पुनर्वास योजनाओं में लीज की अवखत्म हो गयी है।महाराष्ट्र के चंद्रपुर शरणार्थी शिविर जैसे अनेक जगह इस कारण लीज की अवधि खत्म होने के बाद पुनर्वासित शरणार्थियों की बेदखली शुरु हो गयी है। उधम सिंह नगर के दिनेशपुर इलाका और दंडकारण्य के कुछ इलाकों को छोड़कर ज्यादातर जगह इन्हें कृषि भूमि और आवासीय प्चाट का मालिकाना हक छह सात दशक के बाद भी नहीं मिला है। दबंग इकी जमीन दबाते जा रहे हैं और कारपोरेट विकास के कारण इनकी जमीन जाने वाली है।

समिति ने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को लिखे आवेदन में मांग की है कि  भारत में विभिन्न पुनर्वास परियोजनाओं के तहत बसाये गये बंगाली शरणार्थियों को एलाट कृषि भूमि और आवासीय प्लाट का मालिकाना हक उन्हे दिये जाये।आवेदन पत्र में लिखा है,`भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास साक्षी है कि आजादी की लड़ाई में हजारों बंगालियों ने अपने जीवन का बलिदान इस आशा के साथ कर दिया कि स्वतंत्र भारत में कम से कम उनकी अगली पीढ़ियां सुख से रह सकेंगी। किसे मालूम था कि लाखों जिंदगियों( हमारे माता पिता, भाई- बहनों और रिश्तेदारों की) की कुर्बानी की बदौलत हासिल स्वतंत्रता हमारी मातृभूमि का विभाजन करके हमसे हमारी पुश्तैनी संपत्ति से हमें बेदखल करके हमें अपने ही गृहदेश में शरण लेने को मजबूर कर देगी!
(जारी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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15 thoughts on “क्या हम हिंदू बंगाली शरणार्थियों को गले नहीं लगाएंगे…? (पार्ट-1)

  1. Danish Faisal अब आपको मुहम्मद के कुछ उत्तम चरित्र या सद्गुणों के बारे में प्रमाणिक हदीसों और इस्लाम की तवारीख से हवाले दिए जा रहे हैं .कुछ हदीसे लम्बी होने के कारण उसका सारांश ही लिया जा रहा है .पूरी हदीस साथ में दी गयी साईट में देख सकते हैं .यद् रखिये कि मुहम्मद का एक एक कार्य सुन्नत बन जाता था .और कानून का दर्जा प्राप्त कर लेता था .इसी को शरीयत भी कहा जाता है .और जो इसका इंकार करता है ,वह काफ़िर घोषित कर दिया जाता है . “अबू हुरेरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि जब तक हम ईसाइयों और यहूदियों का जमीन से सफाया नहीं करेंगे ,फैसले का अंतिम दिन नहीं आयेगा .इस लिए यहूदियों और ईसाइयों को क़त्ल करो .अगर वह किसी पत्थर या पेड़ के अन्दर भी छुप जायेंगे तो पेड़ बोल लार उनका पता दे देगा .लेकिन “गरकाद”का पेड़ चुप रहेगा .क्योंकि वह खुद यहूदी है .मुस्लिम-किताब 41 हदीस 6985 ,बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 791 -रिश्वतबाज (Briber )

    “कुरेश के लोगों ने रसूल से शिकायत की ,कि आप लूट के मॉल से “नज्द “के सरदार को रिश्वत देते है ,लेकिन हमें कुछ नहीं देते .रसूल ने कहा कि मैं ऐसा इस लिए करता हूँ ,ताकि वह लोगों को इस्लाम के प्रति आकर्षित करे.बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 558, द्वेष प्रचारक (Hate Preacher )

    “अबू जर ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,अल्लाह ने मुझे दुनिया में नफ़रत फैलाने का काम सौंपा कर लिए भेजा है.और अल्लाह के नाम पर लोगों के बीच नफ़रत फैलाना उत्तम काम है.इसा से ईमान पुख्ता होता है .नफ़रत ईमान का हिस्सा है.अबू दाऊद-किताब 40 हदीस 4582 -4583 . , लुटेरा (Plundarer )

    “जबीर बिन अब्दुल्ला ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,अल्लाह ने मेरे लिए लूट का माल हलाल कर दिया है.बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 351 चरित्रहीन(Characterless )

    “आयशा ने कहा कि रसूल के कई औरतों से गलत सम्बन्ध थे.फिर भी वह दूसरी औरतों को बुला लेते थे.और अपनी औरतों के लिए समय और दिन तय कर देते थे.पूछने पर कहते थे ,तुम चिंता नहीं करो ,तुम्हारी बारी तुम्हीं को मिलेगी .अगर मैं अल्लाह इच्छा पूरी करता हूँ ,तो तुम्हें जलन नहीं होना चाहिए .बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 311

    (नोट -इसी बात पर कुरान की सुरा -अहजाब 33 :51 naajil नस्लवादी (Racist )

    “अनस बिन मालिक ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,हारेग गुलाम को अपने मालिक के हरेक आदेश पा पालन करना चाहिए .और हरेक काले लोग (Negro )हबशी दास होने के योग्य हैं.क्योंकि उनका रंग काले सूखे अंगूर की तरह (Raisin )की तरह है .बुखारी – जिल्द 9 किताब 89 हदीस 256 .और बुखारी -जिल्द 1 किताब 11 हदीस 662 और 664 कामरोगी(Sex Addict )

    “अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल बारी बारी से लगातार अपनी पत्नियों और दसियों से सम्भोग करते थे ,फिर भी उनकी वासना बनी रहती थी .बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 142 .

    “अनस बिन मालिक ने कहा कि ,रसूल बारी बारी से हरेक औरत के साथ सम्भोग कर्राते थे .लेकिन उनकी वासना शांत नहीं होती थी .और जब भी युद्ध में औरतें पकड़ी जाती थीं ,रसूल उनके साथ सम्भोग जरुर करते थे.बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हद्दीस 26

  2. Danish Faisal मुहम्मद को गुलाम रखने का शौक था .वह गुलाम बनाता भी था और उनका व्यापार भी करता था .मुहमद के पास मर्द और औरत गुलाम थे .कूछ के नाम इस प्रकार हैं –

    मर्द गुलाम -साकन,अबू सरह ,अफ़लाह,उबैद ,जकवान ,तहमान,मिरवान,हुनैन ,सनद ,फदला,यामनीन,अन्जशा अल हादी ,मिदआम ,करकरा ,अबू रफी ,सौवान,अब कवशा,सलीह ,रवाह ,यारा ,नुवैन ,फजीला ,वकीद ,माबुर,अबू बकीद,कासम ,जैदइब्ने हरीस ,और महरान .

    स्त्री गुलाम -सलमा उम्मे रफी ,मैमूना बिन्त असीब ,मैमूना बिन्त साद ,खदरा ,रिजवा ,रजीना,उम्मे दबीरा ,रेहाना ,और अन्य जो भेंट में मिली थीं आतंकवादी (Terrorist )

    “अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,मुझे अल्लाह ने आदेश दिया है कि मैं लोगों के दिलों में दहशत पैदा कर दूँ ,ताकि लोग भयभीत होकर अपने खजाने और सत्ता मेरे हाथों में सौंप दें .बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 220 “अबू हुरैरा ने कहा कि ,एक मुआज्जिन ने ईशा कि नमाज में अजान देने में देर कर दी ,रसूल ने उसको उसके घर सहित जिन्दा जलवा दिया .और वह माफ़ी मांगता रहा .

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 11 हदीस 626 मेरा उन सभी लोगों से अनुरोध है जो,मुस्लिम ब्लोगरो के दुष्प्रचार ,झूठ से प्रभावित होकर मुहम्मद को एक आदर्श व्यक्ति मानने की भूल कर रहे हैं .यह तो थोड़े से उदाहरण हैं .मुहम्मद के आदर्श दुर्गुणों के बारे में जितना लिखा जाये उतना ही कम पडेगा . मुसलमान में मुहम्मद के यही आदर्श दुर्गुण अवश्य मौजूद होते हैं .यही मुसलमानों की पहिचान है .यही मुसलमान अपने बच्चों को सिखाते हैं और इन्ही गुणों को अपना कर जिहादी तैयार होते हैं .

  3. bhai aap sab log islam ko galat samajty ho islam ko jano islam galat nhi hota musalman kbhi kbhi galat hoskta hai.hindu bharm ka real nam bht kam hindus ko ptaai hoga ise sanatan dharm kehte hai sanatan dhrm matlab sachai ki tarf bulane wala dharm lekin ab yes dhrm sachai ki tarf nhi bulata pandito ne use badal diya hai allah ka quran mein likha hai k is dhrti pr 1lakh24 hazar massengr aaye or jo b ak allah ki pujne ko kehe wo massnger hua krta tha isi trah aap log k bhgvan ram bhi allah k massngr hoskte ya hindu dhrm k koi to allah ka messngr tha q k aap logo k jo ved hai us k sam ved mein padh lo yes likha hai allah ak hai or ak antim maharishi ayga jo sachai ki oor bulayga jis k pas allah {sabka bhagwan}ki kitab hogi jis mein sahi jine ka tarika hoga or wahi sahi hoga yes hindu {sanatan dharm } k vedo mein likha hai to mere hindu bhayyo aap ka dhrm bhi ak allah {bhagwan}ki oor bulata hai aap khud study kro apne dhrm ki.

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  5. अगर भारत में बंगला देसी आ कर रहते है तो उन्हें हमारा अहसान मानना चहिये घर में आया मेहमान जब घर में हक दिखा तो ऐ तो उसे उसका अवकात भी दिखाना चाहिए भारती पाकिस्तान में बंगला देस में सुरछित नही है हमारे नेता लोगो को जब भारती महिला लोगो से पाकिस्तान में रेप होता है तब उनसे वोट सपोर्ट में कोई नेता बोलता उसे मालूम है वो वोट नही दे सकते | मगर बंगलादेसी वोट का खजाना है इसलिए इनको अपने बाप _दादा मानते है इस दंगे का कोई दोसी है तो सिर्फ नेता जिमेदार है इसलिए बांग्लादेसी को मत मरो नेता को मरो | गाँधी जी ने कहा है पाप से गुर्णा करो पापी से नही इसलिए सरनाथी से नफरत मत करो नेता से नफरत करो

  6. अगर हिदू बंगला देशी जिनकी जान ,माल, इज्ज़त बंगला देश जैसे कट्टर इस्लामिक देश में सुरक्षित नहीं है तो वो लोग और कहाँ जायेंगे?ये लोग हमारे अपने हिदुस्तानी ही हैं जो इस्लाम के नाम पर बने देश में रह गए थे इस वादे पर की वहां इनके अधिकार सुरक्षित हैं पर ऐसा नहीं हुआ और आज भी जब बंगला देश के मुस्लिम घुसपैठिये जिहें वहां कोई समस्या नहीं है फिर भी हिन्दुस्तान की चमक यहाँ खिंच लाती है या फिर एक और नया बंगलादेश या पकिस्तान बनाने की साजिश के तैहेत आते हैं उनके लिए ५०,००० मुसलमान मुंबई के आज़ाद मैदान में दंगा और अमर जवान ज्योति तोड़ने का देशद्रोह कर सकते है और इस बात का सबूत दे सकते हैं की वो मुस्लिम भाइयों के साथ हैं चाहे वो चोर ,डकैत ,डान या हिदुस्तान को तोड़ने आया कोई विदेशी हो पर ये उसका साथ देंगे , तो क्या हम उन हिदुस्तानिओं का साथ नहीं देंगे जिन्हें मजबूरी में हमारे देश से इस्लाम के नाम पर अलग हुए टुकड़े में इतनी यातनाओं को झेलते हुए रहना पड़ा ,अगर नहीं तो उनका देश कोन सा है? जो हिदुस्तानी इन्हें यहाँ नहीं रहने देना चाहता मेरी समझ से वो उन मुसलामानों से भी गया गुजरा है जिन्होंने आजाद मैदान में दंगा किया.

  7. अगर हिदू बंगला देशी जिनकी जान ,माल, इज्ज़त बंगला देश जैसे कट्टर इस्लामिक देश में सुरक्षित नहीं है तो वो लोग और कहाँ जायेंगे?ये लोग हमारे अपने हिदुस्तानी ही हैं जो इस्लाम के नाम पर बने देश में रह गए थे इस वादे पर की वहां इनके अधिकार सुरक्षित हैं पर ऐसा नहीं हुआ और आज भी जब बंगला देश के मुस्लिम घुसपैठिये जिहें वहां कोई समस्या नहीं है फिर भी हिन्दुस्तान की चमक यहाँ खिंच लाती है या फिर एक और नया बंगलादेश या पकिस्तान बनाने की साजिश के तैहेत आते हैं उनके लिए ५०,००० मुसलमान मुंबई के आज़ाद मैदान में दंगा और अमर जवान ज्योति तोड़ने का देशद्रोह कर सकते है और इस बात का सबूत दे सकते हैं की वो मुस्लिम भाइयों के साथ हैं चाहे वो चोर ,डकैत ,डान या हिदुस्तान को तोड़ने आया कोई विदेशी हो पर ये उसका साथ देंगे , तो क्या हम उन हिदुस्तानिओं का साथ नहीं देंगे जिन्हें मजबूरी में हमारे देश से इस्लाम के नाम पर अलग हुए टुकड़े में इतनी यातनाओं को झेलते हुए रहना पड़ा ,अगर नहीं तो उनका देश कोन सा है? जो हिदुस्तानी इन्हें यहाँ नहीं रहने देना चाहता मेरी समझ से वो उन मुसलामानों से भी गया गुजरा है जिन्होंने आजाद मैदान में दंगा किया.
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